भंग हो सकता है शिया व सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड: हाईकोर्ट ने कहा- अपना रुख स्पष्ट करे सरकार

याचिकाकर्ता मसर्रत हुसैन ने वक़्फ़ एक्ट का हवाला देते हुए अदालत से इन दोनों ही बोर्डों को मिला कर एक बोर्ड बनाने के सम्बन्ध में आदेश देने के लिए निवेदन किया। इस एक्ट में कहा गया है कि दो ही परिस्थितियों में शिया और सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड की व्यवस्था की जा सकती है।

क्या शिया और सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ख़त्म हो जाएगा? अगर इलाहबाद हाईकोर्ट के ताज़ा आदेश की बात करें तो ऐसा ही लगता है। हालाँकि, कोर्ट ने इस सम्बन्ध में कोई फ़ैसला नहीं लिया है लेकिन यूपी और केंद्र की सरकारों से अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है। इलाहबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सरकार से पूछा है कि दोनों वक़्फ़ बोर्डों को मिला कर एक मुस्लिम बोर्ड बनाने को लेकर उसके क्या विचार हैं? कोर्ट ने एक पीआईएल पर सुनवाई करते हुए ऐसा कहा। इस पीआईएल में दोनों वक़्फ़ बोर्डों को भंग कर एक मुस्लिम वक़्फ़ बोर्ड बनाने की बात कही गई है।

जस्टिस पंकज कुमार जायसवाल और जस्टिस आलोक माथुर ने कहा कि वो फ़िलहाल इस मामले में कोई फ़ैसला नहीं ले रहे हैं। याचिकाकर्ता मसर्रत हुसैन ने वक़्फ़ एक्ट का हवाला देते हुए अदालत से इन दोनों ही बोर्डों को मिला कर एक बोर्ड बनाने के सम्बन्ध में आदेश देने के लिए निवेदन किया। इस एक्ट में कहा गया है कि दो ही परिस्थितियों में शिया और सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड की व्यवस्था की जा सकती है। पहली, प्रदेश में शिया वक्फ की कुल संख्या कुल वक़्फ़ का 15% या इससे अधिक हो। दूसरी, वक़्फ़ों की सम्पत्तियों व उनसे होने वाली आय में शिया वक़्फ़ का हिस्सा 15% या उससे ज्यादा हो।

याचिकाकर्ता ने कहा कि उत्तर प्रदेश में ये दोनों ही परिस्थितियों नहीं हैं और इसीलिए दोनों ही वक़्फ़ बोर्डों को भंग कर दिया जाना चाहिए। उसने कहा कि इस सम्बन्ध में केंद्र और राज्य सरकारों को लिखे जाने के बावजूद कोई जवाब नहीं आया है। बता दें कि मुस्लिमों में शिया और सुन्नी, दोनों के ही तौर-तरीके अलग हैं। सुन्नी मुस्लिमों में तीन प्रमुख पंथ होते है- बरेलवी, देवबंदी और अहले हदीस। अयोध्या में मस्जिद के लिए 5 एकड़ ज़मीन दिए जाने के बाद भी इस पर बहस शुरू हो गई है कि ये मस्जिद किस पंथ का होगा, शिया या सुन्नी?

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हालाँकि, फिलहाल तो कोर्ट ने दोनों बोर्डों को भंग किए जाने की याचिका के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी करने से इनकार किया है लेकिन भविष्य में दोनों सरकारों का जवाब आते ही अदालत इस सम्बन्ध में आगे की सुनवाई करेगी।

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