Tuesday, April 16, 2024
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परमार वंश के राजमहल पर ‘निजी सम्पत्ति’ का बोर्ड लगाने वाले काजी पर जुर्माना, जगह खाली करने का आदेश

सोशल मीडिया पर इस विषय के उछलने के बाद तहसीलदार इस महल में पहुँचे और उन्होंने एक्शन लेते हुए महल से उस बोर्ड को हटा दिया, जिसमें इसे काजी की निजी सम्पत्ति बताया गया था।

हाल ही में मध्य प्रदेश के विदिशा जिला मुख्यालय से 70 किलोमीटर दूर प्राचीन उदयपुर नगर में तकरीबन एक हजार साल पुराने परमार वंश के राजमहल पर लगे ‘निजी सम्पत्ति’ वाले बोर्ड को प्रशासन द्वारा हटा दिया गया था। अब इस मामले में ‘निजी सम्पत्ति’ का बोर्ड लगाने वाले मोहम्मद काजी सैयद इरफान अली (पुत्र- काजी सैयद मुबारिक अली) को न्यायालय नायब तहसीलदार की तरफ से आदेश जारी किया गया है।

आदेश में कहा गया है कि शासकीय भूमि पर बेवजह कब्जा करने एवं भूमि अपने दखल में रखने के कारण सैयद इरफान अली को उक्त भूमि ग्राम उदयपुर के खसरा संख्या 822, रकबा 0795 में से 20 बाई 40 वर्गफीट से बेदखल किया जाता है। इसके साथ ही उसके ऊपर धारा 248 (1) के तहत 5000 रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। यह आदेश 15 जनवरी 2021 को जारी किया गया। 

मोहम्मद काजी सैयद इरफान अली को जारी आदेश

आदेश में कहा गया है कि एक सप्ताह के भीतर यानी कि 22 जनवरी 2021 के पहले उक्त भूमि से अपना कब्जा हटा लें। उक्त भूमि पर किसी भी तरह का कोई भी सामान, असबाब या संरचना आदि नहीं होना चाहिए और जुर्माना न्यायालय में जमा करने के लिए निर्देशित किया गया है। ऐसे नहीं होने पर कब्जा बल पूर्वक हटाने एवं जुर्माना की राशि भू-राजस्व के बकाया की भाँति वसूलने की बात कही गई है।

इसके अलावा यह भी कहा गया है कि अगर निश्चित समय सीमा के भीतर जमीन पर से कब्जा नहीं हटाया जाता है तो भूमि में स्थित फसल, निर्माण या भवन अधिग्रहित कर लिया जाएगा एवं न्यायालय के विवेक अधिकार से धारा 248 (1) के तहत निपटारा किया जाएगा। अगर निर्धारित तारीख के बाद भी भूमि पर दखल जारी रहा तो 23 जनवरी 2021 से 500 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही यदि बेदखली आदेश के समय सीमा के भीतर अप्राधिकृत कब्जा नहीं हटाया गया तो उस पर धारा 248 (2ए) के तहत सिविल जेल की कार्यवाही प्रस्तावित की जाएँगी।

गौरतलब है कि प्राचीन विरासत से जुड़े इस महल में मदरसा चलते हुए पाया गया था। यही नहीं, इस पर ‘निजी संपत्ति’ का बोर्ड लगाने वाले एक काजी ने यहाँ तक दावा किया कि यह एक हजार साल पुराना ना होकर चार सौ साल पुराना है, जिसका निर्माण उसके पूर्वजों द्वारा पूरा कराया गया था। काजी के अनुसार, जहाँगीर और शाहजहाँ ने उसके परिवार के नाम यह संपत्ति कर डाली थी।

सोशल मीडिया पर इस विषय के उछलने के बाद तहसीलदार इस महल में पहुँचे और उन्होंने एक्शन लेते हुए महल से उस बोर्ड को हटा दिया, जिसमें इसे काजी की निजी सम्पत्ति बताया गया था। तहसीलदार का कहना था, “यहाँ किसी ने निजी सम्पत्ति के नाम से बोर्ड लगा दिया था। यह एरिया उदयपुर ग्राम के खसरा संख्या- 822 में करीब साढ़े तीन बीघा जमीन पुरातत्व विभाग के अंतर्गत आता है। इसी वजह से हम लोग आए और हमने ये बोर्ड हटवा है।”

इस महल का पूरा इतिहास ऑपइंडिया पर आप इस लिंक पर पढ़ सकते हैं

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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