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सोनभद्र नरसंहार: 4 और आरोपितों को पुलिस ने किया गिरफ्तार, अब तक कुल 39 हिरासत में

उम्भा गाँव में हुए खूनी संघर्ष के बाद आईबी को कई युवाओं के अंडरग्राउंड होने की भी सूचना मिली है। ऐसे में खूफिया एजेंसी को डर है कि अगर संवेदनाओं का फायदा उठाकर बस्तर के नक्सली यहाँ पहुँचते हैं तो किसी बड़ी वारदात को अंजाम दे सकते हैं।

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में जमीनी विवाद में हुई 10 लोगों की हत्या मामले में पुलिस ने 4 और आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में अब तक 39 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिसमें से 18 आरोपित नामजद हैं। पुलिस ने शुक्रवार (जुलाई 26, 2019) को हत्या मामले में नामजद आरोपित सोनू सिंह समेत मुन्नू, राम नगीना और विनय कुमार को हिरासत में लिया। इन चारों आरोपितों को घोरावल कोतवाली पुलिस ने नगर के मुक्खा तिराहे से गिरफ्तार किया।

गौरतलब है कि इससे पहले, पुलिस ने गुरुवार (जुलाई 25, 2019) को नामजद आरोपित रमेश को गिरफ्तार किया था। हत्या के मुख्य आरोपित ग्राम प्रधान यज्ञदत्त, उनके भाई और भतीजे को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में पुलिस ने 28 लोगों के खिलाफ नामजद जबकि 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है।

उम्भा गाँव में हुए खूनी संघर्ष के बाद आईबी को कई युवाओं के अंडरग्राउंड होने की भी सूचना मिली है। ऐसे में खूफिया एजेंसी को डर है कि अगर संवेदनाओं का फायदा उठाकर बस्तर के नक्सली यहाँ पहुँचते हैं तो किसी बड़ी वारदात को अंजाम दे सकते हैं। 1996 से लेकर 2012 तक ये गाँव नक्सल आंदोलन का शिकार रहा। लेकिन 17 जुलाई जैसी घटना यहाँ उस समय में भी नहीं हुई थी। 17 जुलाई से पहले इस इलाके को शांत माना जाता था लेकिन अब खूफिया एजेंसी को डर है कि नक्सली गाँव वालों की संवेदना को हथियार बनाकर यहाँ अपने पैर पसारने की कोशिश कर सकते हैं। इसलिए खुफिया एजेंसी उम्भा गाँव में होने वाली गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है और नक्सलियों को चिह्नित करने की कोशिशों में भी जुटी हुई है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए हत्या मामले में गठित जाँच समिति की संस्तुति पर सोनभद्र के घोरावल के SDM, CO घोरावल, इंस्पेक्टर घोरावल समेत पाँच अधिकारियों व कर्मचारियों को निलंबित कर दिया था। वहीं, सीएम ने इस घटना के लिए स्पष्ट तौर पर कॉन्ग्रेस को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा था कि इस घटना की नींव 1955 में ही पड़ गई थी, जब कॉन्ग्रेस की सरकार थी। सोनभद्र के विवाद के लिए 1955 और 1989 की कॉन्ग्रेस सरकार दोषी है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि सोनभद्र में जो घटना घटी है, उसकी नींव 1955 में रखी गई थी। 1955 में कॉन्ग्रेस की सरकार ने सोनभद्र में पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के नाम पर जनजाति के लोगों की भूमि को एक पब्लिक ट्रस्ट के नाम कर दिया। वर्ष 1989 में उस ट्रस्ट से जुड़े लोगों के नाम पर वह जमीन कर दी गई। वर्ष 2017 में वह जमीन कुछ लोगों को बेची गई। यह कैसे हुआ, इसका परीक्षण भी जाँच कमिटी करेगी। इस गड़बड़ी की जाँच के लिये राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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