Sunday, May 29, 2022
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यूक्रेन में MBBS कर रहे छात्रों को देश में ही एडमिशन देने की तैयारी में मोदी सरकार: हर साल 25000 स्टूडेंट डॉक्टरी पढ़ने जाते हैं विदेश

देश के मेडिकल कॉलेजों में करीब 90,000 सीटें हैं और इनमें से आधी सीटें सरकारी मेडिकल कॉलेजों में हैं। ऐसे में बाकी के छात्रों को विदेशों का रुख करना पड़ता है।

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध (Russia-Ukraine War) के बीच वहाँ फँसे भारतीय छात्र-छात्राओं को रेस्क्यू करने के लिए भारत सरकार लगातार कोशिश कर रही है। यूक्रेन में करीब 18000 भारतीय छात्र हैं, जिन्हें भारत लाया जा रहा है। इसके लिए केंद्र सरकार ने केंद्रीय मंत्रियों की टीमें भी गठित की गई हैं, जो यूक्रेन से सीमा साझा करने वाले देशों में जाकर यूक्रेन से आने वाले छात्रों को भारत लाने में लगे हैं। खबर है कि यूक्रेन से आने वाले इन छात्रों को भारत के मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन देने की भी सरकार तैयारी कर रही है।

दरअसल भारत में डॉक्टर बनने की चाह रखने वाले स्टूडेंट के लिए भारत सरकार अखिल भारतीय स्तर पर हर साल NEET की परीक्षा आयोजित करती है। इसमें हर साल करीब 8 लाख छात्र इस परीक्षा को क्लियर कर पाते हैं। देश के मेडिकल कॉलेजों में करीब 90,000 सीटें हैं और इनमें से आधी सीटें सरकारी मेडिकल कॉलेजों में हैं। ऐसे में बाकी के छात्रों को विदेशों का रुख करना पड़ता है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के प्राइवेट सेक्टर के कॉलेजों में करीब 20 लाख रुपए प्रतिवर्ष का खर्च होता हैं। वहीं यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई में हर साल करीब 10 लाख रुपए लगते हैं।

विदेश जाने वाले 90 फीसदी स्टूडेंट नहीं पास कर पाते हैं NEET

विदेशों में एमबीबीएस की पढ़ाई करने जाने वाले भारतीयों विद्यार्थियों को लेकर संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी का कहना है कि विदेशों में मेडिकल की पढ़ाई करने वाले लगभग 90% भारतीय छात्र भारत में मेडिकल एडमिशन के लिए होने वाली परीक्षाएँ पास ही नहीं कर पाते हैं। मंत्री ने आगे कहा कि मेडिकल स्टडी के लिए विदेश जाने वाले 60% भारतीय छात्र चीन, रूस और यूक्रेन जाते हैं। इन देशों में MBBS कोर्स की कुल फीस लगभग 35 लाख रुपए है, जिसमें छह साल की शिक्षा, रहने का खर्च, कोचिंग और भारत लौटने पर स्क्रीनिंग टेस्ट पास करना शामिल है। वहीं, भारत में यह खर्च 45 से 55 लाख रुपए या इससे भी ज्यादा है। यही कारण है कि अधिकतर छात्र विदेशों में पढ़ने जाते हैं।

गौरतलब है कि भारत से हर साल करीब 20,000 से 25,000 स्टूडेंट विदेशों में मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए जाते हैं। इसके पीछे की बड़ी वजह यह भी है कि विदेशों में एमबीबीएस की स्टडी भारत की अपेक्षा काफी सस्ती होती है।

भारत में कैसे कर सकते हैं प्रैक्टिस

विदेशों से मेडकल की स्टडी करके आने वाले डॉक्टरों को भारत में प्रैक्टिस करने के लिए भी परीक्षा देनी होती है। इस परीक्षा का नाम फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स एक्जामिनेशन (FMGE) है। यह साल में 2 बार होती है। इसे पास करने के लिए 3 चांस मिलते हैं। इसके लिए राष्ट्रीय परीक्षा मंडल (NBE) परीक्षा आयोजित करता है।

यूक्रेन से लौटे छात्रों के कैरियर के लिए काम कर रही सरकार

युद्धग्रस्त यूक्रेन से मेडिकल की पढ़ाई बीच में छोड़कर भारत वापस लौटे छात्र-छात्राओं की पढ़ाई की चिंता को देखते हुए भारत सरकार देश के मेडिकल कॉलेजों में इन्हें एडमिशन दिलाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) को फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट लाइसेंसिंग रेगुलेशन (FMGL) एक्ट में बदलाव करने के लिए कहेगी। इस मामले पर अगले कुछ दिनों में एक अहम बैठक होने की बात भी सामने आई है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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