Friday, April 12, 2024
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राहुल भट की हत्या के 10 दिन बाद भी जारी कश्मीरी पंडितों का विरोध प्रदर्शन, मुंडवाए बाल: झेलम नदी पर पूजा, लाल चौक तक रैली

बाद में आक्रोशित कश्मीरी हिंदू मुट्ठी पुल पर आ गए और यहाँ पर भी सड़क मार्ग को जाम कर दिया। इन लोगों ने आतंकियों के खिलाफ खुलकर नारेबाजी की।

प्रधानमंत्री पुनर्वास योजना के तहत कश्मीर में काम कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन जारी है। मारे गए सरकारी कर्मचारी राहुल भट की दसवीं के मौके पर आज (21 मई 2022) कश्मीरी पंडित कर्मचारियो ने झेलम नदी पर उनकी आत्मा की शांति के लिए विशेष पूजा की और उसके बाद विरोध मार्च करते हुए लाल चौक तक गए, जहाँ घंटा घर के सामने धरना प्रदर्शन भी किया।

कर्मचारी कश्मीर घाटी से देश के किसी भी प्रान्त में ट्रांसफर की अपनी माँग पर अड़े हुए हैं। इसी कड़ी में जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में कश्मीरी पंडितों ने विरोध में अपने सिर मुँडवा लिए। इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।

सिर मुंडवाने के बाद कश्मीरी पंडित संजय कौल ने कहा, “हमने राहुल पंडित के लिए स्वेच्छा से मुंडन किया, क्योंकि वह बहुत कम उम्र में मारे गए। उनकी 5 साल की बेटी है। हम सरकार से कहना चाहते हैं कि वह जागे, क्योंकि यह नरसंहार है। एक अन्य कश्मीरी पंडित रंजन जोतशी ने कहा कि दुख की इस घड़ी में वे राहुल के परिवार के साथ हैं। हम सरकार से कश्मीरी पंडितों के ठोस और स्थायी पुनर्वास की माँग कर रहे हैं और तब तक हम जम्मू ट्रांसफर चाहते हैं।”

जम्मू-अखनूर हाईवे पर वाहनों की आवाजाही अवरूद्ध कर कश्मीरी हिंदुओं ने पाकिस्तान के खिलाफ भी नारे लगाए और कहा कि जिन लोगों ने राहुल की हत्या की है, को जेलों में डाला जाए। वहीं कश्मीर घाटी में तैनात कश्मीरी हिंदू कर्मियों को जम्मू में तैनात किया जाए। प्रदर्शन की वजह से करीब एक घंटे तक जम्मू-अखनूर रोड ब्लॉक रहा जिससे वाहनों की आवाजी बुरी तरह से प्रभावित हुई। जगह जगह जाम लग गए।

बाद में गुस्साए कश्मीरी हिंदू मुट्ठी पुल पर आ गए और यहाँ पर भी सड़क मार्ग को जाम कर दिया। इन लोगों ने आतंकियों के खिलाफ खुलकर नारेबाजी की। प्रशासन से यह माँग की कि घाटी को पूरी तरह से आतंक विहीन किया जाए। कश्मीरी हिंदू लोगों ने कहा कि घाटी में कश्मीरी हिंदू लोगों को नहीं बसने देने की साजिश पाकिस्तान और अलगाववादी रच रहे हैं। लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे, कोई हमारे हक नहीं छीन सकता।

राहुल भट की आतंकियों ने गोली मारकर कर दी थी हत्या

बता दें कि राहुल भट को आतंकियों ने 12 मई को बडगाम जिले के चदूरा कस्बे में मार गिराया था। राहुल भट को 2010-11 में जम्मू-कश्मीर में प्रवासियों के लिए विशेष रोजगार पैकेज के तहत क्लर्क की नौकरी मिली थी। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भट की पत्नी ने कई बार उनके तबादले की अपील करते हुए अधिकारियों से मुलाकात भी की थी लेकिन इस बाबत कोई कदम नहीं उठाए गए। वहीं राहुल भटट् हत्याकांड के बाद से कई कर्मचारी दफ्तर नहीं गए हैं। उनका कहना है कि वे खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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