जाँच से पता चला कि नोएडा हिंसा स्पॉन्टेनियस नहीं थी। मुख्य आरोपित अदित्य आनंद ने 5 साल से तैयारी कर रखी थी। श्रमिकों को भड़काने के लिए 17+ व्हाट्सएप ग्रुप्स बनाए गए।
मजदूर बिगुल दस्ता नामक संगठन 'कॉमरेड अरविंद मेमोरियल ट्रस्ट' के अंतर्गत आता है, जिसने गुरुग्राम से लेकर नोएडा तक मजदूरों को भड़काया और हिंसा फैलाने की साजिश रची।