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पुलिस और विकास दुबे के संबंधों पर वायरल हुआ लेटर नहीं पहुँचा कार्यालय, जाँच में जुटीं IG लक्ष्मी सिंह

आईजी लक्ष्मी सिंह मामले से संबंधित उस पत्र की जाँच भी कर रही हैं। जिसमें विकास दुबे के साथ पुलिस की दोस्ती के सबूत थे। दरअसल, इस पूरे प्रकरण में सोमवार को एक लेटर सामने आया था। लेटर से कई महत्तवपूर्ण बातों का खुलासा हुआ था। लेटर में विकास दुबे और पुलिस कनेक्शन को उजागर किया गया था।

कानपुर के बिकरू गाँव में 8 पुलिसकर्मियों की निर्मम हत्या मामले की जाँच में जुटी टीम के साथ अब लखनऊ की आईजी लक्ष्मी सिंह भी जुड़ चुकी हैं। इसी कड़ी में वह आज सुबह बिल्हौर स्थित सीओ दफ्तर पहुँची। यहाँ उन्होंने सीओ के सील दफ्तर की जाँच शुरू की और उनके कंप्यूटर को सील करते हुए कहा कि इसकी जाँच अब विशेषज्ञों से करवाई जाएगी।

इसके अलावा आईजी लक्ष्मी सिंह मामले से संबंधित उस पत्र की जाँच भी कर रही हैं। जिसमें विकास दुबे के साथ पुलिस की दोस्ती के सबूत थे। दरअसल, इस पूरे प्रकरण में सोमवार को एक लेटर सामने आया था। लेटर से कई महत्तवपूर्ण बातों का खुलासा हुआ था। लेटर में विकास दुबे और पुलिस कनेक्शन को उजागर किया गया था।

इस लेटर में बताया गया था कि कैसे विकास दुबे के अपराधों पर पुलिस द्वारा रवैया नर्म रखा गया। इस लेटर को लिखने वाले सीओ देवेंद्र मिश्र थे। जबकि जिनके नाम लेटर लिखा गया वह एसएसपी अनंत देव थे।

इस पत्र के वायरल होने के बाद इस मामले में जाँच शुरू हुई। जाँच में पाया गया कि यह चिट्ठी तो पुलिस कार्यालय तक पहुँची ही नहीं। यहाँ बता दें कि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस लेटर में चौबेपुर थानेदार विनय तिवारी की भूमिका संदिग्ध होने पर इशारा किया गया था।

लेटर में लिखा था कि एक दुर्दांत अपराधी के प्रति उनकी सहानुभूति सत्यनिष्ठा को संदिग्ध करती है। यदि तत्काल कार्रवाई नहीं की गई तो किसी बड़ी घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।

इस लेटर में इस बात का भी उल्लेख था कि विकास के खिलाफ दर्ज एक मुकदमे से तत्कालीन थानेदार विनय तिवारी ने वसूली के लिए धमकी की धारा 386 हटा दी थी।

गौरतलब है कि पत्र वायरल होने के बाद इस संबंध में चौबेपुर थाने के दरोगा से पूछताछ और रिकॉर्ड देखकर यह स्पष्ट हो गया था कि चिट्ठी में लिखी सभी बातें सही हैं। दरोगा ने भी यह स्वीकार किया कि थानेदार के कहने पर ही उसने मुकदमें से धारा 386 हटाई।

यहाँ बता दें, वायरल रिपोर्ट के अनुसार देवेंद्र मिश्र ने 14 मार्च को चौबेपुर थाने का निरीक्षण किया था। इस दौरान उन्हें पता चला कि 13 मार्च को विकास के खिलाफ वसूली के लिए धमकी, बलवा, मारपीट, जान से मारने की धमकी के तहत एफआईआर दर्ज हुई थी। जिसकी जाँच अजहर इशरत को सौंपी गई। लेकिन, अजहर ने अगले दिन थानेदार के कहने पर धारा हटा दी।

सीओ ने जब इस एक्शन के पीछे की वजह पूछी तो दरोगा ने कहा कि यह काम उसने थाने दार के कहने पर किया है। इसी के बाद सीओ ने तुरंत विनय तिवारी के खिलाफ़ एसएसपी को रिपोर्ट भेजी। रिपोर्ट के मुताबिक विनय का विकास के घर पर आना-जाना था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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