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‘किसानों को विरोध का अधिकार, लेकिन अनिश्चितकाल तक सड़क बंद नहीं रख सकते’: SC ने केंद्र-UP से समाधान खोजने को कहा

याचिकाकर्ता मोनिका अग्रवाल ने कहा कि सार्वजनिक सड़कों को यातायात के लिए सुगम बनाए रखने के लिए शीर्ष अदालत द्वारा पारित विभिन्न निर्देशों के बावजूद उनका पालन नहीं किया गया है। याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता के सिंगल मदर होने के कारण उसे नोएडा से दिल्ली की यात्रा करना दूभर हो गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से तीन कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन के कारण सड़कों के अवरुद्ध होने पर इसका समाधान खोजने को कहा है। अदालत ने सोमवार (23 अगस्त) को नोएडा के एक निवासी की याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा, ”आपको समाधान खोजना होगा, उन्हें आंदोलन करने का अधिकार है, लेकिन इस तरह से नोएडा से दिल्ली के बीच सड़कों को अवरुद्ध नहीं किया जा सकता है।”

Bar and Bench की​ रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस एसके कौल ने नोएडा के एक निवासी की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया, जिसमें किसानों के विरोध के कारण सड़कों पर की गई नाकेबंदी से राहत की माँग की गई थी। वहीं, यूपी सरकार ने इस मामले में शीर्ष अदालत को बताया है कि वह सुगम यातायात के लिए इस क्षेत्र को खाली कराने के लिए किसानों से अनुरोध कर रही है।

जस्टिस संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि किसानों को विरोध करने का अधिकार है, लेकिन सड़कों को अनिश्चित काल के लिए अवरुद्ध नहीं किया जा सकता है। इसलिए कोर्ट ने केंद्र सरकार और संबंधित राज्यों को इसका समाधान निकालने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा, “आपको समाधान खोजना होगा, क्योंकि इसका समाधान केंद्र सरकार और संबंधित राज्यों के हाथों में है।”

याचिकाकर्ता मोनिका अग्रवाल ने कहा कि सार्वजनिक सड़कों को यातायात के लिए सुगम बनाए रखने के लिए शीर्ष अदालत द्वारा पारित विभिन्न निर्देशों के बावजूद उनका पालन नहीं किया गया है। याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता के सिंगल मदर होने के कारण उसे नोएडा से दिल्ली की यात्रा करना दूभर हो गया है।

बता दें कि शीर्ष अदालत के समक्ष दायर एक हलफनामे में यूपी सरकार ने कहा है कि वह किसानों को यह समझाने की कोशिश कर रही है कि सुप्रीम कोर्ट के पहले के फैसलों के अनुसार सड़कों को अवरुद्ध करके विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं है। हलफनामे में यह भी कहा गया है कि किसानों द्वारा सड़कों को अवरुद्ध करने के अवैध कार्य को समझाने की कोशिश की जा रही है। कोर्ट ने केंद्र और यूपी सरकार को इस मुद्दे की जाँच करने और समाधान के साथ कोर्ट को वापस रिपोर्ट करने का समय दिया है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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