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भारतीय संस्कृति

गुरु पूर्णिमा: क्यों मनाया जाता है यह पावन पर्व? जानिए गुरु-शिष्य परंपरा, महर्षि वेदव्यास के अमूल्य योगदान और सनातन संस्कृति में गुरु का सर्वोच्च...

गुरु पूर्णिमा पर जानिए महर्षि वेदव्यास का अद्भुत योगदान, गुरु-शिष्य परंपरा, सनातन संस्कृति में गुरु का महत्व और इस पर्व का आध्यात्मिक संदेश।

कहाँ है बलिराजगढ़, जो ASI की खुदाई में उगल रहा मिथिला की प्राचीन सभ्यता और वैभव के अवशेष; राजा बलि से लेकर विदेह तक...

बलिराजगढ़ की अहमियत को बेहतर तरीके से समझने के लिए हमें इसके पुराने इतिहास और पहले हुई खुदाइयों पर एक नजर डालनी होगी...

‘अरब-तुर्क’ का ढोंग खत्म, अब पाणिनी-चाणक्य पर आया लालच: पहचान के संकट में फँसे पाकिस्तान ने शुरू किया भारत का हिंदू इतिहास चुराने का...

पाकिस्तान अपनी पहचान के संकट से गुजर रहा है। वे भारतीय इतिहास, सिंधु घाटी सभ्यता, पाणिनी, चाणक्य और राजा पोरस पर अपना हक जता रहा है।

जब ‘रजस्वला’ होती हैं माँ कामाख्या: 3 दिन रुक जाती है पूजा, खुलते हैं सृजन, शक्ति और साधना के रहस्य; पढ़ें- अंबुबाची मेले की...

अंबुबाची मेला हर साल असम के माँ कामाख्या मंदिर में आयोजित किया जाता है। इसे पूर्वोत्तर भारत का सबसे बड़ा धार्मिक समागम माना जाता है।

आयातित नहीं अनादि है भारत की सभ्यता, विदेशी प्रोपेगेंडा फैलाना बंद करो: मोहनजोदड़ो की पशुपति मुहर पर ‘एलामाइट प्रभाव’ बताने वाली ऑड्रे ट्रुश्के की...

पशुपति मुहर को लेकर फिर शुरू हुई इतिहास की बहस। संस्कृति मंत्रालय, ऑड्रे ट्रुश्के और भारतीय विद्वानों के तर्कों के बीच समझिए पूरा विवाद।

महर्षि कपिल का श्राप, भगवान विष्णु के चरण और महादेव की जटाएँ: गंगा दशहरा पर जानिए धरती पर कैसे हुआ ‘मैया’ का अवतरण, पवित्र...

गंगा दशहरा भारतीय संस्कृति, आस्था, तपस्या, त्याग और मोक्ष की भावना का जीवंत प्रतीक है। यह पर्व प्रकृति के प्रति सम्मान करना भी सिखाता है।

जिस मंच से कभी होता था ‘नग्नता’ का प्रसार, वहाँ भारतीय परिधानों का चला जादू: जानिए CANNES फेस्टिवल में नियम सख्त होने से दिखे...

कान्स 2026 में साड़ी, फुलकारी, राजपूताना घूँघट, नौवारी और भारतीय हस्तशिल्प जैसे पहनावे सिर्फ फैशन स्टेटमेंट नहीं रहे, बल्कि उन्होंने रेड कार्पेट पर भारत की सांस्कृतिक पहचान भी बनाई।

क्या है अधिक मास के पीछे का विज्ञान और रहस्य: जानिए क्यों भारतीय पंचांग में जुड़ता है अतिरिक्त महीना और कैसे तय होता है...

भारतीय पंचांग में अधिक मास एक अतिरिक्त महीना होता है, जो कुछ वर्षों के अंतराल पर कैलेंडर का संतुलन बनाए रखने के लिए जोड़ा जाता है।

सोमनाथ सिर्फ एक मंदिर नहीं, संस्कृति का केंद्र है: जानिए उन आचार्यों और राजाओं को, जिन्होंने हर आक्रमण के बाद भी यहाँ जीवित रखी...

जानिए अलग-अलग समय में किन संतों-राजाओं-विद्वानों-योद्धाओं और भक्तों ने मंदिर पर आए हर संकट के बाद भी उसकी संस्कृति और परंपरा को जीवित रखा।

‘साम्राज्य बदला, इतिहास बदला… हृदय में बसा रहा सोमनाथ’: PM मोदी ने मंदिर के लोकार्पण की 75वीं वर्षगाँठ से पूर्व लिखा भावुक लेख, बोले-...

सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, हमारी सभ्यता का अटूट संकल्प है। इसके सामने लहराता विशाल समुद्र अनंत काल की अनूभूति कराता है।

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