रघुवर दास की कोशिशों से बकरीद पर घर लौटा मोहम्मद मुफीज, 3 महीने से सऊदी में था बंधक

मुफीज के परिवार ने इसकी जानकारी सीएम रघुवर दास को दी। मुफीज की बहन इशरत परवीन ने अपने भाई की रिहाई के लिए सीएम रघुबर दास से गुहार लगाई थी। इशरत ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा था कि उनके भाई को तीन महीने से अधिक समय से बंधक बनाकर कंपनी में रखा गया है और झूठा केस दर्ज किया गया है।

3 महीने से सऊदी अरब के रियाद में बंधक बना मोहम्मद मुफीज सोमवार (अगस्त 12, 2019) को अपने घर लौट आया। मुफीज के राँची एयरपोर्ट पहुँचते ही परिवारवालों का खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उनके लिए बकरीद की खुशियाँ दोगुनी हो गई। मुफीज ने अपनी वापसी के लिए सीएम रघुवर दास का आभार जताया और कहा कि उसकी घर वापसी में सरकार ने काफी मदद की। उसने बताया कि मुख्यमंत्री की वजह से ही उसे इमरजेंसी पासपोर्ट उपलब्ध कराया गया और बकरीद पर वो अपने घर आ पाया।

मुफीज के भाई खुर्शीद ने बताया कि उसका (मुफीज) एक दोस्त काम दिलाने का वादा करके फर्जी पासपोर्ट पर सऊदी ले गया था। उसने मुफीज से महीने के 50,000 रुपए देने की बात कही, मगर जब वो वहाँ गया, तो कंपनी ने उसे 15,000 रुपए दिए और फिर कुछ महीने बाद वो भी देना बंद कर दिया। इसके बाद कंपनी ने झूठा केस बनाकर उसे बंधक बना लिया।

मुफीज के परिवार ने इसकी जानकारी सीएम रघुवर दास को दी। मुफीज की बहन इशरत परवीन ने अपने भाई की रिहाई के लिए सीएम रघुबर दास से गुहार लगाई थी। इशरत ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा था कि उनके भाई को तीन महीने से अधिक समय से बंधक बनाकर कंपनी में रखा गया है और झूठा केस दर्ज किया गया है।

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इसके बाद सीएम ने मामले का संज्ञान लिया और रियाद स्थित भारतीय दूतावास के संपर्क में रहे। उन्होंने पूरे मामले से दूतावास को अवगत कराया। आखिरकार इनकी कोशिश रंग लाई और सऊदी अरब सरकार ने मुफीज को रिहा करने का फैसला किया और मुफीज बकरीद के मौके पर अपने वतन लौट आए।

सीएम ने खुद ट्वीट करते हुए इसकी जानकारी दी। उन्होंने इसके लिए रियाद स्थित भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय के अधिकारियों को धन्यवाद दिया और साथ ही कहा कि एक बहन के लिए इससे बड़ा तोहफा नहीं हो सकता।

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