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महाराष्ट्र पुलिस को समीर वानखेड़े को गिरफ्तार करने से पहले देना होगा 72 घंटे का नोटिस, बॉम्बे हाईकोर्ट ने CBI-NIA जाँच की माँग ठुकराई

आर्यन खान से जुड़े ड्रग मामले की जाँच कर रहे समीर वानखेड़े ने याचिका में महाराष्ट्र सरकार द्वारा की जा रही जाँच को सीबीआई या एनआईए को ट्रांसफर करने की माँग की। हालाँकि, कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।

बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान के ड्रग्स केस की जाँच कर रहे एनसीबी के जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े एक के बाद एक आरोपों में फँसते जा रहे हैं। ऐसे में उन्होंने महाराष्ट्र पुलिस की संभावित गिरफ्तारी से बचने के लिए अंतरिम राहत के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट में गिरफ्तारी में याचिका दायर की थी। अदालत ने गुरुवार को इस पर सुनवाई की।

दरअसल, समीर वानखेड़े पर कार्डेलिया क्रूज ड्रग्स मामले में जबरन वसूली सहित कई आरोप लगाए गए हैं। वानखेड़े की याचिका पर सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार के वकील ने स्पष्ट किया कि वानखेड़े के खिलाफ चार अलग-अलग शिकायतें मिली हैं, लेकिन अभी तक कोई केस दर्ज नहीं किया गया है। इसलिए आवेदन प्री मेच्योर है। इसके साथ ही महाराष्ट्र सरकार के वकील ने कहा कि अगर कोई मामला दर्ज होता है तो वे गिरफ्तारी से 72 घंटे पहले अधिकारी को नोटिस देंगे।

इस पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि सरकारी वकील आश्वासन दें कि मुंबई पुलिस गिरफ्तारी से पहले 3 वर्किंग-डे का नोटिस वानखेड़े को सौंपेगी। इस पर सरकारी वकील ने कहा कि यदि प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत वानखेड़े के खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज किया जाता है तो 72 घंटे पहले नोटिस दिया जाएगा। इस मामले की सुनवाई जस्टिस नितिन जामदार और जस्टिस एसवी कोतवाल की बेंच ने की।

गौरतलब है कि शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान से जुड़े कथित ड्रग मामले की जाँच कर रहे समीर वानखेड़े ने याचिका में महाराष्ट्र सरकार द्वारा की जा रही जाँच को सीबीआई या एनआईए को ट्रांसफर करने की माँग की। हालाँकि, कोर्ट ने इस माँग को खारिज कर दिया है।

याचिका में वानखेड़े ने माँग की है, “अदालत को निर्देश देना चाहिए कि भ्रष्टाचार के आरोपों के संबंध में याचिकाकर्ता के खिलाफ महाराष्ट्र राज्य द्वारा दायर या दायर की जाने वाली सभी अथवा किसी भी प्राथमिकी की CBI या NIA द्वारा जाँच की जाए। क्योंकि ये दुर्भावना अथवा गुप्त उद्येश्यों के तहत की जा रही है।”

गौरतलब है कि मुंबई पुलिस ड्रग्स केस में स्वतंत्र गवाहों प्रभाकर सैल, वकील सुधा द्विवेदी, कनिष्क जैन और नितिन देशमुख द्वारा दायर चार शिकायतों के आधार पर जाँच कर रही है। प्रभाकर सेल ने आरोप लगाया है कि उसने मामले में एक अन्य गवाह किरण गोसावी और सैम डिसूजा को 25 करोड़ रुपए के भुगतान के बारे में बात करते हुए सुना, जिसमें एनसीबी अधिकारी समीर वानखेड़े को मामले में आर्यन खान को छोड़ने के लिए 8 करोड़ रुपए देने की बात कही गई थी। एनसीबी पहले ही आरोपों की विजिलेंस जाँच के आदेश दे चुकी है।

इस बीच, मंत्री और एनसीपी नेता नवाब मलिक एनसीबी के जोनल निदेशक पर व्यक्तिगत हमला कर रहे हैं। उन्होंने उनकी बहन, पूर्व पत्नी को मामले में घसीटते हुए उनकी अनुसूचित जाति की स्थिति पर भी सवाल उठाया।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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