प्रयागराज जिला अदालत ने 16 अक्टूबर 2025 को फुलपुर थाने के अंतर्गत बौदई गाँव में चल रहे ईसाई धर्मांतरण गिरोह के 13 आरोपितों की जमानत अर्जी खारिज कर दी। यह आदेश अतिरिक्त जिला न्यायाधीश ने सुनाया।
अदालत ने रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया में यह प्रतीत होता है कि आरोपित गरीब हिंदुओं को लालच देकर, आर्थिक मदद का प्रलोभन देकर, मिशनरी स्कूलों में नौकरी देने के झाँसे और धार्मिक प्रचार के जरिए ईसाई बनाने की कोशिश में शामिल थे।
आरोपितों की पहचान सोनू कुमार, पंकज सरोज, सचिन, अनिल, राममिलन, सोना देवी, आरती देवी, शिवानी यादव, अंजुला, रेखा देवी, संगीता सरोज, शिवानी सरोज और हरीशिव के रूप में की गई है। इन सभी के खिलाफ 19 सितंबर 2025 को बजरंग दल फुलपुर के सह संयोजक शांतनु तिवारी की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था।
आरोपितों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 191(2), 352, 351(3), 299 और 196(1) के तहत और उत्तर प्रदेश अवैध धर्मांतरण निषेध अधिनियम, 2021 की धारा 3 और 5(1) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
बजरंग दल नेता ने धर्मांतरण रैकेट का किया पर्दाफाश
यह मामला बजरंग दल के सह-संयोजक शांतनु तिवारी की लिखित शिकायत से शुरू हुआ था। प्राथमिकी के अनुसार, शांतनु को लगातार ऐसी सूचनाएँ मिल रही थीं कि फुलपुर क्षेत्र के बौदई गाँव में कुछ लोग हिंदुओं को ईसाई धर्म में परिवर्तित करने के उद्देश्य से प्रार्थना सभाएँ आयोजित कर रहे हैं। 19 सितंबर 2025 को उन्हें गाँव में ऐसी ही एक सभा के चलने की जानकारी मिली। इसके बाद वे अपने तीन साथियों के साथ सत्यापन के लिए मौके पर पहुँचे।

गाँव पहुँचने पर शांतनु ने देखा कि कुछ पुरुष और महिलाएँ ईसाई प्रार्थना कर रहे थे। यह सभा उन लोगों ने आयोजित की थी जो खुद को मिशनरी बता रहे थे। उनमें से एक व्यक्ति मुन्नीलाल (जो आरोपितों में शामिल है) खुद को ‘पादरी’ कह रहा था। पूछताछ करने पर कुछ उपस्थित लोगों ने बताया कि आरोपित हर हिंदू को ईसाई धर्म में परिवर्तित कराने पर मोटी रकम दी जाती है। उन्हें विदेशी फंडिंग और मिशनरी संगठनों का भी सहारा मिलता है।
धर्म परिवर्तन की रणनीति और झूठे वादे
FIR के मुताबिक, आरोपितों ने हिंदू समुदाय के लोगों से कहा था कि उनके धर्म में ‘कुछ भी नहीं है’ और उन्हें अपने घरों से देवी-देवताओं की मूर्तियाँ हटा देनी चाहिए। आरोप है कि वे लोगों से कहते थे कि इन मूर्तियों की जगह यीशु मसीह की तस्वीरें लगाओ और ईसाई धर्म अपनाओ। इसके बदले में उन्हें आर्थिक सहायता देने और मिशनरी स्कूलों में नौकरी दिलाने का लालच भी दिया गया था।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि जब शांतनु और उनके साथी इस गतिविधि का विरोध करने लगे तो आरोपितों ने उनके साथ गाली-गलौज की और धमकी दी कि अगर वे दोबारा वहाँ आए तो उन्हें जान से मार दिया जाएगा। इस झड़प के बाद शांतनु ने तत्काल फुलपुर पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस ने कड़े प्रावधानों के तहत अवैध धर्मांतरण निषेध कानून के तहत मामला दर्ज किया।
अदालत ने धर्म परिवर्तन अभियान के ‘प्रथम दृष्टया’ सबूत पर किया गौर
कोर्ट ने अपने आदेश में आरोपितों की जमानत याचिका को खारिज करते हुए कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों से यह स्पष्ट होता है कि याचिकाकर्ता सुनियोजित तरीके से निर्दोष और आर्थिक रूप से कमजोर हिंदू परिवारों को पैसों और नौकरी के प्रलोभन के जरिए धर्म परिवर्तन के लिए उकसाने की कोशिश कर रहे थे। न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि यह अपराध ‘गंभीर प्रकृति’ का है और ऐसे में इस चरण पर जमानत नहीं दी जा सकती।

जमानत याचिका खारिज करते हुए अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि शिकायतकर्ता शांतनु तिवारी सहित गवाहों के बयानों में निरंतरता है और सभी ने इस बात की पुष्टि की है कि आरोपित नियमित रूप से प्रार्थना सभा के नाम पर धर्म परिवर्तन को बढ़ावा देने वाली बैठकों का आयोजन करते थे।
अदालत ने बचाव पक्ष की इस दलील को भी अस्वीकार कर दिया कि वास्तविक तौर पर धर्म परिवर्तन नहीं हुआ था। अदालत ने कहा कि जाँच में आरोपितों की मंशा, प्रलोभन और तैयारी से जुड़े ठोस साक्ष्य स्पष्ट रूप से सामने आए हैं, जो अपराध की गंभीरता को दर्शाते हैं।
जाँच और हिरासत
जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब सभी 13 आरोपित न्यायिक हिरासत में रहेंगे। उन्हें 21 सितंबर 2025 को हिरासत में भेजा गया था। पुलिस ने अदालत को बताया कि इस मामले की जाँच अभी जारी है और अधिकारियों की कोशिश है कि धर्मांतरण के इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों का पता लगाया जाए। साथ ही फंडिंग के सोर्स की पहचान की जा रही है।
इस बीच शिकायतकर्ता शांतनु तिवारी ने हाल ही में इसी तरह के एक अन्य मामले में भी फुलपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई है। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने 18 अक्टूबर 2025 को तीन ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया, जो हिंदुओं को ईसाई धर्म अपनाने के लिए बहलाने और लुभाने का काम कर रहे थे। उस मामले में भी पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है और जाँच जारी है।


