Wednesday, May 12, 2021
Home देश-समाज 'पहले कानूनों को निरस्त करें, फिर करेंगे बात': सुप्रीम कोर्ट की कमेटी से भी...

‘पहले कानूनों को निरस्त करें, फिर करेंगे बात’: सुप्रीम कोर्ट की कमेटी से भी किसान संगठनों ने बनाई दूरी

सुप्रीम कोर्ट ने तीन नए कानूनों पर रोक के संकेत दिए थे। साथ ही कहा था कि अगर केंद्र सरकार जिम्मेदारी दिखाते हुए इसे रोकने का आश्वासन देती है तो वह एक समिति बना कर इसे देखने को कहेगा।

तीन नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान संगठनों का अड़ियल रवैया केंद्र सरकार के साथ बातचीत में भी कई बार सामने आ चुका है। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले भी उन्होंने अपने इसी रवैए का प्रदर्शन किया है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सोमवार शाम किसान संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित की जाने वाली समिति से बातचीत करने से इनकार कर दिया। इससे पहले शीर्ष अदालत ने तीनों कृषि कानूनों पर रोक के संकेत दिए थे।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा था कि अगर उसने कृषि कानूनों पर रोक नहीं लगाई, तो उसे खुद ये काम करना होगा। सर्वोच्च न्यायालय ने तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए ये टिप्पणी की। इन याचिकाओं पर CJI एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह इस मामले से निपटने के सरकार के तौर-तरीकों से निराश है। पूरे मामले पर कोर्ट अपना फैसला मंगलवार (12 जनवरी 2020) को सुना सकता है।

इस बीच केंद्र सरकार की ओर से अदालत में हलफनामा दायर किया गया है। इसमें कहा गया है कि कृषि कानूनों को उन्होंने जल्दबाजी में नहीं बनाया, बल्कि यह दो दशकों से हो रहे विचार-विमर्श का परिणाम है। हलफनामे में इस बात का भी जिक्र है कि नए कानूनों से देश के किसान खुश हैं, क्योंकि इसमें उन्हें विकल्प दिए गए हैं। साथ ही केंद्र ने यह भी कहा है कि उसने अपनी ओर से किसानों से जुड़ने का पूरा प्रयास किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से पूछा था कि वो इन कृषि कानूनों पर रोक क्यों नहीं लगा रहे? उन्होंने कहा कि अगर केंद्र सरकार जिम्मेदारी दिखाते हुए इसे रोकने का आश्वासन देती है तो सुप्रीम कोर्ट एक समिति बना कर इसे देखने को कहेगा। तब तक इसे रोक कर रखा जाए।

लेकिन, अब मीडिया खबरों के अनुसार संयुक्त किसान मोर्चा ने सोमवार देर शाम एक बयान जारी करके ऐलान किया है कि वो सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित किसी कमेटी से भी बात नहीं करेगा। मोर्चा ने अपने बयान में कहा है कि उसे कृषि कानूनों को वापस लेने से कम कोई शर्त मँजूर नहीं है और कानूनों की वापसी से पहले उसे किसी बातचीत में दिलचस्पी नहीं है।

बयान में संगठन की ओर कहा गया, “हम सुप्रीम कोर्ट से नियुक्त होने वाली कमेटी की किसी कार्यवाही में शामिल होना नहीं चाहते। पहले कानूनों को निरस्त कीजिए, फिर हम बात करेंगे।”

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

ऑक्सीजन पर लताड़े जाने के बाद केजरीवाल सरकार ने की Covid टीकों की उपलब्धता पर राजनीति: बीजेपी ने खोली पोल

पत्र को करीब से देखने से यह स्पष्ट होता है कि संबित पात्रा ने जो कहा वह वास्तव में सही है। पत्रों में उल्लेख है कि दिल्ली में केजरीवाल सरकार 'खरीद करने की योजना' बना रही है। न कि ऑर्डर दिया है।

‘#FreePalestine’ कैम्पेन पर ट्रोल हुई स्वरा भास्कर, मोसाद के पैरोडी अकाउंट के साथ लोगों ने लिए मजे

स्वरा के ट्वीट का हवाला देते हुए @TheMossadIL ने ट्वीट किया कि अगर इस ट्वीट को स्वरा भास्कर के ट्वीट से अधिक लाइक मिलते हैं, तो वे भारतीय अभिनेत्री को एक स्पेशल ‘पॉकेट रॉकेट’ भेजेंगे।

स्वप्ना पाटकर के ट्वीट हटाने के लिए कोर्ट पहुँचे संजय राउत: प्रताड़ना का आरोप लगा PM को भी महिला ने लिखा था पत्र

संजय राउत ने उन सभी ट्वीट्स को हटाने का निर्देश देने की गुहार कोर्ट से लगाई है जिसमें स्वप्ना पाटकर ने उन पर आरोप लगाए हैं।

उद्धव ठाकरे की जाएगी कुर्सी, शरद पवार खुद बनना चाहते हैं CM? रिपोर्ट से महाराष्ट्र सरकार के गिरने के कयास

बताया जा रहा है कि उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाकर अब शरद पवार पछता रहे हैं। उन्हें यह 'भारी भूल' लग रही है।

बंगाल के नतीजों पर नाची, हिंसा पर होठ सिले: अब ममता ने मीडिया को दी पॉजिटिव रिपोर्टिंग की ‘हिदायत’

विडंबना यह नहीं कि ममता ने मीडिया को चेताया है। विडंबना यह है कि उनके वक्तव्य को छिपाने की कोशिश भी यही मीडिया करेगी।

मोदी से घृणा के लिए वे क्या कम हैं जो आप भी उसी जाल में उलझ रहे: नैरेटिव निर्माण की वामपंथी चाल को समझिए

सच यही है कि कपटी कम्युनिस्टों ने हमेशा इस देश को बाँटने का काम किया है। तोड़ने का काम किया है। झूठ को, कोरे-सफेद झूठ को स्थापित किया है।

प्रचलित ख़बरें

योगेंद्र यादव को पता था कि ‘किसानों’ के टेंट में हुआ है गैंगरेप, AAP के दो नेता भी आरोपित: टिकरी बॉर्डर पर हुई थी...

दैनिक भास्कर के मुताबिक योगेंद्र यादव को इस घटना के बारे में पता था, लेकिन उन्होंने पुलिस को जानकारी नहीं दी।

मुस्लिम वैज्ञानिक ‘मेजर जनरल पृथ्वीराज’ और PM वाजपेयी ने रचा था इतिहास, सोनिया ने दी थी संयम की सलाह

...उसके बाद कई देशों ने प्रतिबन्ध लगाए। लेकिन वाजपेयी झुके नहीं और यही कारण है कि देश आज सुपर-पावर बनने की ओर अग्रसर है।

हिंदू त्योहार ‘पाप’, हमारी गलियों से नहीं निकलने दें जुलूस: मुस्लिम बहुल इलाके की याचिका, मद्रास HC का सॉलिड जवाब

मद्रास हाई कोर्ट ने धार्मिक असहिष्णुता को देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने के लिए खतरनाक बताया। कोर्ट ने कहा कि त्योहारों के आयोजन...

‘इस्लाम को रियायतों से आज खतरे में फ्रांस’: सैनिकों ने राष्ट्रपति को गृहयुद्ध के खतरे से किया आगाह

फ्रांसीसी सैनिकों के एक समूह ने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को खुला पत्र लिखा है। इस्लाम की वजह से फ्रांस में पैदा हुए खतरों को लेकर चेताया है।

फराह खान ने खुलेआम की मोदी समर्थकों की मौत की कामना- माँगी दुआ, पहले भी कर चुकी हैं RSS की ISIS से तुलना

"मैं दुआ करती हूँ कि तुम्हारा कोई परिजन मरे ताकि तुम्हें वो गुस्सा महसूस हो जो कुप्रबंधन और सत्ता की भूखे एजेंडे के कारण अपनों को न बचा पाने की वजह से पैदा होता है।"

हिन्दुओ… इस आदेश को रट लो, क्योंकि यह केवल एक गाँव-एक प्रांत की समस्या नहीं

ऐसे हालात में अमूमन हिंदू मन मसोस रह जाते हैं। अब इससे इतर मद्रास हाई कोर्ट ने एक रास्ता दिखाया है।
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

295,392FansLike
92,425FollowersFollow
394,000SubscribersSubscribe