Homeदेश-समाज53 साल के बलात्कारी को सुप्रीम कोर्ट ने दी 'बच्चों वाली सजा', कहा- अपराध...

53 साल के बलात्कारी को सुप्रीम कोर्ट ने दी ‘बच्चों वाली सजा’, कहा- अपराध के समय वह 16 साल का था, अधिकतम 3 साल सुधार गृह में रह सकता है: सजा खत्म कर मामला किशोर बोर्ड को भेजा

जिला जज से रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट हो गया कि आरोपित उस समय 16 वर्ष का था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने जिला अदालत और राजस्थान हाई कोर्ट द्वारा इस व्यक्ति को सुनाई गई सजा और उनके मामले को रद्द कर दिया। राजस्थान हाई कोर्ट ने उस व्यक्ति को 5 वर्ष की सजा सुनाई थी।

सुप्रीम कोर्ट से रेप एक एक दोषी को 37 वर्षों के बाद राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने जहाँ उसको रेप के मामले में दोषी ठहराया जाना सही माना है तो वहीं उसकी सजा खारिज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने पाया है कि उसने 1988 में जब यह अपराध किया था, तब वह नाबालिग था।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जस्टिस BR गवई और जस्टिस ऑगस्टाइन जॉर्ज मसीह की पीठ ने 53 साल के इस आरोपित की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका दायर होने के बाद उसकी उम्र को लेकर जिला जज से एक रिपोर्ट माँगी थी।

जिला जज से रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट हो गया कि आरोपित उस समय 16 वर्ष का था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने जिला अदालत और राजस्थान हाई कोर्ट द्वारा इस व्यक्ति को सुनाई गई सजा और उनके मामले को रद्द कर दिया। राजस्थान हाई कोर्ट ने उस व्यक्ति को 5 वर्ष की सजा सुनाई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को आगे किशोर न्याय बोर्ड के पास भेज दिया है, ताकि सजा पर फैसला लें। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 53 वर्षीय शख्स को किशोर न्याय बोर्ड के सामने पेश होने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कोई भी व्यक्ति अपराध के समय नाबालिग होने का दावा कभी भी उठा सकता है।

क्या था मामला?

दरअसल आरोपित ने 17 नवंबर 1988 को राजस्थान के अजमेर जिले में 11 साल की बच्ची के साथ रेप किया था। उस समय निचली अदालत ने उसे धारा 342 (गलत तरीके से बंधक बनाना) और धारा 376 (बलात्कार) के तहत दोषी ठहराया था और तीन साल की जेल की सजा सुनाई थी।

राजस्थान हाई कोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा और उसे सजा सुना दी। हालाँकि, वह सुप्रीम कोर्ट पहुँचा और फिर उसकी उम्र 7 नवंबर, 1988 को 16 वर्ष, 2 महीने और 3 दिन थी, यानी उस दौरान वह नाबालिग था। हालाँकि, कोर्ट ने उसे दोषी नहीं मानने की दलील नहीं मानी।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

एक सैनिक, एक लॉन्चर और दुश्मन के टैंक पर अंतिम प्रहार: DRDO की स्वदेशी MPATGM को मिली हरी झंडी, जानें- कितनी ताकतवर है यह...

52 हजार करोड़ के रक्षा प्रस्तावों को मंजूरी। MPATGM समेत कई स्वदेशी हथियार भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की क्षमता बढ़ाएँगे।

स्किन-केयर बिजनेस में पाकिस्तानी दे रहे इंसानी गर्भनाल से सहयोग, चीन से वियतनाम तक फैला था गिरोह: जानिए एंटी-एजिंग और कॉस्मेटिक उत्पादों में कैसे...

पाकिस्तान में अवैध रूप से इंसानी गर्भनाल प्रोसेस कर विदेश भेजने वाले रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है, जहाँ अस्पतालों से प्लेसेंटा खरीदा जाता था।
- विज्ञापन -