Thursday, July 29, 2021
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त्रिपुरा के मंदिरों में बलि पर रोक: खत्म होगी शक्ति पीठ माता त्रिपुरेश्वरी मंदिर की 500 साल पुरानी परंपरा?

"राज्य सरकार सहित किसी भी व्यक्ति को त्रिपुरा राज्य स्थित मंदिरों में किसी भी पशु/पक्षी की बलि देने की अनुमति नहीं दी जाएगी। भक्त चाहें तो मंदिर में बकरे का दान कर सकते हैं लेकिन उसकी बलि नहीं दे सकते।"

त्रिपुरा हाईकोर्ट ने शुक्रवार (27 सितंबर) को राज्य में हिन्दू मंदिरों में पशु बलि पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया। हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद प्रसिद्ध शक्ति पीठ माता त्रिपुरेश्वरी मंदिर में 500 साल पुरानी परम्परा के तहत प्रतिदिन दी जाने वाली बलि पर भी रोक लग जाएगी। दरअसल राज्य सरकार की ओर से हर दिन एक बलि यहाँ दी जाती रही है, जो यहाँ की परंपरा है।

हाई कोर्ट में अपनी दलील देते हुए राज्य सरकार ने भारत के साथ विलय के समझौते के नियमों और शर्तों का हवाला दिया। इसमें कहा गया था कि सरकार पारम्परिक तरीके से माता त्रिपुरेश्वरी व अन्य मंदिरों में पूजा करेगी। पशु बलि के पक्ष में यह तर्क दिया गया कि पशु बलि का अनुसरण स्वतंत्रता से पहले, महाराजा के शासनकाल से चली आ रही है। साथ ही यह भी कहा गया कि घरेलू तौर पर दी गई पशु बलि पूजा करने का एक अभिन्न अंग रहा है, तो इसे रोका कैसे जा सकता है?

मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायमूर्ति अरिंदम लोध की पीठ ने अपने 72-पृष्ठ के फ़ैसले में कहा,“अन्य मंदिरों के अनुरूप ही त्रिपुरेश्वरी मंदिर की नियमित गतिविधियों में सरकार की भूमिका सीमित है, और सरकारी धन से प्रत्येक दिन एक बकरे की बलि देने के लिए धन के साथ मंदिर का निर्माण करना धर्मनिरपेक्ष गतिविधि के दायरे में नहीं आता है, जैसा कि संविधान के अनुच्छेद 25 (2) (क) के तहत प्रदान किया गया है।”

आदेश में कहा गया,

“समाज में सुधार लाने के लिए सभी गलत प्रथाओं का उन्मूलन करके परिवर्तन लाना राज्य का कर्तव्य है। इस तरह की प्रथाओं में भाग लेने के बजाय, राज्य को मंदिरों में पशुओं की बलि पर प्रतिबंध लगाने वाला क़ानून बनाना चाहिए क्योंकि यह सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के ख़िलाफ़ है।”

न्यायमूर्ति करोल ने पीठ के लिए निर्णय लिखते हुए कहा,

“जब तक यह आवश्यक न हो, धर्म के लिए पशु की बलि एक नैतिक कार्य नहीं माना जा सकता है। सभी धर्म दया का आह्वान करते हैं और किसी भी धर्म को हत्या की आवश्यकता नहीं है। मंदिर में पशुओं की बलि, जो कि चिंता का विषय है, गंभीर व नैतिक रूप से ग़लत है, क्योंकि यह अवैध रूप से किसी के जीवन को छीनने जैसा है।”

उन्होंने कहा, “राज्य सरकार सहित किसी भी व्यक्ति को त्रिपुरा राज्य स्थित मंदिरों में किसी भी पशु/पक्षी की बलि देने की अनुमति नहीं दी जाएगी। भक्त चाहें तो मंदिर में बकरे का दान कर सकते हैं लेकिन उसकी बलि नहीं दे सकते।”

ख़बर के अनुसार, पीठ ने राज्य के सभी ज़िलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को आदेश के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। साथ ही राज्य के मुख्य सचिव को राज्य के दो प्रमुख मंदिरों – देवी त्रिपुरेश्वरी मंदिर और चतुरदास देवता मंदिर में तुरंत सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्देश दिया। यहाँ परंपरागत तौर पर बड़ी संख्या में पशुओं की बलि दी जाती है। पीठ ने आदेश दिया कि मुख्य सचिव को हर महीने सीसीटीवी कैमरों की वीडियो रिकॉर्डिंग प्राप्त करनी होगी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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