अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद हर दिन इससे जुड़े नए-नए विवाद सामने आ रहे हैं। अब निर्मोही अखाड़ा ने गोपाल राव नागरकट्टे को इस विवाद का सबसे बड़ा चेहरा बताया है। गोपाल राव नागरकट्टे ट्रस्ट में किसी आधिकारिक प्रशासनिक पद पर न होते हुए भी मंदिर प्रबंधन के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति माने जाते हैं।
चंदा चोरी विवाद गहराने के बाद अब ट्रस्ट के आजीवन सदस्य और निर्मोही अखाड़ा के प्रमुख महंत दिनेंद्र दास ने गोपाल राव पर सीधे और गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं दूसरी तरफ, विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने साफ कर दिया है कि इस मामले में किसी को बख्शा नहीं जाएगा और चाहे कोई भी हो, उसकी भूमिका की पूरी जाँच होगी।
‘गोपाल राव राजनीति कर रहे’: निर्मोही अखाड़ा का आरोप
राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य और निर्मोही अखाड़ा के प्रमुख महंत दिनेंद्र दास ने गोपाल राव को इस पूरे विवाद और अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार ठहराया है। महंत दिनेंद्र दास ने कहा कि गोपाल राव राम मंदिर की पुरानी वैष्णव परंपराओं को ताक पर रखकर ‘राजनीति खेल रहे हैं’। वे उत्तर प्रदेश की राम परंपरा को छोड़कर जबरन दक्षिण की परंपरा थोपने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे मंदिर में अव्यवस्था फैली है।
महंत दिनेंद्र दास ने आपत्ति जताई कि गर्भगृह में राम लला की सेवा के लिए केवल उन्हीं लोगों को जाने की अनुमति होनी चाहिए जो कंठी पहनते हैं और दीक्षित हैं, लेकिन ट्रस्ट में इन नियमों का पालन ठीक से नहीं हो रहा है। निर्मोही अखाड़ा के प्रमुख ने चंदा चोरी मामले में गिरफ्तार आरोपित टिन्नू यादव का जिक्र करते हुए कहा कि गोपाल राव ने ऐसे गलत लोगों को शह दी है।
उन्होंने आगे कहा, “हमने गोपाल राव को ट्रस्ट में लाकर गलती की। उन्हें अनिल मिश्रा ने पेश किया था और अब हम ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।” महंत दिनेंद्र दास ने माँग की है कि गोपाल राव को तुरंत उनके पद और ट्रस्ट के आंतरिक कामकाज से दूर किया जाना चाहिए। हालाँकि, उन्होंने चंपत राय का बचाव करते हुए कहा कि चंपत राय के साथ उनके अपने लोगों ने ही धोखा किया है।
‘चंपत राय का इस्तीफा हुआ, गोपाल राव की भी हो जाँच’: VHP नेता का बयान
विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ नेता और कानूनी विशेषज्ञ आलोक कुमार ने एक टीवी इंटरव्यू में इस पूरे विवाद पर अपनी बात रखी है। आलोक कुमार ने दावा किया कि उन्हें पक्का मालूम है कि चंपत राय और अनिल मिश्रा दोनों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी जी ने उनके इस्तीफे को स्वीकार किया है और आगामी ट्रस्ट की बैठक में इस पर चर्चा होगी।
इंटरव्यू में जब आलोक कुमार से पूछा गया कि चंपत राय ने 7 जून को बयान दिया था कि ‘चोरी का कोई सबूत नहीं है और ऑडिट चल रहा है’, जबकि पुलिस 4 जून को ही रिकवरी कर चुकी थी, तो आलोक कुमार ने कहा, “मैं चंपत जी के उस बयान का समर्थन नहीं कर सकता। वह बयान नहीं आना चाहिए था। सत्य के साथ कोई समझौता नहीं होना चाहिए।” हालाँकि, उन्होंने चंपत राय की तारीफ करते हुए यह भी कहा कि अयोध्या में क्या हो रहा है, यह चंपत जी से छुपा नहीं रहता था।
इसके अलावा, जब आलोक कुमार से पूछा गया कि गोपाल राव ट्रस्ट में न होते हुए भी वहाँ क्या कर रहे थे, तो उन्होंने कहा कि गोपाल राव वहाँ अन्य ट्रस्टियों की व्यवस्थाओं में सहायता कर रहे थे। उन्होंने स्पष्ट कहा, “जो भी आरोपित है, उसकी गहन जाँच होनी चाहिए। पुलिस को बिना किसी परिणाम की परवाह किए पूरी छूट के साथ जाँच करनी चाहिए, किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।”
अयोध्या के संतों के हाथ में मंदिर सौंपने की माँग पर आलोक कुमार ने असहमति जताई। उन्होंने कहा कि संतों को भगवान की पूजा के लिए समय चाहिए। इतने बड़े संगठन और परिसर को चलाने के लिए प्रशासनिक अनुभव और प्रबंधन की विशेषज्ञता रखने वाले लोगों की भी जरूरत होती है, इसलिए उन्हें ट्रस्ट से बाहर नहीं रखा जा सकता।
कौन हैं गोपाल राव नागरकट्टे?
गोपाल राव मूल रूप से कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के निवासी हैं। वे शैक्षणिक योग्यता में भौतिकी विज्ञान (Physics) से परास्नातक (M.Sc.) हैं। गोपाल राव लंबे समय तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के समर्पित पदाधिकारी रहे हैं और कर्नाटक में संघ के प्रांत प्रचारक की भूमिका निभा चुके हैं। वर्तमान में वे विश्व हिंदू परिषद (VHP) के केंद्रीय सह मंत्री पद पर कार्यरत हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जब अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण शुरू हुआ, तो उन्हें पहले निर्माण प्रभारी बनाया गया और बाद में राम मंदिर का व्यवस्थापक (एडमिनिस्ट्रेटर) नियुक्त किया गया। पिछले साल उन्हें ट्रस्ट में एक विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में भी शामिल किया गया, हालाँकि इसकी कोई आधिकारिक घोषणा कभी नहीं की गई।
ट्रस्ट में बिना पद के भी अपार शक्तियाँ और ‘पावरफुल’ रसूख
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के बाद गोपाल राव को मंदिर प्रबंधन में दूसरा सबसे प्रभावशाली व्यक्ति माना जाता है। ट्रस्ट में कोई बड़ा प्रशासनिक पद न होने के बावजूद मंदिर की लगभग सभी गतिविधियों में उनका सीधा हस्तक्षेप रहता है। मंदिर परिसर का कोई भी आयोजन हो, भगवान के भोग की सामग्री की खरीद हो या पुजारियों का प्रबंधन… सब कुछ इन्हीं के जिम्मे है।
इसके अलावा, दर्शन और वीवीआईपी (VVIP) आरती पास जारी करने की बेहद संवेदनशील जिम्मेदारी भी वही संभालते हैं। नियमतः यह अधिकार केवल चंपत राय, अनिल मिश्रा या जिले के वरिष्ठ अधिकारियों (DM, SSP) के पास है, लेकिन गोपाल राव भी अपने नाम से VVIP पास जारी करते रहे हैं। यही नहीं, उन्होंने अपने एक रिश्तेदार को भी मंदिर के कार्यों से जोड़ रखा था, जो कथित तौर पर गोपाल राव की ID का इस्तेमाल कर VVIP बुकिंग और मंदिर के अन्य कार्यों में हस्तक्षेप करता था। मंदिर निर्माण के वक्त पत्थरों की खरीदारी कहाँ से होनी है, इसमें भी गोपाल राव की अपरोक्ष भूमिका थी।


