Wednesday, June 19, 2024
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योगी सरकार में 6200 एनकाउंटर: मारे गए 124 अपराधी, ढेर होने वालों में 47 अल्पसंख्यक, 11 ब्राह्मण, 8 यादव

सरकार ने अपने साढ़े तीन साल के कार्यकाल में हुए कुल एनकाउंटर और उसमें मारे गए अपराधियों की जातिवार लिस्ट तैयार की है, ताकि विपक्ष के हमलों का जवाब दिया जा सके। इस लिस्ट के मुताबिक 9 अगस्त 2020 तक प्रदेश में हुए एनकाउंटर में 124 अपराधी ढेर हुए। इनमें सर्वाधिक 45 अपराधी अल्पसंख्यक हैं, जबकि 11 ब्राह्मण हैं।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में शपथ लेने के एक महीने बाद कानून व्यवस्था दुरुस्त करने को लेकर कहा था कि अगर अपराध करेंगे तो ठोक दिए जाएँगे। तीन साल गुजर जाने के बाद भी सीएम योगी का मन नहीं बदला है, वह अपने फैसले पर अडिग हैं। बताया जा रहा है कि अब तक अपराधि‍यों और पुलिस के बीच 6,200 से अधि‍क मुठभेड़ हो चुकी है जिनमें 14 हजार से अधि‍क अपराधी गिरफ्तार हुए हैं।

प्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद से अपराधियों का सफाया लगातार जारी है। बीते साढ़े तीन साल में पुलिस मुठभेड़ में 124 अपराधी मारे गए। इनमें 47 अल्पसंख्यक, 11 ब्राह्मण और 8 यादव थे। अल्पसंख्यक समुदाय के ज्यादातर अपराधी पश्चिमी यूपी के थे। वहीं, शेष 58 अपराधियों में ठाकुर, वैश्य, पिछड़े, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के बदमाश शामिल थे।

एनकाउंटर को लेकर विपक्ष के हंगामे के आसार के बीच सरकार ने सवाल के जवाब भी तैयार कर लिए हैं। दरअसल, ब्राह्मणों की हत्या और एनकाउंटर पर हमलावर विपक्ष को जवाब देने के लिए सरकार ने अपने साढ़े तीन साल के कार्यकाल में हुए कुल एनकाउंटर और उसमें मारे गए अपराधियों की जातिवार लिस्ट तैयार की है, ताकि विपक्ष के हमलों का जवाब दिया जा सके। इस लिस्ट के मुताबिक 9 अगस्त 2020 तक प्रदेश में हुए एनकाउंटर में 124 अपराधी ढेर हुए। इनमें सर्वाधिक 45 अपराधी अल्पसंख्यक हैं, जबकि 11 ब्राह्मण हैं।

31 मार्च 2017 से 9 अगस्त 2020 तक यूपी में 124 अपराधी मारे गए। पिछले 8 महीनों में 8 ब्राह्मण अपराधी ढेर हुए। इनमें से 6 अपराधी कानपुर के बिकरू कांड में शामिल विकास दुबे और उसके गुर्गे थे। सबसे ज्यादा एनकाउंटर मेरठ में हुए। मेरठ में 14 अपराधी मारे गए, मुजफ्फरनगर में 11 ,सहारनपुर में 9, आजमगढ़ में 7 और शामली में 5 अपराधी मारे गए।

डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी ने पुलिस पर विशेष वर्ग के लोगों के एनकाउंटर किए जाने के आरोप पर कहा कि इस तरह के आरोप बेबुनियाद हैं। अपराधियों की कोई जाति और धर्म नहीं होता है। पुलिस एनकाउंटर में मारे गए सभी का आपराधिक इतिहास रहा है। कई तो पुलिस कर्मियों की हत्या में शामिल थे। 

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “योगी आदित्यनाथ सरकार ने कभी भी जाति या सांप्रदायिक आधार पर अपराधियों के साथ भेदभाव नहीं किया है और भविष्य में भी ऐसा होता रहेगा।”

गौरतलब है कि विकास दुबे और राकेश पांडे के एनकाउंटर के बाद एक जाति के अपराधियों के एनकाउंटर पर विपक्ष ने सवाल उठाया था। अब सरकार इन आँकड़ों के जरिए यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि अपराधी किसी भी जाति और मजहब का हो सरकार उसके खिलाफ कार्रवाई कर रही है। माना जा रहा है कि ब्राह्मण वोट बैंक को लेकर हमलावर विपक्ष की गणित की काट के तौर पर यह लिस्ट बनाई गई है।

बता दें कि एक इंटरव्यू में बेहद बेबाकी के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था, “मैं एनकाउंटर मैन नहीं, सामान्य योगी हूँ, पर जो कानून से खिलवाड़ करेगा उसके लिए संकट आएगा। उत्तर प्रदेश में सुरक्षा हर शख्स को मिलेगी, लेकिन कानून से खिलवाड़ करने की इजाजत किसी को नहीं देंगे, कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने का दुस्साहस करेगा उसे इसकी कीमत भी चुकानी पड़ेगी।”

सीएम योगी के इस बयान के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी सरकार में हो रहे एनकाउंटर्स को फर्जी बताते हुए कहा कि ठोको नीति की वजह से उन्हीं का एनकाउंटर हो रहा है, जिनका भाजपा सरकार कराना चाहती है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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