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हत्या के बाद 9 घंटे तक सड़क पर लावारिस पड़े रहे साधुओं के शव: पालघर मॉब लिंचिंग मामले में न्यूज नेशन का दावा

नए खुलासे से यह सवाल खड़ा हुआ है कि पालघर में साधुओं को भीड़ के हवाले सौंपने वाले पुलिसकर्मियों ने हत्या के बाद भी उनके शवों की सुध क्यों नहीं ली? क्यों पोस्टमार्टम का ख्याल उन्हें सुबह आया?

पालघर में 2 साधुओं समेत 1 ड्राइवर की लिंचिंग के मामले में पुलिस की लापरवाही को लेकर नया खुलासा हुआ है। खबर है कि पुलिस ने हत्या के बाद कई घंटों तक शवों की सुध नहीं ली। शव उस रात करीब 9 घंटे तक सड़क पर लावारिस पड़े रहे।

न्यूज नेशन के कंसल्टिंग एडिटर दीपक चौरसिया ने इस बात का खुलासा पालघर मामले में चश्मदीद फॉरेस्ट गार्ड का हवाला देकर किया है। 

उन्होंने दावा किया है, “पालघर संतों की क्रूर और निर्मम हत्या के बाद उनकी देह 9 घंटे तक सड़क पर लावारिस पड़ी रही। दरअसल पुलिस वाले हत्या के बाद भाग खड़े हुए थे। रात भर ड्राइवर और दो संतों की हत्या के बाद भी पुलिस ने सुध नहीं ली।”

पालघर में साधुओं की लिंचिंग के बाद से न्यूज नेशन का दावा है कि वो इस मामले पर अपनी पड़ताल कर रहा है। इससे उसे पता चला है कि आदिवासी इलाकों में हिंदू संतों के खिलाफ एक हवा बनाई गई और इसी कारण संतों की मॉब लिंचिंग हुई।

बता दें इस समय पालघर लिंचिंग मामले के संबंध में लगातार नए-नए खुलासे हो रहे हैं और लगातार संतों की निर्मम हत्या पर सवाल भी उठ रहे हैं। लोगों का मानना है कि अभी भी कई प्रश्न ऐसे हैं जिनका जवाब प्रशासन को देना बाकी है।

ऐसे में अब न्यूज नेशन ये नया खुलासा लेकर आया है। इससे एक नया सवाल खड़ा हुआ है कि साधुओं को भीड़ के हवाले सौंपने वाले पुलिसकर्मियों ने हत्या के बाद भी उनके शवों की सुध क्यों नहीं ली? क्यों पोस्टमार्टम का ख्याल उन्हें सुबह आया?

गौरतलब है कि जूना अखाड़ा के महंत कल्पवृक्ष गिरी महाराज (70 वर्ष) और महंत सुशील गिरी महाराज (35 वर्ष) अपने ड्राइवर निलेश तेलगडे (30 वर्ष) के साथ मुंबई से गुजरात अपने गुरु भाई को समाधि देने के लिए जा रहे थे। इसी दौरान 16 अप्रैल 2020 की रात पालघर के दहानु तालुका के आदिवासी बहुल गडचिंचले गाँव में सैकड़ों लोगों की भीड़ ने उनकी पीट-पीटकर हत्या कर दी थी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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