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‘माँ हूँ, महान नहीं बनना चाहती, 7 साल पहले बेटी की जान गई, अब मैं इंसाफ़ चाहती हूँ’

"मैं कंगना रनौत के बयान से सहमत हूँ और मैं उनका धन्यवाद करती हूँ। मैं किसी की तरह महान नहीं बनना चाहती। मैं एक माँ हूँ और सात साल पहले मेरी बेटी की जान गई है और मैं इंसाफ़ चाहती हूँ।"

निर्भया के दोषियों पर बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने चौराहे पर फाँसी देने की माँग की है। उनके इस बयान के बाद निर्भया की माँ आशा देवी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दर्ज की है। कंगना के बयान पर सहमति जताते हुए उन्होंने कहा कि वह अपनी बेटी के इंसाफ़ के लिए लड़ रहे हैं। उन्होंने कंगना से मिले समर्थन पर आभार भी व्यक्त किया। कंगना रनौत ने फाँसी की सज़ा का समर्थन करते हुए सुप्रीम कोर्ट की वकील इंदिरा जयसिंह की भी कड़े शब्दों में आलोचना की थी।

कंगना रनौत ने निर्भया के दोषी के नाबालिग होने वाली बात पर कहा था,

“इस घटना में एक दोषी नाबालिग था, जो रेप करता है। जो रेप करने के काबिल है उसे किस हिसाब से नाबालिग बताया जा सकता है। ऐसे लोगों को चौराहे पर फाँसी दे देनी चाहिए। ऐसे दोषियों को पता होना चाहिए कि रेप क्या होता है और इसकी सज़ा क्या होती है।”

निर्भया की माँ ने कंगना का आभार जताते हुए कहा, “मैं कंगना रनौत के बयान से सहमत हूँ और मैं उनका धन्यवाद करती हूँ। मैं किसी की तरह महान नहीं बनना चाहती। मैं एक माँ हूँ और सात साल पहले मेरी बेटी की जान गई है और मैं इंसाफ़ चाहती हूँ।” 

इसके अलावा, उन्होंने कहा, “वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने जिस तरह से मुझसे सवाल किया। ये मानव अधिकारों के नाम पर समाज को धोखा देना है। बच्चियों के साथ हो रहे अपराधों का मज़ाक बनाना है। ये मानव अधिकारों के नाम पर बिज़नेस चलाते हैं और सिर्फ़ और सिर्फ़ मुजरिमों को सपोर्ट करते हैं।”

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने निर्भया की माँ से दोषियों को माफ़ करने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा था,

“मैं आशा देवी के दर्द को अच्छी तरह से समझती हूँ, मैं उनसे आग्रह करती हूँ कि वह सोनिया गाँधी के उदाहरण का अनुसरण करें। उन्होंने नलिनी को माफ़ कर दिया था और कहा था कि वह उसके लिए मौत की सज़ा नहीं चाहती हैं। हम आपके साथ हैं लेकिन मौत की सज़ा के ख़िलाफ़ हैं।”

इसके जवाब में निर्भया की माँ ने अपनी प्रतिक्रिया दर्ज कराते हुए कहा था, “मुझे ऐसा सुझाव देने वाली इंदिरा जयसिंग कौन हैं? पूरा देश चाहता है कि दोषियों को फाँसी दी जाए। सिर्फ़ उनके जैसे लोगों की वजह से बलात्कार की पीड़िताओं के साथ न्याय नहीं हो पाता है।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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