Thursday, June 20, 2024
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‘झाँसा देकर पहले करवाया धर्मांतरण, फिर किया निकाह… बच्चा होने पर छोड़कर भागा’: लव जिहाद पीड़िता ने सुनाई ‘बचपन के दोस्त’ की करतूत

बेल्ला ने खुलासा करते हुए कहा है कि जब वह तर्बियत गई थीं तो वहाँ पहले से ही 20 लड़कियाँ मौजूद थीं। सभी को उनकी ही तरह शिकार बनाकर यहाँ लाया गया था। तर्बियत से वापस आने के बाद उन्होंने शाहजहाँ से निकाह कर लिया, लेकिन उनके पास इसका न तो कोई सबूत है और न ही कोई कागजात।

लड़कियों को फँसाकर उनका धर्मांतरण कराना और फिर उन्हें आतंकी संगठनों की ‘सेक्स स्लेव’ बनाना इस्लामी कट्टरपंथियों की साजिश का हिस्सा है। इस मुद्दे पर बनी फिल्म ‘द केरला स्टोरी’ (The Kerala Story) की हर तरफ चर्चा है। इस बीच लव जिहाद की शिकार हुई एक लड़की ने कट्टरपंथियों की साजिश का चिट्ठा खोला है।

इस्लामवादियों के लव जिहाद और धर्मांतरण षड्यंत्र का शिकार हुई पीड़िता का नाम बेल्ला है। वह केरल के कोझीकोड जिले के कन्नौद की रहने वाली हैं। बेल्ला ईसाई धर्म को मानती हैं। एबीपी न्यूज से हुई बातचीत में उन्होंने आपबीती सुनाई है। उन्होंने जिस लड़के ने उन्हें अपना शिकार बनाया, वह उनका बचपन का दोस्त था। दोनों स्कूल में साथ पढ़ते थे।

बेल्ला ने कहा है कि उसके दोस्त ने उसका ब्रेनवॉश किया और धर्मांतरण के लिए तैयार कर लिया। धर्मांतरण के बाद वह शाहीना बना दी गई थीं। इन सबके पीछे उनका बचपन का दोस्त शाहजहाँ था, जो बाद में उनका शौहर भी बना। बेल्ला कहती हैं कि शाहजहाँ ऐसे बात करता था कि कोई भी लड़की उसके झाँसे में आ जाती।

बेल्ला कहा है कि शाहजहाँ के साथ रिलेशनशिप में आने के बाद वह उसके झाँसे में आ गईं। शाहजहाँ ने उन्हें इस्लामी रहन-सहन और महजब मे शिक्षा दिलाने के लिए साल 2015 में तर्बियतउल इस्लाम सभा (इस्लामी सेंटर) में ले गया। उस दौरान शाहजहाँ ने बेल्ला से कहा कि अगर तर्बियत में कोई पूछे तो कहना कि वह अपनी मर्जी से इस्लाम कबूल करना चाहती है।

बेल्ला ने आगे कहा है कि यदि वह यह कह देतीं कि इस्लाम अपनाना उनकी मर्जी नहीं तो उन्हें तर्बियत में रहने नहीं दिया जाता। इसलिए उन्होंने वही किया, जो उन्हें शाहजहाँ ने कहा था। तर्बियत में उन्हें इस्लाम अपनाने को लेकर शिक्षा दी गई और फिर शहादत का कलमा पढ़वाया गया। इसके बाद सभी लोगों को सिर से लेकर पाँव तक नहलाया गया। इसके बाद उन्हें कहा गया कि वह मुस्लिम बन गई हैं।

बेल्ला बताती हैं कि तर्बियत में आए सभी लोगों को 2 महीनों तक वहाँ रहना पड़ता। इस दौरान उन्हें इस्लाम का पूरा इतिहास पढ़ाया जाता। नमाज से लेकर निस्कारा तक के बारे में उन्हें हर चीज सिखाई गई। बेल्ला ने बताया कि वह तर्बियत में 2 महीने नहीं रहीं, बल्कि 1 ही सप्ताह में वापस आ गईं। इसमें उन्हें फातिहा, निस्कारा के साथ 5 तरह की नमाज पढ़ने के बारे में सिखाया गया।

बेल्ला ने कहा है कि सुहबी (फजर)… जोहर, असर, मगरिब, इशा की नजाम पढ़नी होती थी। सुहबी दो बार पढ़नी होती थी। जोहर चार बार, असर चार बार, मगरिब तीन बार और इशा चार बार पढ़नी होती थी। इसी तरह निस्कारा करना होता था। बेल्ला ने कहा है कि जब वह तर्बियत में थीं, तब शाहजहाँ उनके साथ नहीं था।

बेल्ला ने खुलासा करते हुए कहा है कि जब वह तर्बियत गई थीं तो वहाँ पहले से ही 20 लड़कियाँ मौजूद थीं। सभी को उनकी ही तरह शिकार बनाकर यहाँ लाया गया था। तर्बियत से वापस आने के बाद उन्होंने शाहजहाँ से निकाह कर लिया, लेकिन उनके पास इसका न तो कोई सबूत है और न ही कोई कागजात।

इसके कुछ दिन बाद जब उनकी डिलीवरी हुई तो उन्हें पता चला कि वह शाहजहाँ की पहली नहीं, बल्कि 4 बीवी थीं। हालाँकि इसके बाद साल 2022 में शाहजहाँ उन्हें छोड़कर चला गया। यह सब तब हुआ, जब उनकी शादी के 7 साल पूरे हो चुके थे। बेल्ला ने बताया कि वह अपने बच्चे और अपनी माँ के साथ रह रही हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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