Homeदेश-समाजशाहीन बाग का ऐलान: अरे ओ सुन ले, तू हमें करंट क्या लगाएगा? अब...

शाहीन बाग का ऐलान: अरे ओ सुन ले, तू हमें करंट क्या लगाएगा? अब तू दिल्ली से ही नहीं, हिंदुस्तान से भी जाएगा

इससे फिर ये साबित हुआ कि इनका आंदोलन किस मकसद से चल रहा है। इसका असली एजेंडा क्या है। हालाँकि, मीडिया ने इसे छिपाने की भरसक कोशिश की। फिर भी, एक सजग वर्ग ने इसे जनता के सामने रखा। दरअसल, इस पोस्टर के जरिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा गया।

दिल्ली के शाहीन बाग़ में आम आदमी पार्टी की जीत के बाद जश्न मनाया गया। हालाँकि, ये जश्न केजरीवाल की जीत को लेकर कम और भाजपा की हार को लेकर ज्यादा था। भाजपा को चिढ़ाते हुए बैनर-पोस्टर लहराए गए। एक ऐसा पोस्टर भी लहराया गया, जिसमें भाजपा को धमकी दी गई है। धमकी भरे अंदाज में उस पोस्टर को शाहीन बाग़ के प्रदर्शनकारियों ने लहराया। ये तो शरजील के बयानों के बाद से ही स्पष्ट है कि मुद्दा सीएए और एनआरसी नहीं है, मुद्दा हिंदुत्व भाजपा का विरोध है। इसके लिए उन्हें बहाना चाहिए, जो सीएए के रूप में उन्हें मिल गया।

इस पोस्टर में लिखा हुआ है- “अरे ओ सुन ले, तू हमें करंट क्या लगाएगा? अब तू दिल्ली से ही नहीं, हिंदुस्तान से भी जाएगा।” शाहीन बाग़ वालों से जब मीडिया ने सवाल पूछा तो वो गुजरात दंगे की बातें करने लगे। भाजपा के प्रति अपने नफरत का इजहार करने लगे। इससे फिर ये साबित हुआ कि इनका आंदोलन किस मकसद से चल रहा है। इसका असली एजेंडा क्या है। हालाँकि, मीडिया ने इसे छिपाने की भरसक कोशिश की। फिर भी, एक सजग वर्ग ने इसे जनता के सामने रखा। दरअसल, इस पोस्टर के जरिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा गया।

शाह ने 26 जनवरी को बाबरपुर विधानसभा क्षेत्र में एक जनसभा को सम्बोधित करते हुए कहा था कि ईवीएम का बटन इतने गुस्से के साथ दबाना कि बटन यहाँ दबे, करंट शाहीन बाग के अंदर लगे। उससे तीन दिन पहले जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में भी उन्होंने कुछ ऐसा ही बयान दिया था। शाह ने कहा था, “बटन इतनी ताकत से दबाना कि इसके करंट से 8 फरवरी को शाहीन बाग के प्रदर्शनकारी वो जगह छोड़ने पर मजबूर हो जाएँ।’आम आदमी पार्टी की जीत के बाद अमानतुल्लाह ख़ान समेत कई नेताओं ने शाह के इस बयान पर तंज कसा।

जब मुस्लिमों के रहनुमाओं से इस बारे में पूछा गया तो वो बात बनाते नज़र आए। ‘न्यूज़ नेशन’ के शो में पत्रकार दीपक चौरसिया ने मुस्लिम प्रतिनिधियों से पूछा तो एक ने कहा कि शाहीन बाग़ में रोज लाखों लोग आते हैं, कैसे पता चलेगा कि पोस्टर प्रदर्शनकारियों ने ही लहराए हैं? वहीं दूसरे ने कहा कि वो इसकी निंदा करते हैं लेकिन साथ ही इस प्रदर्शन को पिछले 100 साल का सबसे बड़ा आंदोलन भी करार दिया। शाहीन बाग़ के मास्टरमाइंड शरजील इमाम ने AMU में इससे पहले नार्थ-ईस्ट को शेष भारत से अलग करने की बातें की थी।


शाहीन बाग़ की तल्ख़ हकीकत: विरोध का असली मकसद देश में अस्थिरता का माहौल पैदा कर सरकार गिराना

संख्या नहीं गिनाएँगे, सैकड़ों प्रदर्शनकारी बताएँगे: AltNews ने किया शाहीन बाग़ के सन्नाटे का फर्जी फैक्ट चेक

हिन्दुओं! उपकार मानो कि शाहीन बाग़ ने एक शव यात्रा के लिए रास्ता दिया है, वो चाहते तो…

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -