Tuesday, August 3, 2021
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UP में हुए बवाल में सामने आया केरल के कट्टरपंथी संगठन PFI का हाथ: नदीम, वसीम,अश्फाक गिरफ्तार

अभी तक जाँच के आधार पर बताया जा रहा है कि प्रदेश में हिंसा के लिए भीड़ जुटाने और लोगों को भड़काने के लिए 15-20 दिन से काम किया जा रहा था। कई स्लीपर सेल चमनगंज, बेकनगंज, यतीमखाना, बाबूपुरवा, बगाही और ग्वालटोली जैसे क्षेत्रों में खाने-पीने की दुकानों पर कम उम्र के लड़कों और बच्चों को भड़का रहे थे।

नागरिकता संशोधन कानून के ख़िलाफ़ उत्तरप्रदेश के अधिकांश जिलों में हुई हिंसा के पीछे केरल के कट्टरपंथी समूह पॉपुलर फ्रंट इंडिया का नाम सामने आया है। पुलिस ने जिसकी जाँच में नदीम, वसीम, अश्फाक नामक तीन युवकों को गिरफ्तार भी किया। पुलिस के अनुसार प्रदेश के अन्य जिलों में हुई गिरफ्तारियों में भी इसी संगठन के उपद्रवी पुलिस के हत्थे चढे़ हैं। इसके अलावा सिमी से जुड़े कुछ लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है।

गौरतलब है कि उत्तरप्रदेश के कानपुर में हुई हिंसा में सिमी और AIMIM से जुड़े नेताओं का नाम शामिल होने की बात पहले ही सामने आ चुकी थी। लेकिन अब इसमें पीएफआई के नाम खुलासा हुआ है। पीएफआई सिमी का ही लघु संगठन है। जिसके कई लोग पहले सिमी के साथ जुड़े रहे हैं।

प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा भी रविवार को मीडिया से बातचीच में कह चुके हैं कि हिंसा में शामिल लोग प्रतिबंधित संगठन सिमी से जुड़े पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के हैं। जिन्हें पश्चिम के मालदा से गिरफ्तार किया गया है।

यहाँ बता दें कि अभी तक जाँच के आधार पर बताया जा रहा है कि प्रदेश में हिंसा के लिए भीड़ जुटाने और लोगों को भड़काने के लिए 15-20 दिन से काम किया जा रहा था। कई स्लीपर सेल चमनगंज, बेकनगंज, यतीमखाना, बाबूपुरवा, बगाही और ग्वालटोली जैसे क्षेत्रों में खाने-पीने की दुकानों पर कम उम्र के लड़कों और बच्चों को भड़का रहे थे। इनका भरोसा जीतने के लिए सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे भ्रामक पोस्ट के प्रिंट की फोटोकॉपी भी लोगों में बाँटी जा रही थीं। इसीलिए दोनों दिन हुए प्रदर्शनों में ज्यादातर युवकों के पास छपे हुए प्लेकार्ड और पोस्टर्स थे।

इसके अलावा कानपुर के ही एक स्थानीय संगठन ने ही 13 दिसंबर को शुक्रवार के दिन युवकों को इकट्ठा करने के लिए जगह-जगह पोस्टर लगाए थे। लेकिन हिंसक भीड़ का नेतृत्व बाहरी लोगों ने किया था। स्थानीय लोगों ने खुद इस बात को कहा था कि वे उनमें से ज्यादातर को पहचानते ही नहीं थे।

बता दें, प्रदेश में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा को लेकर अब तक 164 मामले दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में नामजद 880 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं 5312 लोगों को हिरासत में लेकर निरोधात्मक कार्रवाई की गई है। इसके अलावा अपनी जाँच में पुलिस बड़े पैमाने पर सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन कैमरे और मोबाइल से ली गई तस्वीरों का इस्तेमाल कर उपद्रवियों की शिनाख्त करने में जुटी है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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