वह 2022 से ‘मजदूर बिगुल’ नाम के मजदूर संगठन के सोशल मीडिया पेज से जुड़ा हुआ था। इस संगठन के संपादक अनुभव सिन्हा हैं। वह नोएडा की फैक्ट्रियों की रिपोर्टिंग करने लगा। रूपेश राय और आदित्य आनंद की मुलाकात भगत सिंह जन अधिकार यात्रा के दौरान हुई थी। इसके बाद दोनों मजदूर नेताओं से मिलने लगे।
3 दिन की बैठक और रची गई साजिश
रुपेश राय और आदित्य आनंद साथ-साथ फैक्ट्रियों तक जाने लगे। नोएडा के सभी फैक्ट्रियों की पूरी जानकारी और उसके मजदूरों का पूरा डेटा जमा किया गया। इन दोनों ने नोएडा में एक्टिव मजदूर संगठनों ‘मजदूर बिगुल’, नौजवान भारत सभा, एकता संघर्ष समिति, दिशा संगठन, आरडब्लूपीआई के नेताओं के साथ आदित्य आनंद के नोएडा के सेक्टर 37 अरुण विहार के स्थित फ्लैट में बैठक की। ये बैठक तीन दिन 30 मार्च, 31 मार्च और 1 अप्रैल तक चली। बैठक में पूरी योजना बनाई गई।
साजिशकर्ता और सॉफ्टवेयर इंजीनियर आदित्य आनंद ने लोगों को जुटाने के लिए व्हाट्सएप का इस्तेमाल किया। व्हाट्स एप ग्रुप के क्यूआर कोड के जरिए ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ा गया। ये ग्रुप 9-10 अप्रैल को बनाए गए। पहले तो मजदूरों को उनकी माँगों के लिए प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया।
उसके बाद प्रदर्शन को हिंसक बनाने की साजिश रची। अपर पुलिस अधीक्षक राजकुमार मिश्रा ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि घटना के बाद फरार आदित्य आनंद को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया गया। उसने अपनी तकनीकी जानकारी का इस्तेमाल भीड़ को इकट्ठा करने और भड़काऊ भाषण देने में किया।
विदेश भागने के फिराक में था आदित्य आनंद
28 साल का आदित्य आनंद उर्फ रस्टी बिहार के वैशाली का रहने वाला है। उसने 12वीं तक की शिक्षा वहीं ली थी। वह एनआईटी जमशेदपुर से 2020 में बीटेक किया। इसके बाद सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर नोएडा में नौकरी करने लगा। 2022 में वह गुरुग्राम शिफ्ट हुआ लेकिन फिर 2025 से नोएडा के अरुण विहार में किराए के घर में रह रहा था।
नोएडा में हिंसा को लेकर साजिशकर्ता के रूप में सामने आने के बाद सरकार ने उसको पकड़ने के लिए 1 लाख का इनाम रखा। नोएडा में हिंसा के बाद वह चेन्नई भाग गया था। उसकी तलाश में कई राज्यों की पुलिस लगी हुई थी। चेन्नई से होते हुए जब वह तिरुचिरापल्ली जा रहा था, तो एसटीएफ को इसकी जानकारी मिल गई। इसके बाद नोएडा पुलिस ने ही उसे रेलवे स्टेशन पर गिरफ्तार कर लिया। उसने पहचान छिपाने के लिए अपना हुलिया बदल लिया था।
लंबे बाल काट लिए थे। सिर पर टोपी लगा ली थी। टीशर्ट के ऊपर शर्ट पहना हुआ था। बताया जा रहा है कि वह विदेश भागने की फिराक में था, लेकिन उससे पहले ही पुलिस के हत्थे चढ़ गया। आदित्य को ट्रांजिट रिमांड पर नोएडा लाया जा रहा है। साजिशकर्ता रुपेश राय को 11 अप्रैल को गिरफ्तार किया जा चुका है और पुलिस उसे जेल भेज चुकी है। उसकी एक और सहयोगी मनीषा भी गिरफ्तार हो चुकी है। नोएडा हिंसा मामले में 13 मामले दर्ज किए गए थे। इसको लेकर 1140 लोगों को अब तक गिरफ्तार किया जा चुका है।
रुपेश राय और मनीषा की गिरफ्तारी के बाद 12 अप्रैल को आदित्य आनंद नोएडा से दिल्ली भाग गया और ट्रेन से चेन्नई पहुँच गया। वहाँ वह छिपा हुआ था। उसकी लगातार ट्रैकिंग की जा रही थी। 18 अप्रैल को तिरुचापल्ली में टावर लोकेशन ट्रेस होने के बाद एसटीएफ और नोएडा पुलिस रेलवे स्टेशन, बस अड्डे और दूसरे सार्वजनिक स्थानों पर लग गई। वह रेलवे स्टेशन पर गिरफ्तार कर लिया गया।
पाकिस्तान कनेक्शन और अंतरराष्ट्रीय साजिश
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि नोएडा की इस हिंसा के पीछे अंतरराष्ट्रीय साजिश के संकेत मिले हैं। जाँच में पता चला है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर दो सक्रिय हैंडल पाकिस्तान से चलाए जा रहे थे।
वीपीएन (VPN) का इस्तेमाल कर लोकेशन छिपाई गई थी और पिछले 3 महीनों से आईपी एड्रेस पाकिस्तान से जुड़े हुए थे। इन पर एफआईआर दर्ज किया गया। इसके अलावा कई एक्स हैंडल पर सरकार की नजर रही। इन हैंडल्स के माध्यम से नोएडा में कानून-व्यवस्था बिगाड़ा जा रहा था और मजदूरों को हिंसा के लिए उकसाया जा रहा था।
इतना ही नहीं मध्यप्रदेश के शहडोल जिले की हिंसक घटना के वीडियो को नोएडा हिंसा का बताकर सोशल मीडिया अकाउंट्स से प्रसारित किया गया, जिसका यूपी पुलिस ने खंडन किया और लोगों को सचेत रहने की सलाह दी।
9 अप्रैल से मजदूरों ने प्रदर्शन शुरू किया
सैलरी बढ़ाने समेत कई माँगों को लेकर मजदूरों ने 9 अप्रैल 2026 से प्रदर्शन शुरू किया। 13 अप्रैल को ये लोग सड़कों पर उतर गए। पुलिस के साथ उनकी 2-3 जगहों पर झड़प हुई। प्रदर्शनकारियों ने गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया और जमकर तोड़फोड़ की। स्थिति को काबू में करने के लिए पुलिस को आँसू गैस के गोले दागने पड़े। बवाल की वजह से एनएच-9, दिल्ली- मेरठ एक्सप्रेस वे और चिल्ला बॉर्डर पर 5 किलोमीटर तक लंबा जाम लग गया।
वेतन बढ़ोतरी समेत तमाम माँगे मान लिए जाने के बाद भी मजदूरों को भड़काया गया। योगी सरकार ने आंदोलन शुरू होने के दो-तीन दिन बाद ही मजदूरों की ज्यादातर माँगे मान ली थी। जिला प्रशासन ने मजदूरों का आश्वासन भी दिया था। इसके बावजूद आंदोलन जारी रहा।
योगी सरकार ने वेतन वृद्धि के साथ-साथ कई माँगें मान ली थी। उसमें ओवरटाइम करने पर दोगुना भुगतान, समय पर सैलरी सीधे बैंक में देने डालने, 10 तारीख से पहले हर महीना वेतन मिलना चाहिए, सैलरी स्लिप हर मजदूर को हर महीने मिलना चाहिए, 30 नवंबर से पहले बोनस का भुगतान सीधा बैंक खाते में होना चाहिए, साप्ताहिक अवकाश सुनिश्चित हो, अवकाश के दिन काम करने पर दोगुनी मजदूरी देने का आश्वासन दिया गया।
महिला सुरक्षा के लिए आंतरिक शिकायत समितियाँ और कंट्रोल रूम बनाना अनिवार्य, समिति में एक महिला सदस्य जरूर हो। कंट्रोल रूम में शिकायत पेटी लगाई जाए, हेल्पलाइन नंबर जारी की जाए, ताकि उससे भी शिकायत दर्ज कराई जा सके। शिकायतों का तुरंत निपटारा किया जाए। सरकार के निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए नियमित निगरानी की जाए। नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
सीएम योगी ने मजदूरों के विरोध प्रदर्शन को संज्ञान में लेते हुए उच्च स्तरीय बैठक की थी और निर्देश जारी करते हुए कहा था कि मजदूरों के हितों की किसी भी हाल में अनदेखी नहीं की जाएगी। इसके बावजूद सुनियोजित साजिश कर नोएडा में विरोध प्रदर्शन किया गया। दरअसल नोएडा में हिंसा कर यूपी के औद्योगिक माहौल को खराब करने की कोशिश की गई। हिंसक प्रदर्शन को सोशल मीडिया के जरिए फैलाया गया और इसके पाकिस्तानी तार भी सामने आए हैं। इसका मकसद यूपी के विकास को रोक कर राज्य में अव्यवस्था वाली स्थिति का नेरेटिव बनाना भी था।


