16 घंटे लगातार नींद में… या 4 बजे सुबह भाभी को कॉल: ND Tiwari के बेटे की मौत के पीछे कई राज़

रोहित शेखर को एनडी तिवारी को अपना पिता साबित करने के लिए लम्बी क़ानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी थी। उन्होंने रोहित की माँ से 88 वर्ष की उम्र में शादी भी की थी।

तीन बार उत्तर प्रदेश व एक बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रह चुके नारायण दत्त तिवारी का निधन हुए अभी 6 महीने ही हुए हैं, तभी उनके बेटे रोहित शेखर की भी संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। ख़बरों के अनुसार, रोहित की नाक से ख़ून आ रहा था, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। वहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। दिल्ली की डिफेंस कॉलोनी पुलिस फिलहाल तो किसी नतीजे पर नहीं पहुँची है लेकिन हर एंगल से इस घटना की छानबीन की जा रही है। आज गुरुवार (अप्रैल 18, 2019) को पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट भी आनी है, जिसके बाद काफ़ी कुछ पता चल जाएगा। फिलहाल रोहित के पार्थिव शरीर को उनके परिवार को सौंप दिया गया है। डॉक्टरों की टीम भी इस बात से हैरान है कि रोहित की नाक से ख़ून क्यों आ रहा था?

सबसे पहले जानते हैं कि रोहित मौत से पहले कहाँ थे और उन्होंने क्या-क्या किया था। दरअसल, रोहित और उनका पूरा परिवार वोट डालने उत्तराखंड के कोटद्वार गए थे। वहाँ से वो लोग रात के 11 बजे डिफेंस कॉलोनी स्थित अपने घर लौटे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार रोहित ने शराब भी पी रखी थी। घर पहुँच कर वो सो गए। अगले दिन शाम 4 बजे तक वो सोए ही रहे। उसी समय किसी नौकर ने देखा कि उनकी नाक से ख़ून निकल रहा था। इसकी जानकारी उनकी माँ और मैक्स अस्पताल को दी गई। पुलिस का सीधा सवाल है कि एक व्यक्ति 16 घंटे तक सोया रहता है और घर में कोई उसकी सुध भी नहीं लेता, क्यों?

नवभारत टाइम्स में छपी रिपोर्ट के अनुसार, रोहित की पत्नी व परिवार के अन्य लोग घर में ही थे। पुलिस को पता चला है कि रोहित नींद की गोलियाँ भी लेते थे। पुलिस इसे पॉइज़निंग (ज़हर) वाले एंगल से भी देख रही है। उनके कमरे के अंदर ढेर सारी दवाओं के रैपर मिले हैं। हाल ही में उनकी बाईपास सर्जरी हुई है। उनके कमरे में इतनी सारी दवाइयाँ थी, जैसे कि वो कोई छोटा सा मेडिकल स्टोर हो। परिवार की तरफ से हत्या जैसी कोई बात नहीं कही गई है। पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई गई है। रिपोर्ट की मानें तो रोहित के नौकर ने यह भी बताया कि उसने सुबह 9 बजे भी उनके कमरे में जाने की कोशिश की थी।

- विज्ञापन - - लेख आगे पढ़ें -

वहीं अगर रोहित की माँ के बयान को देखें तो वो अवसादग्रस्त थे। राजनीतिक करियर परवान न चढ़ पाने के कारण रोहित शेखर तिवारी डिप्रेशन में थे। वो अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे ले जाना चाहते थे। जबकि आजतक की वेबसाइट पर प्रकाशित एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, रोहित ने सुबह 4 बजे अपनी भाभी कुमकुम को फोन किया था। वह उन्हें कुछ बताना चाहते थे। अगर रोहित उस दिन शाम तक सोए रहे थे (जैसा कि नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है) तो उन्होंने सुबह कॉल कैसे किया? अगर उन्होंने कॉल किया तो क्या घर वालों की तरफ से वापस कॉलबैक आया था?

आजतक की रिपोर्ट में कहा गया है कि आमतौर पर रोहित जिस कमरे में सोते थे, उस दिन वो वहाँ न सोकर दूसरे कमरे में सोए हुए थे। इस बारे में घर वालों का कहना है कि उनकी पत्नी को दिक्कत न हो, इसीलिए वो दूसरे कमरे में सोए थे। रोहित के परिवार का मानना है कि ये प्राकृतिक मौत है। अमर उजाला ने पुलिस अधिकारियों के हवाले से लिखा है कि रोहित के घर के आसपास कई सीसीटीवी कैमरे लगे हुए थे लेकिन उनमें से एक भी चालू नहीं था। क्या किसी ने सीसीटीवी बंद कर दिया था या वो लम्बे समय से बंद था?

बता दें कि रोहित शेखर को एनडी तिवारी को अपना पिता साबित करने के लिए लम्बी क़ानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी थी। सालों तक ना-नुकुर के बाद तिवारी ने उन्हें अपना बेटा स्वीकार कर अपने घर में जगह दी थी। उन्होंने रोहित की माँ से 88 वर्ष की उम्र में शादी भी की थी। आंध्र प्रदेश के राज्यपाल रहे एनडी तिवारी पिछले वर्ष 18 अक्टूबर 2018 को अपने जन्मदिवस के दिन ही चल बसे थे।

शेयर करें, मदद करें:
Support OpIndia by paying for content

यू-ट्यूब से

देखना न भूलें! एग्जिट पोल के सभी नतीजे

2019 लोक सभा चुनाव की सभी Exit Polls का लेखा जोखा पढ़िए हिंदी में

ज़्यादा पढ़ी गईं ख़बरें

ट्रोल प्रोपेगंडाबाज़ ध्रुव राठी

ध्रुव राठी के धैर्य का बाँध टूटा, बोले राहुल गाँधी ने 1 ही झूठ किया रिपीट, हमारा प्रोपेगैंडा पड़ा हल्का

जिस प्रकार से राहुल गाँधी लगातार मोदी सरकार को घोटालों में घिरा हुआ साबित करने के लिए झूठे डाक्यूमेंट्स और बयानों का सहारा लेते रहे, शायद ध्रुव राठी उन्हीं से अपनी निराशा व्यक्त कर रहे थे। ऐसे समय में उन्हें अपने झुंड के साथ रहना चाहिए।
इनका दुःख... सच में दुःखद...

एग्जिट पोल देख लिबरल गिरोह छोड़ रहा विष-फुंकार, गर्मी में निकल रहा झाग

जैसे-जैसे Exit Polls के नतीजे जारी हो रहे हैं, पत्रकारिता के समुदाय विशेष और फ़ेक-लिबरलों-अर्बन-नक्सलियों के सर पर ‘गर्मी चढ़नी’ शुरू हो गई है।
साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, कन्हैया, राहुल गाँधी, स्मृति ईरानी

भोपाल से प्रज्ञा की जीत, बेगूसराय से कन्हैया की हार और अमेठी में स्थिति संदिग्ध: एग्जिट पोल्स

'हिन्दू टेरर' के कलंक से कलंकित और कॉन्ग्रेस की तुष्टीकरण एवम् साम्प्रदायिक नीतियों का शिकार बनी साध्वी प्रज्ञा के भोपाल से प्रत्याशी बनने, कन्हैया का बेगूसराय से लड़ने और राहुल-स्मृति ईरानी की कड़ी टक्कर इस चुनाव की हेडलाइन बने।
रवीश कुमार

साला ये दुःख काहे खतम नहीं होता है बे!

जो लोग रवीश की पिछले पाँच साल की पत्रकारिता टीवी और सोशल मीडिया पर देख रहे हैं, वो भी यह बात आसानी से मान लेंगे कि रवीश जी को पत्रकारिता के कॉलेजों को सिलेबस में केस स्टडी के तौर पर पढ़ाया जाना चाहिए।
तपस्या करते हुए कुलपति

Exit Poll के रुझान देखकर मीडिया गिरोह ने जताई 5 साल के लिए गुफा में तपस्या करने की प्रबल इच्छा

अगले 5 साल गुफा में बिताने की चॉइस रखने वालों की अर्जी में एक नाम बेहद चौंकाने वाला था। यह नाम एक मशहूर व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी के कुलपति का था। अपने विवरण में इस कुलपति ने स्पष्ट किया है कि पिछले 5 साल वो दर्शकों से TV ना देखने की अपील करते करते थक चुके हैं और अब अगले 5 साल भी वही काम दोबारा नहीं कर पाएँगे।
स्वरा भास्कर

प्रचार के लिए ब्लाउज़ सिलवाई, 20 साड़ियाँ खरीदी, ताकि बड़े मुद्दों पर बात कर सकूँ: स्वरा भास्कर

स्वरा भास्कर ने स्वीकार करते हुए बताया कि उन्हें प्रचार के लिए बुलाया गया क्योंकि वो हीरोइन हैं और इस वजह से ही उन्हें एक इमेज बनाना आवश्यक था। इसी छवि को बनाने के लिए उन्होंने 20 साड़ियाँ खरीदीं और और कुछ जूलरी खरीदी ताकि ‘बड़े मुद्दों पर’ बात की जा सके।

वहाँ मोदी नहीं, सनातन आस्था अपनी रीढ़ सीधी कर रही है, इसीलिए कुछ को दिक्कत हो रही है

इंटेलेक्चु‌ल लेजिटिमेसी और फेसबुक पर प्रासंगिक बने रहने, ज्ञानी कहलाने और एक खास गिरोह के लोगो में स्वीकार्यता पाने के लिए आप भले ही मोदी की हर बात पर लेख लिखिए, लेकिन ध्यान रहे कुतर्कों, ठिठोलियों और मीम्स की उम्र छोटी होती है।
नरेंद्र मोदी आध्यात्मिक दौरा

लंगोट पहन पेड़ से उलटा लटक पत्तियाँ क्यों नहीं चबा रहे PM मोदी? मीडिया गिरोह के ‘मन की बात’

पद की भी कुछ मर्यादाएँ होती हैं और कुछ चीजें व्यक्तिगत सोच पर निर्भर करती है, यही तो हिन्दू धर्म की विशेषता है। वरना, कल होकर यह भी पूछा जा सकता है कि जब तक मोदी ख़ुद को बेल्ट से पीटते हुए नहीं घूमेंगे, उनका आध्यात्मिक दौरा अधूरा रहेगा।
योगी आदित्यनाथ और ओमप्रकाश राजभर

‘गालीबाज’ ओमप्रकाश राजभर सहित 8 नेता तत्काल प्रभाव से बर्खास्त: एक्शन में CM योगी

ये वही राजभर हैं, जिन्होंने रैली में मंच से दी थी BJP नेताओं-कार्यकर्ताओं को माँ की गाली। ये वही हैं जो पहले अफसरों की सिफारिश न सुनने पर हंगामा करते हैं और बाद में अपने बेटों को पद दिलाने पर अड़ जाते हैं।
राहुल गाँधी

सरकार तो मोदी की ही बनेगी… कॉन्ग्रेस ने ऑफिशली मान ली अपनी हार

कॉन्ग्रेस ने 23 तारीख को चुनाव नतीजे आने तक का भी इंतजार करना जरूरी नहीं समझा। समझे भी कैसे! देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कॉन्ग्रेस भी उमर अबदुल्ला के ट्वीट से सहमत होकर...

ताज़ा ख़बरें

हमसे जुड़ें

40,759फैंसलाइक करें
7,817फॉलोवर्सफॉलो करें
63,313सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

ज़रूर पढ़ें

शेयर करें, मदद करें: