मिर्ची बाबा की नई नौटंकी: दिग्गी का बैंड बजा कर, अब अग्नि-कुण्ड में समाधि को तैयार

इसी बीच संत समाज के ही कुछ लोगों का कहना है कि किसी सार्वजनिक स्थल पर 108 दिन तक जल सत्याग्रह करना चाहिए एवं ध्यानपूर्वक ना केवल क्षमायाचना करना चाहिए बल्कि यह संकल्प भी दोहराना चाहिए कि आज के बाद वो कभी भी झूठी भविष्यवाणी नहीं करेंगे। हिंदू शास्त्रों में कठोर प्रायश्चित के और भी कई उपाय उपलब्ध हैं जिनके लिए सरकार की अनुमति की जरूरत नहीं होती।

लोकसभा चुनाव में दिग्विजय सिंह की जीत के लिए ‘मिर्ची यज्ञ’ करने वाले बाबा वैराग्यानंद का नया ड्रामा फिर से शुरू हो गया है। कभी हिंदुत्व को गाली बना देने वाले दिग्विजय सिंह की भोपाल से जीत सुनिश्चित करने के लिए बाबा वैराग्यानंद ने कई क्विंटल मिर्ची के साथ भोपाल में एक बड़ा यज्ञ दावे के साथ किया था कि यदि दिग्विजय सिंह नहीं जीते तो समाधि ले लूँगा। कुछ दावे जलसमाधि के थे तो कुछ अग्निकुण्ड के। खैर, इस ड्रामे ने साध्वी प्रज्ञा के खिलाफ चुनाव प्रचार को और भी मजेदार बना दिया था।

दिग्विजय सिंह साध्वी प्रज्ञा ठाकुर से तीन लाख से ज्यादा वोटों से हार गए और इसके बाद मिर्ची बाबा धुँआ हो गए। जब लोकसभा चुनाव के नतीजे आए तो लोग उन्हें सोशल मीडिया से लेकर यहाँ-वहाँ बड़ी बेसब्री से ढूँढते नज़र आए।

बताया जा रहा था कि लोगों ने उन्हें परेशान कर दिया था। वो चुनाव परिणाम के बाद ही छिपते-छिपाते खुद को बचाए हुए थे लेकिन उन्हें यूपी में एक रोजा इफ्तार पार्टी में देख लिया। कुछ मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कुछ लोगो ने बाबा का ढूँढ़कर लाने वाले को एक लाख रुपए देने का ऐलान भी कर दिया था। बीच में बाबा का एक ऑडियो भी वायरल हुआ था जिसमें बाबा ने उनकी जलसमाधि का सवाल पूछने पर उस व्यक्ति पर भड़क गए थे। संत समाज ने भी मिर्ची बाबा के इस चुनावी ड्रामे की निंदा करते हुए, उनके खिलाफ कार्रवाई भी की थी। 

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मिर्ची बाबा को कोई उपाय नहीं सूझा तो लोकसभा चुनाव में भोपाल संसदीय क्षेत्र से कॉन्ग्रेस उम्मीदवार दिग्विजय सिंह की जीत की भविष्यवाणी गलत साबित होने पर वैराग्यानंद गिरी ने, जो अब मिर्ची बाबा के नाम से प्रसिद्ध हो चुके हैं, 16 जून को हवन-कुण्ड में ब्रह्मलीन समाधि लेने की घोषणा की है। इसके लिए उन्होंने बाकायदा जिलाधिकारी को एक आवेदन देकर स्थान निर्धारित करने सहित समाधि लेने की अनुमति भी माँगी है।

हालाँकि, पत्र हमारे हाथ नहीं लगा है लेकिन कुछ मीडिया रिपोर्टों के अनुसार बात जलसमाधि की भी कही जा रही है। खैर समाधि चाहे जिस तरह से हो उनके समर्थक इस अगले ड्रामे का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं। मिर्ची बाबा ने अपने आवेदन में लिखा है, “दिग्विजय सिंह के लिए उन्होंने कोहेफिजा इलाके में ‘मिर्ची यज्ञ’ किया था और कहा था कि यदि दिग्विजय सिंह नहीं जीते तो वो जल समाधि लेंगे। पत्र में ये भी लिखा है कि वो अपनी बात पर अटल हैं और जो प्रण लिया है उसे जरूर पूरा करेंगे।” 

एक दूसरे मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, निरंजनी अखाड़े के पूर्व महामंडलेश्वर मिर्ची बाबा ने अपने अधिवक्ता माजिद अली के माध्यम से जिलाधिकारी को जून 13, 2019 को दिए आवेदन में कहा है, “कॉन्ग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह के पक्ष में प्रचार करते हुए उनकी विजय की कामना के लिए एक यज्ञ-हवन किया था। इस दौरान संकल्प लिया था कि अगर इस चुनाव में दिग्विजय सिंह को पराजय मिलती है तो हवन-कुण्ड में ब्रह्मलीन समाधि लूँगा।”

मिर्ची बाबा के ड्रामे वाले पत्र का मज़मून कुछ यूँ है, ‘‘दिग्विजय सिंह भोपाल संसदीय क्षेत्र से पराजित हो चुके हैं और मैं अपने संकल्प पर दृढ़ संकल्पित रहते हुए अपने संकल्प को पूर्ण करना चाहता हूँ। इस समय मैं कामाख्या धाम (गुवाहाटी) में तपस्यारत हूँ।’’ बाबा वैराग्यनंद ने आगे लिखा, ‘‘सकल संत पंचों से परामर्श के जरिए यह समाधि लेने हेतु विधि विधान के अनुरूप 16 जून 2019 को दो बजकर 11 मिनट पर अनुराधा नक्षत्र चतुर्दशी को मैंने ब्रह्मलीन समाधि लेने का निश्चय किया है, ताकि मैं अपना संकल्प पूर्ण कर सकूँ। मुझे पूर्ण विश्वास है कि प्रशासन द्वारा मुझे पूर्ण सहयोग कर मेरी धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए मुझे ब्रह्मलीन समाधि लेने हेतु स्थान निर्धारण करते हुए स्वीकृति प्रदान की जाएगी।’’

बता दें कि इस आवेदन पर वैराग्यनंद गिरी महाराज की ओर अधिवक्ता माजिद अली ने हस्ताक्षर किए हैं। अली ने बताया कि उसे वैराग्यनंद ने इस आवेदन पर हस्ताक्षर करने के लिए अधिकृत किया है। अली भोपाल जिला न्यायालय में निजी वकालत करते हैं।

मिर्ची बाबा के इस पत्र की पुष्टि करते हुए जिलाधिकारी तरुण तिकोड़े ने शुक्रवार को डीआईजी को पत्र लिखकर बताया, ‘‘समाधि लेने के लिए वैराग्यनंद गिरी महाराज का 13 जून को आवेदन आया था। इस तरह की अनुमति नहीं दी जा सकती है। इसके बारे में मैंने पुलिस को पत्र लिखा है और उनको कहा है कि वैराग्यानंद की जान-माल की सुरक्षा करें।’’


दिग्विजय सिंह की हार पर समाधि लेने का ऐलान करने वाले वैराग्यनंद गिरी की तस्वीरों को जल समाधि देते हुए

हालाँकि, बाबा के इस ड्रामे को एक बार फिर से उनका नया नाटक समझ कर कुछ लोगों ने उनके तस्वीर को ही जल समाधि देकर तसल्ली कर ली थी, लेकिन कुछ अभी भी बाबा वैराग्यानंद को फर्जी यज्ञ और झूठी भविष्यवाणी करने के लिए प्रायश्चित करने पर अड़े हैं। इसी बीच संत समाज के ही कुछ लोगों का कहना है कि किसी सार्वजनिक स्थल पर 108 दिन तक जल सत्याग्रह करना चाहिए एवं ध्यानपूर्वक ना केवल क्षमायाचना करना चाहिए बल्कि यह संकल्प भी दोहराना चाहिए कि आज के बाद वो कभी भी झूठी भविष्यवाणी नहीं करेंगे। हिंदू शास्त्रों में कठोर प्रायश्चित के और भी कई उपाय उपलब्ध हैं जिनके लिए सरकार की अनुमति की जरूरत नहीं होती।

कुल मिला कर, मिर्ची बाबा को अच्छे से पता है कि सरकार उन्हें अनुमति नहीं देगी। उनका अनुमति माँगना उनका नया ड्रामा ही है। लेकिन यहाँ ध्यान रखने वाली बात यह है कि ऐसे छद्म तथाकथित बाबाओं की इन हरकतों से पूरा संत समाज बदनाम होता है। यज्ञ की विधियों का दुरुपयोग कर इस तरह की ग़ैरवाजिब भविष्यवाणी कर मिर्ची बाबा न सिर्फ अपना बल्कि अध्यात्म और कर्मकाण्ड की एक पूरी संस्कृति का मजाक बनाया है इसके लिए उन्हें सार्वजानिक रूप से माँफी माँगते हुए दोबारा ऐसा कुछ न करने का संकल्प लेना चाहिए।

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