Sunday, April 21, 2024
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CM योगी ने कासगंज के शूकर क्षेत्र सोरों को घोषित किया तीर्थ क्षेत्र, भगवान विष्णु के तीसरे अवतार वराह की इस निर्वाण स्थली का पुराणों में भी है जिक्र

विभिन्न पुराणों में इसका महत्व बताया गया है। माना जाता है कि सूकर क्षेत्र सोरों भगवान विष्णु के तीसरे अवतार श्री वराह भगवान की निर्वाण स्थली है। सोरों सूकर क्षेत्र के अन्तर्गत जो कुंड (हरिपदी गंगा) है, यह वही स्थान है, जहाँ भगवान श्री वराह ने स्वर्गारोहण किया था।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार (28 अक्टूबर 2021) को शूकर क्षेत्र सोरों के निवासियों को दीपावली का तोहफा दिया है। मुख्यमंत्री ने ब्रज क्षेत्र के सूकर क्षेत्र सोरों को तीर्थस्थल घोषित कर दिया है। यह जनपद कासगंज में स्थित हैं। इसे तीर्थस्थल घोषित करने की माँग काफी दिनों से चल रही थी। प्रदेश सरकार ने बयान जारी कर कहा कि इस निर्णय से तीर्थ की ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित किया जा सकेगा और विकास के साथ-साथ स्थानीय निवासियों को रोजगार के नए साधन भी उपलब्ध होंगे। गुरुवार को मुख्यमंत्री कार्यालय ने ट्वीट कर इस संबंध में जानकारी दी।

तीर्थ स्थल के रूप में इस प्राचीन एवं पवित्र तीर्थ को संरक्षण मिलने से उसके अन्तर्गत आने वाले अनेकों छोटे-छोटे तीर्थों के जीर्णोद्धार में सुगमता होगी। साथ ही चक्रतीर्थ, योगतीर्थ, सूर्यतीर्थ, सोमतीर्थ एवं साकोटकतीर्थ आदि को भी लाभ होगा। यही नहीं, सोरों सूकर क्षेत्र के तीर्थ स्थल घोषित होने से विकास के साथ-साथ स्थानीय निवासियों को रोजगार के नए साधन भी उपलब्ध होंगे। लंबे समय से संत-महात्माओं और विभिन्न संगठनों की ओर से सूकर क्षेत्र सोरों को तीर्थस्थल घोषित करने की माँग की जा रही थी, जिसे योगी सरकार ने पूरा कर दिया।

भगवान वराह की स्वर्गारोहण स्थली है सूकर क्षेत्र सोरों 

ब्रजक्षेत्र स्थित सूकर क्षेत्र, सोरों, जनपद कासगंज भारत का आदितीर्थ है। विभिन्न पुराणों में इसका महत्व बताया गया है। माना जाता है कि सूकर क्षेत्र सोरों भगवान विष्णु के तीसरे अवतार श्री वराह भगवान की निर्वाण स्थली है। सोरों सूकर क्षेत्र के अन्तर्गत जो कुंड (हरिपदी गंगा) है, यह वही स्थान है, जहाँ भगवान श्री वराह ने स्वर्गारोहण किया था। तभी से इस कुंड में मृत्यु के पश्चात अस्थियों का विसर्जन किया जाता है। सूकर क्षेत्र सोरों को मोक्ष प्रदान करने वाला तीर्थ माना जाता है।

तीर्थ स्थल का दर्जा मिलने पर लाभ 

  • तीर्थ की ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण।
  • तीर्थ के महत्वपूर्ण प्राचीन धार्मिक स्थलों का जीर्णोद्धार।
  • तीर्थयात्रियों-पर्यटकों के लिए आवश्यक मूलभूत सुविधाओं का विकास।
  • हर की पौड़ी के घाट आदि का विकास।
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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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