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UP में 130 अवैध मस्जिद-मदरसों पर चला CM योगी का बुलडोजर, 198 सील: नेपाल से सटे 7 जिलों में 60 दिन में हुई कार्रवाई, जाँच में निकला- खाड़ी देशों से मिल रही थी करोड़ों की फंडिंग

योगी सरकार ने नेपाल सीमा से सटे सात जिलों में 298 अवैध मजहबी ढाँचों को चिन्हित कर 130 ढाँचे ध्वस्त किए। करोड़ों की संदिग्ध विदेशी फंडिंग और जनसंख्या बदलाव की जाँच जारी है।

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने नेपाल सीमा से सटे सात जिलों में अवैध मजहबी ढाँचों के खिलाफ अभियान चलाया है। बीते 60 दिनों में सरकार ने श्रावस्ती, बलरामपुर, बहराइच, सिद्धार्थनगर, महराजगंज, पीलीभीत और लखीमपुर खीरी जैसे जिलों में 298 अवैध मस्जिद, मदरसे, मजार और ईदगाह चिन्हित किए।

इनमें से 223 को नोटिस जारी किए गए, 198 को सील करते हुए 130 ढाँचों को पूरी तरह समतल कर दिया गया। ये कार्रवाई सिर्फ अवैध कब्जों के खिलाफ नहीं, बल्कि विदेशी फंडिंग, धर्मांतरण और डेमोग्राफिक बदलाव की आशंकाओं के चलते की जा रही है।

इन इलाकों में मस्जिदों और मदरसों की संख्या में तेजी से बढ़ती जा रही है, संदिग्ध फंडिंग और जनसंख्या संतुलन में बदलाव सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बन चुका है।

जिलेवार कार्रवाई और आँकड़े: कौन सा जिला सबसे आगे?

योगी सरकार की सबसे सख्त कार्रवाई श्रावस्ती जिले में हुई जहाँ 149 अवैध निर्माण चिन्हित किए गए, जिनमें से 140 को सील किया गया और 37 को गिराया गया। इसके बाद महराजगंज में 45 अवैध निर्माण पाए गए, जिनमें से 24 सील और 31 ध्वस्त किए गए।

बलरामपुर में 41 निर्माण चिन्हित हुए, जिनमें 19 को सील और 21 को ढहाया गया। सिद्धार्थनगर में 23 अवैध निर्माणों में से 21 को ध्वस्त किया गया, वहीं बहराइच में 25 चिन्हित में से 15 को गिरा दिया गया। लखीमपुर खीरी में 13 अवैध निर्माण का पता चला, जिनमें 10 को सील किया गया और 3 गिराए गए।

पीलीभीत में 2 अवैध निर्माण चिन्हित हुए और दोनों पर सीधा बुलडोजर चला। इन सात जिलों की कुल 570 किलोमीटर लंबी सीमा नेपाल से जुड़ी है, जो संवेदनशील मानी जाती है। इस कार्रवाई से पहले सभी ढाँचों को नोटिस देकर कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई थी।

विदेशी फंडिंग, डेमोग्राफिक बदलाव और राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरा

आयकर विभाग और गृह मंत्रालय की रिपोर्टों ने खुलासा किया है कि नेपाल सीमा से सटे इलाकों में मजहबी ढाँचों के निर्माण के लिए दक्षिण भारत (खासकर तमिलनाडु) और खाड़ी देशों से करोड़ों रुपए की फंडिंग हुई है।

यह फंडिंग नकद और UPI जैसे डिजिटल माध्यमों से की गई, जिसमें एक मामले में एक व्यक्ति के खाते में 12 करोड़ रुपए पाए गए। रिपोर्टों में लगभग 150 करोड़ रुपए की संदिग्ध फंडिंग का पता चला है, जिसका इस्तेमाल मस्जिदों, मदरसों और मजारों के निर्माण व धर्मांतरण में किया गया।

इसके साथ ही सीमा के आसपास के गाँवों में मुस्लिम आबादी में तेजी से बढ़ोतरी और हिंदू आबादी में गिरावट देखी गई है। SSB की रिपोर्ट बताती है कि 2018 से 2021 के बीच मस्जिदों की संख्या 738 से बढ़कर 1000 और मदरसों की संख्या 500 से बढ़कर 645 हो गई।

नेपाल की ओर भी इसी तरह मुस्लिम आबादी 20 साल में दोगुनी हो चुकी है। उत्तराखंड के सीमावर्ती जिले पिथौरागढ़, चम्पावत और ऊधमसिंह नगर भी अब इस खतरे से अछूते नहीं हैं। इन सारी गतिविधियों को देखते हुए यह आशंका गहराई है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में एक ‘मुस्लिम पट्टी’ बसाने की कोशिश की जा रही है, जो बांग्लादेश से शुरू होकर पाकिस्तान तक फैले एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकती है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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