उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर हलाल सर्टिफिकेशन को लेकर सरकार का रुख साफ किया। सीएम योगी ने कहा कि हलाल सर्टिफिकेशन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। उन्होंने कहा, “सामान खरीदते समय हलाल सर्टिफिकेट जरूर चेक करें। इसके नाम पर साजिश चल रही है। हलाल के नाम पर आतंकवाद के लिए पैसे जुटाए जाते हैं। इसका इस्तेमाल धर्मांतरण और लव जिहाद के लिए होता है।”
सीएम योगी ने ये बात गोरखपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी समारोह के तहत विचार-परिवार कुटुम्ब स्नेह मिलन कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा, “आपको आश्चर्य होगा कि साबुन और कपड़ों का भी हलाल। दियासलाई का भी हलाल। मैं भौचक था।मैंने कहा कि ये तो कडयंत्र है। मैंने कहा कि माचिस तो झटका वाला है, आप एक झटके में लगाएँगे, तभी जलेगा। आप हलाल करते रहेंगे तो कभी नहीं जलेगी माचिस।”
हलाल सर्टिफिकेशन हमने यूपी में बैन किया है…
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) October 21, 2025
हलाल सर्टिफिकेशन के नाम पर एक फूटी कौड़ी भी नहीं देनी है,
यह पैसा आपके खिलाफ षड्यंत्र में जाता है… pic.twitter.com/GnWNK9SmC0
सीएम योगी ने कहा, “जब हमने कार्रवाई की तो देखा कि ₹25 हजार करोड़ देश के अंदर हलाल सर्टिफिकेशन से होता है। और भारत सरकार या राज्य सरकार की किसी भी एजेंसी ने उसे मान्यता नहीं दी है। ये सारा का सारा पैसा आतंकवाद के लिए, लव जिहाद के लिए, धर्मांतरण के लिए दुरुपयोग होता है। इसीलिए यूपी सरकार ने इसके खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। हलाल सर्टिफिकेशन के नाम पर एक फूटी-कौड़ी भी नहीं देना चाहिए।”
हलाल क्या होता है?
हलाल या झटका मीट किसी जानवर के माँस को नहीं बल्कि काटने के तरीके को कहा जाता है। हलाल सिर्फ एक अरबी शब्द है जिसका मतलब मुस्लिमों के लिए जायज होता है। यानी जायज ढंग से काटा गया जानवर ही वो लोग खा सकते हैं।
क्या है हलाल सर्टिफिकेशन?
जब किसी खाने या प्रोडक्ट को हलाल सर्टिफिकेट मिलता है तो इसका मतलब है कि उसे बनाने में कोई ऐसी चीज इस्तेमाल नहीं हुई जो इस्लाम में हराम (मना) है। अगर बात मांस की हो तो हलाल सर्टिफिकेशन तब मिलता है जब जानवर को इस्लामी तरीके से जबह किया गया हो।
भारत में जमीयत उलमा-ए-हिंद हलाल ट्रस्ट नाम की संस्था है, जो ये सर्टिफिकेशन देती है। ये लोग जाँचते हैं कि कोई प्रोडक्ट इस्लामिक नियमों के हिसाब से बना है या नहीं। जाँच में प्रोडक्ट के हर हिस्से को देखा जाता है, उसमें क्या-क्या चीजें डाली गई, उसे बनाने का तरीका क्या था, पैकिंग का तरीका आदि।
कैसे होता है जानवर हलाल
जानवर को हलाल करने का एक खास तरीका होता है। इस प्रक्रिया में छुरी से जानवर की गर्दन की नस और सांस लेने वाली नली को काटा जाता है। इस वक्त एक दुआ भी पढ़ी जाती है। गर्दन पर छुरी चलाने के बाद जानवर का पूरा खून निकलने का इंतजार किया जाता है। हलाल करने के दौरान जानवर की गर्दन को फौरन अलग नहीं किया जाता बल्कि जब जानवर मर जाता है तो उसके हिस्से किए जाते हैं। इस्लाम में इसे ‘ज़िबाह’ करना भी कहते हैं।
हलाल कानून के नियम
हलाल मीट का अर्थ केवल जानवर को उस ढंग से काटना नहीं होता बल्कि उस माँस की पैकेजिंग के भी नियम होते हैं। जैसे एक नियम होता है कि केवल एक मुस्लिम व्यक्ति ही जानवर को मार सकता है। जानवर हलाल करते हुए तेज चाकू की मदद से गर्दन की नस इस तरह काटी जाती है कि जानवर का सिर धड़ से अलग न हो। जानवर मारने के बाद उसकी नसों से अधिक से अधिक खून निकलने दिया जाता है।
इसके अलावा इस्लाम में मीट खाने का यह भी नियम है कि मुस्लिम ऐसा जानवर नहीं खा सकते हैं जो कि हलाल प्रक्रिया के अनुसार न मारा गया हो।
कौन-सी वस्तुएँ इस्लाम में ‘हराम’?
इस्लाम में कई चीजों को ‘हराम’ माना गया है, जिन्हें हलाम प्रमाण-पत्र नहीं दिया जाता है। उनमें शामिल हैं:
- सूअर, जंगली सूअर, कुत्ते और इनकी नस्लों वाले सभी जानवर
- पंजे और दाँतों से शिकार करने वाले जानवर जैसे शेर, बाघ, भालू, साँप, बंदर आदि
- शिकारी पक्षी जैसे चील, गिद्ध और इसी तरह के दूसरे पक्षी
- हानिकारक या गंदे जीव-जंतु जैसे चूहे, बिच्छू, सेंटीपीड आदि
- वो जानवर जिन्हें इस्लाम में मारना मना है, जैसे चींटी, मधुमक्खी और कठफोड़वा (लकड़हारा पक्षी) भी हराम हैं
- गंदे या घृणित कीड़े-मकोड़े जैसे जुएँ, मक्खियाँ, कीड़े और मैगॉट्स (सड़ने वाले कीड़े)
- जो जीव जमीन और पानी दोनों में रहते हैं (उभयचर) जैसे मेंढक, मगरमच्छ आदि
- घोड़े-खच्चर और घरेलू गधे
- सभी जहरीले और खतरनाक समुद्री जीव
- वो जानवर जो इस्लामी तरीके से ज़बह नहीं किए गए, उनका मांस हराम है
- जो जानवर गला घोंटने, चोट लगने, गिरने, प्राकृतिक मौत या किसी जानवर के हमले से मरे हों
- खून का सेवन
- इंसान के शरीर का कोई हिस्सा या उससे बने पदार्थ (जैसे प्लेसेंटा)
- इंसान या जानवर के शरीर से निकली चीजें जैसे पेशाब, मल, उल्टी, मवाद (पस) आदि
- नशे वाले या जहरीले पौधे, जब तक उनका जहर या हानिकारक असर पूरी तरह हटाया न जाए
- शराब और सभी तरह के मादक पेय जैसे वाइन, एथिल अल्कोहल, स्पिरिट आदि
- सभी नशे वाले और खतरनाक पेय पदार्थ
- हराम चीजों से बने फूड एडिटिव्स (खाद्य पदार्थों में मिलाए जाने वाले तत्व)
- नशे वाले या हानिकारक रसायन और प्राकृतिक खनिज
यूपी में हलाल उत्पादों पर बैन क्यों?
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने साल 2023 में हलाल-सर्टिफाइड उत्पादों पर बैन लगा दिया था। यूपी सरकार ने तय किया था कि राज्य की सीमा के भीतर हलाल उत्पादों के उत्पादन, वितरण, भण्डारण पर संपूर्ण बैन लागू हो। ये बैन 18 नवंबर 2023 से लागू है।
हलाल-सर्टिफाइड उत्पादों को बैन करने के पीछे यूपी सरकार की मंशा उपभोक्ताओं के बीच फैला भ्रम था। सरकार का कहना था कि हलाल-सर्टिफिकेशन एक अलग पंथी-प्रणाली बन गई है, जिसमें खाद्य पदार्थों के लिए पहले से मौजूद मानक और प्रक्रिया FSSAI के अलावा दूसरी जाँच प्रमाणन हो रहा था, जिससे सामान्य उपभोक्ता को भ्रम हो रहा था।
सरकार ने यह भी कहा था कि कुछ संस्थाएँ बिना मान्यता के हलाल सर्टिफिकेशन जारी कर रही थीं। इनमें अधिकतर खाद्य, दवाइयाँ और कॉस्मेटिक्स के सामान शामिल थे। सरकार ने कहा कि यह व्यापार-मानदंज और सामाजित संतुलन के लिए समस्या पैदा कर रहा था।


