Thursday, October 1, 2020
Home देश-समाज जायरा ने सिनेमा छोड़ा, मैंने अपनी कला जलाई, आखिरकार कश्मीरी जीत गए: कश्मीरी मॉडल

जायरा ने सिनेमा छोड़ा, मैंने अपनी कला जलाई, आखिरकार कश्मीरी जीत गए: कश्मीरी मॉडल

"मुझे कला छोड़ने पर मजबूर किया। मदरसे में भेजा, जहाँ न केवल शारीरिक आघात पहुँचाया बल्कि कीड़े भी खिलाए। मुझे ICU में भर्ती होना पड़ा। मौत से बचकर भागी तो खुद से वादा किया कि दोबारा इस तंत्र में पैर नहीं रखूँगी।"

जायरा वसीम का यूँ मजहब का हवाला देकर बॉलीवुड को अलविदा कहना हर किसी को खटक रहा है। कुछ लोग इसे उनका निजी फैसला कहकर शांत हैं, तो कुछ लोगों के लिए यकीन कर पाना अब भी मुश्किल है कि कोई मजहब की वजह से अपने पूरे करियर को कैसे दाँव पर लगा सकता है? कोई नहीं जानता उनके इस फैसले के पीछे मजहब ही वास्तविक कारण है, या फिर मजहब के ठेकेदार। लेकिन एक बात निश्चित है कि उनके इस फैसले से कई लोग हताश हैं। जिनमें एक नाम कश्मीरी कलाकार सईद रुहानी का भी है। जिन्हें जायरा के फैसले में खुद की आपबीती याद आ गई।

रुहानी ने रवीना टंडन जैसे सेलीब्रेटियों की तरह जायरा पर अपना गुस्सा नहीं उतारा है, लेकिन उन्होंने कश्मीरियों पर चोट जरूर की है। उन्होंने जायरा वसीम का हवाला देकर लिखा, “एक और ने मान ली हार ..जायरा वसीम। तो कश्मीरी दिमाग को काबू करने में कामयाब हो गए हैं। जबरदस्ती भरा व्यवहार….वल्लाह!”

इंडिया टुडे को दिए अपने एक साक्षात्कार में रुहानी ने इस मुद्दे पर बात करते हुए बताया कि उन्हें जायरा से सहानुभूति है। क्योंकि वह भी उस राह पर चल चुकी हैं जहाँ उन्हें सिर्फ़ मजहब के कारण अपनी कला छोड़नी पड़ी थी। वह कहती हैं कि हर कोई इतना प्रतिभाशाली नहीं होता, लेकिन जायरा हैं।

रुहानी का कहना है कि जायरा ने बॉलीवुड छोड़ा क्योंकि शायद उन्हें ग्लानि महसूस होनी शुरू हो गई थी, जिसके पीछे का कारण सामाजिक प्रभाव है। उनका मानना है कि आस-पास का समाज हम पर इस प्रकार से असर डालता है कि यकीन होने लगता है कि हम अपने अल्लाह से दूर जा रहे हैं। वे बताती हैं कि वह खुद इस रास्ते पर जाकर अपने चार साल के काम को जला चुकी हैं।

उनके मुताबिक, हो सकता है कि जायरा ने अपना फैसला खुद लिया है, तो उन्होंने अपनी राह मोड़ ली हो, लेकिन रुहानी के लिए यह उनका रास्ता नहीं था। उनके लिए अपनी प्रतिभा को छोड़ना किसी चरम स्थिति से कम नहीं था, जहाँ उन्होंने कला त्यागकर खुद को भी खो दिया था। रुहानी का मानना है कि जायरा का फैसला कई हद तक समाज से प्रभावित होकर लिया गया है, जैसे उनका खुद का निर्णय भी लोगों की सुना-सुनी में ही लिया गया था।

अपने जीवन का एक लंबा समय कश्मीर में गुजारने के बाद रुहानी जानती हैं कि ‘समाज का प्रभाव’ किसी भी व्यक्ति के निर्णय को कैसे बदलता है, क्योंकि उन्होंने इसे बहुत करीब से महसूस किया है। आज खुद को एक कलाकार, कवियित्री और मॉडल के रूप में पहचान दिलाने वाली रुहानी कहती हैं कि उन्हें उनके काम की वजह से बहुत धमकियाँ मिलीं। कुछ लोगों ने यहाँ तक कहा कि वह अपने काम के कारण मरेंगी, जिस वजह उन्होंने हमेशा अंडर ग्राउंड रहकर काम किया।

अपने इस साक्षात्कार में रुहानी ने सपनों की उड़ान भरने के दौरान और समाज से प्रभावित होने के वक्त जो फर्क़ महसूस किया, उसके बारे में भी बताया है। उन्होंने कहा, “जब मैंने मॉडलिंग शुरू की, तो मैंने देखा कैसे लोग मुझे ट्रीट कर रहे हैं कि मुझे अच्छा लग रहा है, जबकि दूसरी ओर मदरसे में मुझे मारा जाता था, मुझे गाली दी जाती थी, मेरे साथ गलत बर्ताव होता था, और मुझे बंधक बनाकर रखा जाता था, सिर्फ़ इसलिए ताकि मैं अल्लाह के बारे में पढ़-सीख सकूँ।

रुहानी के अनुभव कहते हैं कि कश्मीर एक ऐसी विचारधारा से चलता है जो समाज से प्रभावित है, जहाँ गृहस्थी संभालना बेहद जरूरी है। लेकिन, ऐसी विचारधारा में बढ़ने के साथ उन्हें अपना काम छोड़कर बिलकुल अच्छा नहीं लगा था, क्योंकि उन्हें अपने ही काम से खुशी मिलती थी। वे कहती हैं कि इस्लाम के अनुसार अश्लीलता हराम है, लेकिन ये कहीं नहीं लिखा कि खूबसूरती भी हराम है और जो वो करती थीं वो खूबसूरती की सूची में आता है।

रुहानी के अनुसार उन्हें उनके काम को छोड़ने के लिए बाहर का हर इंसान बहुत जोर डालाता था, दुकानदार से लेकर पड़ोसी तक ने उनसे बात करनी छोड़ दी थी। और फिर ये सब सिर्फ़ बाहरी समाज में नहीं चला बल्कि स्कूल में भी उन्हें कई सालों तक ऐसी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

रुहानी कहती हैं कि इस बीच उन्हें मदरसे में भेजा गया, जहाँ जाकर उन्होंने मौत तक को करीब से देखा। वहाँ उन्हें न केवल उन्हें शारीरिक रूप से आघात पहुँचाया गया बल्कि उन्हें कीड़े खिलाए गए। जिस कारण उन्हें आईसीयू तक में जाना पड़ा। मौत को इतने नजदीक देखकर उन्होंने खुद से वादा किया कि वो दोबारा इस तंत्र में पैर नहीं रखेंगी।

ये वही समय था जब उन्होंने बुर्के से भी आजादी पाने की ठान ली थी। क्योंकि वह इस कट्टर तरतीब से अपना विश्वास खो चुकी थीं। उनका मानना है कि ये मजहब के कट्टर ठेकेदार इस बात तक को नहीं जानते कि बुर्के का पर्याय क्या है।

रुहानी की कहानी एक संघर्ष की कहानी है, जिससे आज की लड़कियों को प्रभावित होना चाहिए, लेकिन ये कहानी ये भी बताती है कि कहीं न कहीं जायरा के बॉलीवुड से अलविदा कहने की वजह वही सब कारक हैं जो रुहानी द्वारा कला को जलाने के पीछे थे। शायद इसलिए ही रुहानी उम्मीद लगाती है कि जिस तरह से वे अपने काम पर वापस लौटीं, उसी तरह जायरा भी लौटेंगी। क्योंकि उनका मानना है एक कलाकार हमेशा कलाकार रहता है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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