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‘मुगलों ने हिंदू-सिखों की गर्दन कलम की’ – गुरुग्राम के गुरुद्वारा सिंह सभा के प्रवक्ता ने कहा – वहम है यह, तोड़ा-मरोड़ा गया इतिहास

सार्वजनिक स्थलों पर नमाज़ को सरदार दया सिंह ने आपत्तिजनक मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने तर्क दिया कि पार्कों में सूर्य नमस्कार होता है, लोग चार ईंटे लगा देते हैं तो मंदिर बन जाता है।

हरियाणा के गुरुग्राम में सड़कों और सार्वजानिक स्थलों पर नमाज़ बंद करवा दी गई है। इसके लिए हिन्दू संगठनों और पुलिस के बीच लम्बे समय तक तनातनी बनी रही थी। अब नमाज़ बंद होने के बाद बयानबाजी का दौर जारी है। नया बयान गुरुग्राम के सदर बाजार गुरुद्वारा सिंह सभा के प्रवक्ता सरदार दया सिंह का आया है।

सरदार दया सिंह के अनुसार मुगलों ने सिखों पर जो अत्याचार किया, वो असल इतिहास नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि बाबर और गुरुनानक एक ही समय के हैं। उनकी माने तो गुरुग्रंथ में आज भी बाबरवाणी अंकित है। उनके अनुसार मुगल बाहर से आए और यहीं रह गए। मुगलों के साथ गुरुओं (सिखों के) के खट्टे और मीठे संबंध रहे।

गुरुग्राम न्यूज़ को सदर बाजार गुरुद्वारा सिंह सभा के प्रवक्ता सरदार दया सिंह ने बताया कि हरमिंदर साहब की जगह को अकबर ने सिखों के चौथे गुरु की बेटी के नाम कर दिया था। अकबर ने 85 गाँव भी दे दिए थे। उनके अनुसार हरमिंदर साहब की नींव साईं मियाँ पीर ने रखी थी। इसका आकार मस्जिद के ही जैसा है।

सार्वजनिक स्थलों पर नमाज़ को सरदार दया सिंह ने आपत्तिजनक मानने से इनकार कर दिया। उनके अनुसार किसी की आस्था से किसी और कोई एतराज नहीं होना चाहिए। दया सिंह ने बताया:

“ये (मुस्लिम) आज कल टारगेट पर हैं। वो असहज महसूस कर रहे हैं। मुस्लिम और हम दोनों एक ईश्वरवादी हैं। वो अल्लाह में विश्वास करते हैं, हम भी खुदा में विश्वास करते हैं। हमारे लिए अल्लाह, खुदा, राम सब एक हैं। हो सकता है कि हमारे मन में जगराता को अनुमति न देने का विचार आए क्योंकि वो मूर्ति पूजक हैं और हम मूर्ति की पूजा नहीं करते।”

गुरुद्वारे में गुरुपर्व पर नमाज़ न होने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि नमाज़ न पढ़ने का फैसला खुद मुस्लिमों का था। बगल के एक स्कूल में भी नमाज़ का विकल्प दिया गया था। लेकिन मुस्लिम समुदाय के लोगों ने खुद कहा कि वो किसी विवाद को नहीं खड़ा करना चाहते। अगले सप्ताह गुरुद्वारे में नमाज़ होगी या नहीं, इसके जवाब में उन्होंने कहा कि फैसला कमेटी करेगी। अगर उनकी (मुस्लिमों) की तरफ से प्रस्ताव आता है तो इस पर विचार जरूर किया जाएगा।

तर्कों में छलांग लगाते हुए सरदार दया सिंह ने हिन्दुओं की काँवड़ यात्रा का भी जिक्र किया। उसमें प्रयोग होने वाले लाऊडस्पीकर की भी बात की। उन्होंने कहा कि पार्कों में सूर्य नमस्कार भी होता है। इसी के साथ सिखों द्वारा आयोजित होने वाले नगर कीर्तन की भी चर्चा की। उनके अनुसार इन सब पर कभी विवाद नहीं होना चाहिए। ऐसे मुद्दों को आपस में बैठ कर सुलझा लेना चाहिए। नमाज़ के समय विवाद खड़ा करना और शोर-शराबा करना गलत है, ऐसा उन्होंने कहा। तर्क देते-देते वो ये तक कह गए कि चार ईंटे लगाने से मंदिर बन जाता है, जिसे कोई हटा नहीं पाता।

देखिए पूरा इंटरव्यू

सरदार दया सिंह ऑल इंडिया पीस मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। अपने बयान में उन्होंने सरदार शेरदिल सिंह के बयानों से विरोधाभासी बातें कहीं हैं। ऑप इंडिया से 19 नवम्बर 2021 को बातचीत के दौरान शेरदिल सिंह ने कहा था कि गुरुद्वारे में नमाज़ का बयान उनका निजी बयान था, जिस पर कमेटी ने कोई फैसला नहीं लिया था। लेकिन सरदार दया सिंह का कहना है कि गुरुद्वारे में नमाज़ का फैसला उनकी कमेटी का था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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