Saturday, December 4, 2021
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‘अश्लीलता और पोर्नोग्राफी भी दिखाते हैं’: सुप्रीम कोर्ट ने ‘तांडव’ मामले में कहा- रिलीज से पहले हो स्क्रीनिंग

"हमारा विचार है कि कुछ स्क्रीनिंग होनी चाहिए। वास्तव में कुछ प्लेटफॉर्म पोर्नोग्राफ़ी भी दिखाते हैं।"

सुप्रीम कोर्ट ने अमेजन प्राइम वीडियो (Amazon Prime Video) की कंटेंट हेड अपर्णा पुरोहित की याचिका पर सुनवाई की। वेब सीरीज ‘तांडव’ में हिंदू देवी-देवताओं के अपमान के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद अपर्णा ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। इस दौरान अदालत ने अश्लीलता और पोर्नोग्राफी दिखाए जाने की बात कहते हुए कहा कि ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म पर रिलीज से पहले कंटेंट की स्क्रीनिंग होनी चाहिए।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार जस्टिस अशोक भूषण की पीठ ने कहा, “वास्तव में कुछ प्लेटफॉर्म अश्लीलता भी दिखाते हैं।” पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को नए सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 को प्रसारित करने का निर्देश भी दिया। इसे पिछले सप्ताह अधिसूचित किया गया था।

सुनवाई के दौरान अपर्णा पुरोहित की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि यह चौंकाने वाला मामला है। याचिकाकर्ता अमेजन में काम करती हैं फिर भी उन्हें निर्माता और अभिनेता के साथ आरोपित बनाया गया है। जबकि कंपनी अभियुक्त नहीं है। रोहतगी ने कहा कि ऐसा करने वाले लोग प्रचार के इच्छुक हैं।

पीठ ने पूछा, “पारंपरिक फिल्म देखना पुराना हो गया है। इंटरनेट पर सिनेमा देखना आम हो गया है। हमारा सवाल यह है कि इनको स्क्रीन किया जाए?” जवाब में वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने बताया कि ओटीटी प्लेटफार्मों के कंटेंट की निगरानी के लिए नियम बनाए गए हैं। इसके लिए एक बोर्ड का गठन किया जाएगा।

पीठ ने इन नियमों को प्रसारित करने का निर्देश देते हुए कहा, “हमारा विचार है कि कुछ स्क्रीनिंग होनी चाहिए। वास्तव में कुछ प्लेटफॉर्म पोर्नोग्राफ़ी भी दिखाते हैं।”

इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 25 फरवरी को 20 पन्नों के आदेश में कहा था कि कई फिल्मों में हिंदू देवी-देवताओं के नाम का इस्तेमाल कर उन्हें अपमानजनक तरीके से दिखाया गया है। कोर्ट ने राम तेरी गंगा मैली, सत्यम शिवम सुंदरम, पीके, ओह माय गॉड जैसी कुछ फिल्मों के नाम भी लिए थे। साथ ही कहा था, “ऐतिहासिक और पौराणिक व्यक्तित्वों (पद्मावती) की छवि को नष्ट करने का प्रयास किया गया है। धन कमाने के लिए बहुसंख्यक समुदाय की आस्थाओं और प्रतीकों का इस्तेमाल किया गया है (गोलियों की रासलीला राम लीला)।” हाई कोर्ट ने कहा था कि हिंदी फिल्म उद्योग में यह प्रवृत्ति बढ़ रही है और समय रहते इस पर अंकुश लगाने की जरूरत है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले अमेजन प्राइम ने ‘तांडव’ को लेकर माफी माँगी थी। आधिकारिक बयान में कहा गया था, “अमेजन प्राइम वीड‍ियो को अत्यंत खेद है कि दर्शकों को हाल ही में लॉन्च की गई काल्पनिक सीरीज तांडव के कुछ दृश्य आपत्तिजनक लगे। किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना हमारा ध्येय नहीं था, और इस बात से अवगत कराए जाने पर, उन आपत्तिजनक दृश्यों को या तो हटा दिया गया या फिर संपादित किया गया। हम अपने दर्शकों की विविध आस्थाओं का सम्मान करते हैं और उन दर्शकों से क्षमा याचना करते हैं, जिन्हें ठेस पहुँची है।”

इस वेब सीरिज को लेकर सोशल मीडिया में दर्शकों ने सीधे आरोप लगाया था कि इसमें भगवान शिव और भगवान राम का अपमान किया गया है। इसके बाद इसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराते हुए केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से ‘तांडव’ को बैन करने की अपील की गई थी। 17 जनवरी 2021 (रविवार) को केंद्रीय सूचना मंत्रालय ने अमेजन प्राइम वीडियो के अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब माँगा था

विवाद के बाद वेब सीरिज के मेकर्स ने भी स्टेटमेंट जारी कर माफी माँगी थी और कहा था कि वे जल्द ही सीरीज में बदलाव करेंगे। सीरीज के डायरेक्टर अली अब्बास जफर ने ट्वीट कर कहा था, “हमारे मन में देश के लोगों की भावनाओं के प्रति बहुत सम्मान है। हमारा इरादा किसी व्यक्ति, जाति, समुदाय, नस्ल, धर्म, धार्मिक समुदाय, राजनीतिक दल, जीवित या मृत व्यक्ति की भावनाओं को चोट पहुँचाना नहीं था। तांडव के कास्ट और क्रू ने सीरीज के कंटेंट में बदलाव करने का फैसला लिया है।” हाल ही में इसको लेकर अमेजन अमेज़न प्राइम की नेशनल हेड अपर्णा पुरोहित से यूपी पुलिस ने लंबी पूछताछ की थी।

 

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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