Wednesday, August 4, 2021
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गिड़गिड़ाते रहे पुजारी, दुर्गा मंदिर में तोड़फोड़ मचाते रहे दंगाई: खजुरी खास से ग्राउंड रिपोर्ट

अब खजुरी खास इलाके में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद है। इसलिए इलाके में बाहर तो शांति दिख रही है लेकिन लोग, खासतौर से हिन्दू समुदाय के लोग अभी भी डरे हुए हैं कि कहीं ऐसा न हो कि सुरक्षाबलों के जाते ही फिर से दंगाई उन्हें निशाना बना लें।

पिछले दिनों दिल्ली हिन्दू-विरोधी दंगों से दहशत में रही। आज भी दंगों के निशान जहाँ-तहाँ बिखरे पड़े हैं। ऐसे में ऑपइंडिया की टीम चाँदबाग, करावल नगर रोड, खजुरी खास स्थित दुर्गा फकीरी मंदिर के पुजारी रवि शास्त्री से मिलने गई। उन्होंने बताया जिस दिन दंगाइयों ने भजनपुरा-चाँदबाग मोड़ का पेट्रोल पम्प फूँका, उसी दिन उनके निशाने पर इस इलाके में संख्या में कम होने के बावजूद भी हिन्दू समुदाय और मंदिर निशाने पर रहे।

श्री दुर्गा फकीरी मंदिर, जहाँ अब बोर्ड ठीक करा दिया गया है।

चाँदबाग चौराहे के पास करावल नगर रोड पर ही दुर्गा फकीरी मंदिर है। पेट्रोल पंप फूँकने के बाद दंगाई तेजी से चारो तरफ आग लगा रहे थे। शाम का समय था। दहशत और शोर बढ़ता जा रहा था। जैसे ही भारी संख्या में दंगाइयों की नजर मंदिर की तरफ पड़ी तो सबसे पहले मंदिर बचाने के लिए मंदिर के पुजारी प्रार्थना करने लगे। दंगाइयों ने मंदिर पर पत्थरबाजी शुरू कर दी थी। दंगाइयों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए, मंदिर का चैनल गेट बंद कर दिया गया। बाद में शटर भी बंद करना पड़ा।

तब तक पास के पेट्रोल पम्प बचाने के लिए फ़ोर्स की धमक बढ़ जाने से दंगाई मंदिर को कोई बड़ा नुकसान नहीं पहुँचा सके। उस पेट्रोल पम्प के बारे में भी कहा जा रहा है कि अगर दंगाई इंडियन ऑइल के उस पम्प को पूरी तरह नष्ट करने में सफल हो गए होते तो इलाके का आधा किलोमीटर का क्षेत्र साफ़ हो गया होता। कपिल मिश्रा ने भी ऑपइंडिया से इंटरव्यू के दौरान इस बात की पुष्टि की थी।

लेकिन, फिर भी दंगाइयों ने मंदिर का बोर्ड तोड़ दिया और साथ ही बाहर के दो कैमरे तोड़ दिए। प्रशासन की मुस्तैदी के कारण मंदिर को कोई खास नुकसान नहीं पहुँचा।

हालाँकि, इसी दुर्गा फकीरी मंदिर को लेकर बीबीसी सहित कई वामपंथी मीडिया गिरोह ने न्यूज़ चलाया कि इस मंदिर को मुस्लिम ने सौहार्द में बचाया। यहाँ सवाल ये हैं कि मुस्लिम किससे बचा रहे थे मंदिर, दूसरे मुस्लिमों से? अब यहाँ यह कह कर चित भी अपनी और पट भी अपनी साबित करने की कोशिश की गई कि जो दुर्गा मंदिर तोड़ने आए थे वो दंगाई थे उन्हें मुस्लिम कहकर सभी मुस्लिमों को बदनाम मत कीजिए, और जो नीचे मंदिर न तोड़ने या मंदिर के आस-पास से हट जाने की अपील कर रहे थे वे अच्छे वाले मुस्लिम हैं। ये तो वही बात हो गई अगर मंदिर तोड़ने वाले भी उसी मजहब के हैं तो बाहर से बचाने का नाटक क्यों?

बता दें कि ये मंदिर चाँदबाग इलाके में ही उस शिवमंदिर से थोड़ा पहले है जिसके छत पर भारी पथराव करके वहाँ से पुजारी को भागने पर मजबूर कर दिया था। शिव मंदिर ताहिर हुसैन के घर के ठीक सामने हिन्दुओं की गली नंबर-5 में दो मकान छोड़कर था। जिसे मुस्तफाबाद से आने वाले दंगाइयों ने नष्ट करने की कोशिश की थी।

कहा जाता है कि मंदिरों पर पथराव के बाद ही चाँदबाग में हिन्दू और मुस्लिमों के बीच दोनों तरफ से नारेबाजी तेज हो गई थी। जिसके बाद अंकित शर्मा माहौल शांत कराने गए तो प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ताहिर हुसैन के घर से निकली मुस्लिम दंगाइयों की भीड़ उन्हें और उनके साथ दो लोगों को खींच कर अंदर ले गई थी जिनकी वीभत्स हत्या के बाद बाद में नाले से लाश बरामद हुई।

प्रत्यक्षदर्शियों ने ऑपइंडिया को बताया था कि किस तरह से मुस्तफाबाद और खजुरी से आने वाली भीड़ तारिक हुसैन के घर को बेस बनाकर आस-पास के हिन्दू घरों और दुकानों को भारी नुकसान पहुँचाती है। किस तरह से अधिकांश छोटे बड़े दूकान पहले लूट लिए जाते हैं और बाद में तोड़-फोड़ कर पेट्रोल बम आदि के जरिए आग के हवाले कर दिया गया।

आज चाँदबाग इलाके में फैले दंगों को कई दिन बीत गए हैं लेकिन लोगों खासतौर से उस इलाके में रहने वाले हिन्दुओं के अंदर डर अभी भी बना हुआ है। इस बात की पुष्टि मंदिर के पुजारी ने भी की। कहा- लोग अभी भी मंदिर आने से डर रहे हैं कि कहीं उनकी पहचान न जाहिर हो जाए। कोई उन्हें हिंदूहोने की वजह से, मंदिर आने के कारण फिर से निशाना बनाने की कोशिश न कर ले।

हालाँकि, अब इलाके में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद है। इसलिए इलाके में बाहर तो शांति दिख रही है लेकिन लोग, खासतौर से हिन्दू समुदाय के लोग अभी भी डरे हुए हैं कि कहीं ऐसा न हो कि सुरक्षाबलों के जाते ही फिर से दंगाई उन्हें निशाना बना लें।

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रवि अग्रहरि
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