Wednesday, June 19, 2024
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‘मेरे पास खेती के लिए खाद-बीज खरीदने के भी पैसे नहीं’: बैंकों का चक्कर लगाकर थके किसान ने कर ली आत्महत्या, सुसाइड नोट में केरल सरकार को ठहराया जिम्मेदार

केरल के 55 साल के किसान केजी प्रसाद को राज्य सरकार की लापरवाही की वजह से अपनी जीवन लीला समाप्त करनी पड़ी। सुसाइड नोट में किसान ने बैंकों और राज्य की पिनाराई विजयन की नेतृत्व वाली वामपंथी सरकार पर कर्ज में धकेलने का आरोप लगाया।

केरल में एक किसान ने शुक्रवार (10 नवंबर 2023) को मौत को गले लगा लिया। अल्लापुझा में वामपंथी सरकार की सिस्टम का शिकार होकर लगभग 55 साल के किसान केजी प्रसाद ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। दरअसल, खेती करने के लिए पैसे नहीं होने और बैंकों द्वारा लोन देने से मना करने के बाद प्रसाद परेशान हो गए थे।

पैसे नहीं होने के कारण केजी प्रसाद पिछले चार साल से धान की खेती नहीं कर पाए थे। उनके पास आखिरी उम्मीद बैंक थे। उन्होंने बैंकों से लोन लेने की कोशिश की, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा किसानों के लिए कई योजनाएँ चलाने के बाद भी बैंकों ने उनकी उम्मीद तोड़ दी। मरने से पहले प्रसाद ने एक सुसाइड नोट भी छोड़ा है।

गौरतलब है कि अलाप्पुझा के कुट्टनाड क्षेत्र में किसानों के आत्महत्या करने का ये पहला मामला नहीं है। ऐसे कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। वहीं, केरल की पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली वामपंथी सरकार गरीबों-किसानों की मददगार होने का दावा करती है। हालाँकि, इस तरह की घटनाओं को देखकर सच्चाई इससे अलग नजर आती है।

मौत को गले लगाने से पहले प्रसाद ने अपने सुसाइड नोट में लिखा, “कोई भी बैंक मुझे खेती के लिए लोन नहीं दे रहा है। अब मेरे पास जीने का कोई साधन नहीं है।” उन्होंने राज्य सरकार और कुछ बैंकों पर ‘उन्हें गंभीर वित्तीय संकट में धकेलने का आरोप लगाया है। उन्होंने लिखा है कि इस वजह से उन्हें अपनी जीवन लीला समाप्त करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

सामने आए एक फोन रिकॉर्डिंग में अवसाद में शराब का सहारा लेते नजर आते हैं। मौत को गले लगाने से पहले प्रसाद ने अपने दोस्त से कहा था, “मैं अपने जीवन में असफल हो गया हूँ। मैंने 20 साल पहले शराब पीना छोड़ दिया था, लेकिन अब मुझे अपनी दयनीय हालात की वजह से यह आदत शुरू करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।”

अपने सुसाइड नोट उन्होंने लिखा है कि साल 2011 में उन्होंने एक बड़े बैंक से कर्ज लिया था। अपनी खराब आर्थिक हालात के चलते वो बैंक का पूरा पैसा नहीं लौटा पाए। हालाँकि, इस दौरान बैंक को उन्होंने 20,000 रुपए लौटाए थे। इसके बाद उन्होंने 2020 में बैंक की जारी की गई ‘एकमुश्त भुगतान योजना’ के तहत लोन खत्म कर दिया था।

प्रसाद ने आरोप लगाया कि वो थाकाज़ी में चार एकड़ भूमि में धान की खेती जारी रखने के लिए वे दर-दर भटक रहे थे, लेकिन ‘कम सिबिल स्कोर’ की वजह से कोई भी बैंक उन्हें लोन देने के लिए तैयार नहीं था। दरअसल, CIBIL स्कोर एक उधारकर्ता के क्रेडिट इतिहास होता। इसके स्कोर को आधार बनाकर कर्जदाता ऋण देते हैं।

मृतक किसान ने सुसाइड नोट में आगे लिखा है कि राज्य सरकार बैंक से लिए गए ‘पीआरएस लोन’ और उसके ब्याज का भुगतान करने में नाकाम रही। यही वजह है कि उनका सिबिल स्कोर और भी कम हो गया। सरकार द्वारा धान खरीद के बाद दी गई पैडी रिसिप्ट शीट (पीआरएस) के आधार पर किसानों को पीआरएस लोन दिया जाता है। इस सीज़न में खरीदे गए धान के लिए बैंक ने 5 लाख रुपए दिए थे।

इस पीआरएस लोन को धान बेचने वाले किसान के नाम से सरकार बैंकों को लौटा देती है, लेकिन 2022-23 के धान खरीद सीजन के लिए सरकार ने बैंकों को पीआरएस राशि का भुगतान नहीं किया। पीआरएस लोन और ब्याज को तुरंत चुकाना राज्य सरकार का कर्तव्य है, क्योंकि इसके बदले सरकार ने किसान से धान ले लिया होता है।

केरल की वामपंथी सरकार को न तो किसानों की आत्महत्या से मतलब है और न ही जनता की परेशानियों से वो तो बस केरल मॉडल की बात कर उछलते रहते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रसाद भाजपा कार्यकर्ता थे और उन्होंने भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष के तौर पर भी काम किया था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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