Homeदेश-समाजUP में हुए बवाल में सामने आया केरल के कट्टरपंथी संगठन PFI का हाथ:...

UP में हुए बवाल में सामने आया केरल के कट्टरपंथी संगठन PFI का हाथ: नदीम, वसीम,अश्फाक गिरफ्तार

अभी तक जाँच के आधार पर बताया जा रहा है कि प्रदेश में हिंसा के लिए भीड़ जुटाने और लोगों को भड़काने के लिए 15-20 दिन से काम किया जा रहा था। कई स्लीपर सेल चमनगंज, बेकनगंज, यतीमखाना, बाबूपुरवा, बगाही और ग्वालटोली जैसे क्षेत्रों में खाने-पीने की दुकानों पर कम उम्र के लड़कों और बच्चों को भड़का रहे थे।

नागरिकता संशोधन कानून के ख़िलाफ़ उत्तरप्रदेश के अधिकांश जिलों में हुई हिंसा के पीछे केरल के कट्टरपंथी समूह पॉपुलर फ्रंट इंडिया का नाम सामने आया है। पुलिस ने जिसकी जाँच में नदीम, वसीम, अश्फाक नामक तीन युवकों को गिरफ्तार भी किया। पुलिस के अनुसार प्रदेश के अन्य जिलों में हुई गिरफ्तारियों में भी इसी संगठन के उपद्रवी पुलिस के हत्थे चढे़ हैं। इसके अलावा सिमी से जुड़े कुछ लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है।

गौरतलब है कि उत्तरप्रदेश के कानपुर में हुई हिंसा में सिमी और AIMIM से जुड़े नेताओं का नाम शामिल होने की बात पहले ही सामने आ चुकी थी। लेकिन अब इसमें पीएफआई के नाम खुलासा हुआ है। पीएफआई सिमी का ही लघु संगठन है। जिसके कई लोग पहले सिमी के साथ जुड़े रहे हैं।

प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा भी रविवार को मीडिया से बातचीच में कह चुके हैं कि हिंसा में शामिल लोग प्रतिबंधित संगठन सिमी से जुड़े पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के हैं। जिन्हें पश्चिम के मालदा से गिरफ्तार किया गया है।

यहाँ बता दें कि अभी तक जाँच के आधार पर बताया जा रहा है कि प्रदेश में हिंसा के लिए भीड़ जुटाने और लोगों को भड़काने के लिए 15-20 दिन से काम किया जा रहा था। कई स्लीपर सेल चमनगंज, बेकनगंज, यतीमखाना, बाबूपुरवा, बगाही और ग्वालटोली जैसे क्षेत्रों में खाने-पीने की दुकानों पर कम उम्र के लड़कों और बच्चों को भड़का रहे थे। इनका भरोसा जीतने के लिए सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे भ्रामक पोस्ट के प्रिंट की फोटोकॉपी भी लोगों में बाँटी जा रही थीं। इसीलिए दोनों दिन हुए प्रदर्शनों में ज्यादातर युवकों के पास छपे हुए प्लेकार्ड और पोस्टर्स थे।

इसके अलावा कानपुर के ही एक स्थानीय संगठन ने ही 13 दिसंबर को शुक्रवार के दिन युवकों को इकट्ठा करने के लिए जगह-जगह पोस्टर लगाए थे। लेकिन हिंसक भीड़ का नेतृत्व बाहरी लोगों ने किया था। स्थानीय लोगों ने खुद इस बात को कहा था कि वे उनमें से ज्यादातर को पहचानते ही नहीं थे।

बता दें, प्रदेश में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा को लेकर अब तक 164 मामले दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में नामजद 880 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं 5312 लोगों को हिरासत में लेकर निरोधात्मक कार्रवाई की गई है। इसके अलावा अपनी जाँच में पुलिस बड़े पैमाने पर सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन कैमरे और मोबाइल से ली गई तस्वीरों का इस्तेमाल कर उपद्रवियों की शिनाख्त करने में जुटी है।

SIMI, ओवैसी की पार्टी से जुड़े कानपुर हिंसा के तार, ममता बनर्जी के नेता नहीं कर पाएँगे लखनऊ में प्रवेश
राम मंदिर फैसले पर पुनर्विचार याचिका का उमर खालिद कनेक्शन, आतंकी संगठन SIMI से भी है रिश्ता
Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

100 नाराज़ ≠ 100 वोट: भारतीय राजनीति में सिर्फ़ ‘नाराज़गी’ का फ़ैक्टर कभी निर्णायक क्यों नहीं रहा

SC/ST Act, आरक्षण, Caste census, सरकारी नौकरियों में हिस्सेदारी, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय की राजनीति जैसे मुद्दे निश्चित रूप से सवर्णों में असंतोष पैदा कर सकते हैं। इन प्रश्नों को खारिज करना भी राजनीतिक मूर्खता होगी।

12 वर्ष पहले गोरखनाथ पीठ के पीठाधीश्वर, फिर देश के सबसे बड़े सूबे के CM: जनता तक पहुँच और समस्याओं पर तत्काल प्रतिक्रिया –...

योगी आदित्यनाथ की गोरखनाथ पीठाधीश्वर से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री तक की यात्रा, विरासत को आगे बढ़ाने से लेकर विकसित होते UP की पूरी कहानी।
- विज्ञापन -