Saturday, May 21, 2022
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‘हिजाब पहनकर कॉलेज में प्रवेश न करें’: मध्य प्रदेश के कॉलेज की दो टूक, कर्नाटक में बुर्के के नाम पर परीक्षा से काटी कन्नी

इस्लामवादी समूह पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और उसकी छात्र शाखा कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI) ने इन विरोधों का समर्थन किया। उन्होंने स्कूल में यूनिफॉर्म के नियम होने के बावजूद स्कूलों में हिजाब/बुर्का की अनुमति देने की माँग की है।

कर्नाटक में शुरू हुआ हिजाब विवाद (Hijab Controversy) का असर देश के तमाम कोनों तक दिखने लगा है। अब मध्य प्रदेश के दतिया की एक कॉलेज ने अपने छात्र-छात्राओं से कॉलेज में समुदाय विशेष की पोशाक और हिजाब नहीं पहनकर आने के लिए कहा है। उधर, कर्नाटक के शिवमोगा जिले के एक सरकारी हाईस्कूल द्वारा हिजाब पहनकर आने से मना करने पर 13 छात्राओं ने कक्षा 10 की प्रारंभिक परीक्षा देने से इनकार कर दिया।

मध्य के दतिया के पीजी गर्वनमेंट कॉलेज ने परिसर में हिजाब को लेकर एक सूचना जारी किया है। कॉलेज में हिजाब पहने दो छात्राओं का एक वीडियो सामने आने के बाद कुछ लोगों ने प्रदर्शन किया था। इसके बाद कॉलेज प्रशासन ने इस सूचना को जारी किया। कॉलेज द्वारा जारी आदेश में कहा गया है, “महाविद्यालय में समस्त प्रवेशित छात्र/छात्राओं छात्र/छात्राओं को सूचित किया जाता है कि किसी समुदाय विशेष से संबंधित अथवा किसी अन्य विशेष वेश-भूषा जैसे हिजाब आदि में प्रवेश ना करें। समस्त छात्र/छात्राएँ शिक्षा के इस मंदिर में शालीन एवं सभ्य वेशभूषा में प्रवेश लें।”

इस मामले पर प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि दतिया के पीजी कॉलेज का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। प्रिंसिपल द्वारा निकाले गए आदेश की जाँच के लिए दतिया के कलेक्टर को निर्देश दिया गया है। मिश्रा ने कहा, “प्रदेश सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है #Hijab पर बैन को लेकर सरकार के पास कोई भी प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है इसलिए कोई भ्रम ना फैलाएँ।”

उधर कर्नाटक के शिवमोगा जिले के गवर्नमेंट पब्लिक स्कूल के शिक्षकों ने परीक्षा के दौरान स्कूल की मुस्लिम लड़कियों को उनके हिजाब उतारने का आदेश दिया, लेकिन लड़कियों ने इससे साफ मना कर दिया और परीक्षा का बहिष्कार कर दिया। उन्होंने कहा कि अगर उन पर हिजाब उतारने के लिए दबाव डाला गया तो वे स्कूल छोड़ देंगी। उनका कहना है कि उन्हें उनकी इस्लामिक पोशाक में ही परीक्षा देने की अनुमति दी जाए।

एबीपी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षकों और स्कूल प्रशासन ने इस छात्राओं को एक अलग कमरे में परीक्षा देने के लिए मनाने की कोशिश की, ताकि वहाँ उन्हें हिजाब पहनने की आवश्यकता ना पड़े, लेकिन छात्राओं ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया और परीक्षा छोड़ दिया। वहीं स्कूल की इन मुस्लिम लड़कियों के परिजनों ने भी अपने बच्चों का समर्थन किया और यह कहते हुए उन्हें घर ले गए कि वे स्कूल नहीं आएँगी।

हिजाब के लिए परीक्षा का बहिष्कार करने वाली छात्रा आलिया महत का कहना है, “अदालत ने अभी तक आदेश नहीं दिया है। इसलिए, जो भी हो हम हिजाब नहीं उतारेंगे। हम परीक्षा न भी दें तो कोई बात नहीं। मेरे लिए परीक्षा नहीं, धर्म महत्वपूर्ण है। अगर हिजाब अनिवार्य नहीं किया गया तो हम स्कूल नहीं आएँगे। मेरे माता-पिता ने मुझसे कहा है कि अगर हिजाब उतारने के लिए कहा जाए तो मैं घर वापस आ जाऊँ।”

खबर फैलते ही DDPI रमेश आनन-फानन में स्कूल पहुँचकर छात्राओं को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं मानीं। रमेश ने कहा कि स्कूल विकास निगरानी समिति और माता-पिता समस्या समाधान खोजने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा, “परीक्षा का बहिष्कार करने वाली छात्राओं की परीक्षा के लिए फिर से व्यवस्था की जाएगी।”

वहीं, इस्लामवादी समूह पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और उसकी छात्र शाखा कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI) ने इन विरोधों का समर्थन किया। उन्होंने स्कूल में यूनिफॉर्म के नियम होने के बावजूद स्कूलों में हिजाब/बुर्का की अनुमति देने की माँग की है। एक अन्य इस्लामिक संगठन जमीयत उलमा-ए-हिंद ने भी इसका समर्थन किया है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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