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मुंबई के नए CP हेमंत नागराले की भी विवादों से यारी: टॉर्चर करने, अप्राकृतिक सेक्स और आय से अधिक संपत्ति जैसे लग चुके हैं आरोप

1998 में डेपुटेशन पर सीबीआई में जाने से पहले नागराले ने पुलिस में विभिन्न भूमिकाओं का निवर्हन किया। वे सीबीआई में मार्च 1998 से सितंबर 2002 तक रहे।

महाराष्ट्र में जब से महाविकास अघाड़ी की सरकार बनी है, मुंबई पुलिस लगातार विवादों में है। एंटीलिया केस में सचिन वाजे की गिरफ्तारी के बाद जिस तरह चौंकाने वाले तथ्य सामने आए उससे राज्य सरकार और मुंबई पुलिस दोनों की जमकर किरकिरी हुई। डैमेज कंट्रोल के मकसद से परमबीर सिंह को हटा दिया गया। उनकी जगह हेमंत नागराले को मुंबई का नया पुलिस कमिश्नर बनाया गया।

पदभार सँभालने के बाद मीडिया से बात करते हुए नागराले ने कहा था कि मुंबई पुलिस कठिन दौर से गुजर रही है। लेकिन, रिकॉर्ड बताते हैं कि परमबीर सिंह की तरह ही नागराले भी विवादित रहे हैं

नागराले 1987 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारी हैं। मुंबई का पुलिस कमिश्नर बनाए जाने से पहले वे महानिदेशक (तकनीकी और कानूनी) थे। वे मूल रूप से महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के भद्रावती गाँव के रहने वाले हैं। विश्वेश्वरैया नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, नागपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट हैं। पहले इसे विश्वेश्वरैया रिजनल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, नागपुर के नाम से जाना जाता था। उन्होंने मुंबई के जमनलाल बजाज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज से मॉस्टर आफ फाइनेंस की पढ़ाई की है।

अकादमिक शिक्षा पूरी होने के बाद नागराले सिविल सेवाओं की परीक्षा में शामिल हुए और आईपीएस बने। 1998 में डेपुटेशन पर सीबीआई (CBI) में जाने से पहले पुलिस में विभिन्न भूमिकाओं का निवर्हन किया। वे सीबीआई में मार्च 1998 से सितंबर 2002 तक रहे।

सीबीआई में रहते हुए उन्होंने कई केस की तफ्तीश की। इनमें 130 करोड़ रुपए का बैंक ऑफ इंडिया केस, जिसमें केतन पारिख संलिप्त था और 1800 करोड़ रुपए का माधवपुरा को-ऑपरेटिव बैंक स्कैम, जिसे हर्षद मेहता स्कैम के नाम से भी जाना जाता है, प्रमुख हैं। अपने लंबे करियर के दौरान नागराले को प्रेसिडेंट पुलिस मेडल, विशेष सेवा पदक सहित कई पुरस्कार मिले हैं। वे जूडो में ब्लैक बेल्ट हैं और ऑल इंडिया पुलिस गेम्स में कई मेडल भी जीत चुके हैं।

26/11 हमलों के वक्त नागराले MSEDCL में डेपुटेशन पर थे। बचाव अभियान के जरिए बंधकों को सुरक्षित जगह पहुँचाना और घायलों को अस्पताल ले जाना उनकी जिम्मेदारी थी। रिपोर्टों के मुताबिक हमले के वक्त नागराले ताज होटल में दाखिल हुए थे और घायलों को बाहर लाए थे। इस ऑपरेशन के दौरान उन्होंने आरडीएक्स से भरा एक बैग भी बरामद किया था। उनके पूर्ववर्ती परमबीर सिंह सहित कुछ और अधिकारियों पर इसी दौरान लापरवाही बरतने के आरोप रहे हैं।

अब बात नागराले से जुड़े विवादों की। ऐसा ही एक मामला कथित तौर पर आय से अधिक संपत्ति से जुड़ा है। इस संबंध में नागराले की पूर्व पत्नी प्रतिमा ने शिकायत की थी। 1990 में शादी करने के बाद दोनों का फरवरी 2009 में तलाक हो गया था। इसके बाद प्रतिमा ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर नागराले पर आय से अधिक संपत्ति रखने का आरोप लगाया।

प्रतिमा का आरोप था कि नागराले ने उनके नाम से तीन बैंक खाते खोल रखे हैं, जिससे बेनामी लेन-देन की गई। यह भी आरोप लगाया कि नागराले ने कई करोड़ की 12 संपत्ति राज्य के चार जिलों में उनके या अपने नाम से खरीदी है। बचाव में नागराले ने कहा था कि बदले की नीयत से शिकायत की गई है। उन्होंने कहा था कि संपत्ति और बैंक खाते की जानकारी प्रतिमा के इनकम टैक्स रिटर्न्स में है, लिहाजा इसे राज्य सरकार के सामने घोषित किए जाने की आवश्यकता नहीं है। लेकिन बॉम्बे हाई कोर्ट ने उनकी दलीलें खारिज करते हुए राज्य के एंटी करप्शन ब्यूरो से इस मामले की जाँच को कहा था

इसके अलावा पत्नी ने नागराले पर शारीरिक और मानसिक यातना देने के भी आरोप लगाए गए थे। तलाक से पहले 2008 में प्रतिमा ने उनके खिलाफ शारीरिक और मानसिक तौर पर प्रताड़ित करने और अप्राकृतिक यौन संबंध के लिए मजबूर करने की शिकायत दर्ज कराई थी। प्रतिमा के आरोपों के जवाब में नागराले ने कोर्ट को बताया था कि वह एक मानसिक अवसाद से पीड़ित है और इसकी वजह से उन पर झूठे आरोप लगा रही है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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