Homeदेश-समाजगुरु ग्रंथ साहिब की घर में बेअदबी, 'अंगों' को टेप से चिपकाया: अमृतसर में...

गुरु ग्रंथ साहिब की घर में बेअदबी, ‘अंगों’ को टेप से चिपकाया: अमृतसर में सत्कार कमेटी के ‘छापे’ के बाद केस दर्ज, पवित्र ग्रंथ को गुरुद्वारे पहुँचाया गया

8 साल पहले गुरुवाली गाँव में बाज सिंह को किराए पर घर दिया गया था। लेकिन जब जसपाल सिंह ने उसे वो घर खाली करने को कहा तो उसने ऐसा करने से मना कर दिया। ढाई साल पहले बाज सिंह गुरु ग्रंथ साहिब सरूप घर ले आया ताकि कोई उसे वहाँ से न निकाल सके।

पंजाब के अमृतसर की ग्रामीण पुलिस ने धार्मिक भावना आहत करने के मामले में बाज सिंह नामक एक शख्स पर केस दर्ज किया है। आरोप है कि सत्कार कमेटी की छापेमारी में उसके घर में गुरु ग्रंथ साहिब सरूप के कुछ पृष्ठ फटे मिले।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुच्छल गाँव निवासी व सत्कार कमेटी का नेतृत्व करने वाले बलबीर सिंह ने जब आरोपित बाज सिंह के घर में जाकर देखा तो वहाँ गुरु ग्रंथ साहिब के अंग (पन्ने) फाड़कर रखे हुए थे जिसे बाद में टेप से चिपकाया गया था।

वहीं गुटका (सिखों के भजन की कॉपी) को किसी तरल पदार्थ में भिगो के रखा हुआ था। जब छापे में ये चीजें कमेटी ने देखी तो सिखों के पवित्र ग्रंथ को वहाँ से हटाकर छाबा के बाबा नौध सिंह समध गुरुद्वारे में रखवाया गया।

आरोपित की पहचान बाज सिंह के तौर पर हुई है। उसके विरुद्ध आईपीसी की धारा 295 के तहत केस दर्ज हैं। वह गुरुवाली गाँव का रहने वाला है। रिपोर्ट के अनुसार, चाटीविंड पुलिस थाने के स्टेशन हाउस अधिकारी अजय पाल सिंह ने इस मामले में बताया कि उन्होंने केस दर्ज करके मामले की जाँच को शुरू कर दिया है। आगे जरूरी कार्रवाई की जाएगी

बोध गाँव के बलबीर सिंह और जसपाल सिंह ने कमेटी के साथ शिकायत दी है कि 8 साल पहले गुरुवाली गाँव में बाज सिंह को घर दिया गया था। लेकिन जब जसपाल सिंह ने उसे वो घर खाली करने को कहा तो उसने ऐसा करने से मना कर दिया। ढाई साल पहले बाज सिंह गुरु ग्रंथ साहिब सरूप घर ले आया ताकि कोई उसे वहाँ से न निकाल सके।

बलबीर सिंह कहते हैं कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने उसे पहले ही निर्देश दिए थे कि वो सरूप का ढंग से प्रयोग करेगा और मान-सम्मान रखेगा। हालाँकि जब उसके घर गए तो देखा गया कि उसने सिख रेहत मर्यादा को पार किया हुआ था। अब इस मामले को लेकर चाटीविंड के पुलिस थाने में शिकायत दे दी गई है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

खून वही, बस नैरेटिव बदल गया: प्राचीन बलि से ईसाई संस्कार तक, इतिहास ने ये फर्क कैसे बनाया?

पश्चिम ने पुरानी सभ्यताओं को खून और बलि के नाम पर बर्बर कहा। ईसाई परंपरा को आध्यात्मिक ऊँचाई बताया। लेकिन चर्च के केंद्र में भी रोटी और वाइन के जरिए शरीर और रक्त का अनुष्ठान बैठा है। सभ्यता की कहानी इतनी साफ नहीं।

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।
- विज्ञापन -