शरद चक्रवर्ती की हत्या उस वक्त हुई जब वह दुकान बंद कर घर लौट रहे थे। तभी कट्टरपंथियों ने घर के सामने उनपर हमला कर दिया। शरद चक्रवर्ती ने सोशल मीडिया फेसबुक पर बांग्लादेश में हो रही हिंसा पर दुख जताया था और देश को ‘मौत की घाटी’ कहा था।
हत्या के विरोध में व्यापारियों ने मार्केट बंद रखा और न्याय की माँग करते हुए मानव श्रृंखला बनाई। इनलोगों ने हत्यारों की पहचान कर, उनकी गिरफ्तारी की माँग की।
हिन्दुओं के विरोध प्रदर्शन के बावजूद बांग्लादेश में हत्याओं का दौर जारी है। अगर कट्टरपंथियों के खिलाफ आवाज उठाई तो उसे अपनी जान गवानी पड़ रही है।
11 हिन्दुओं की एक महीने में हत्या
2 दिसंबर को 42 साल के प्रतोष कर्मकार नाम के बांग्लादेश हिन्दू की हत्या नरसिंगदी के रायपुरा में कर दी गई । उसे गोली मारी गई थी। इसी दिन 35 साल के मछली व्यापारी उत्पल सरकार की हत्या कर दी गई। वह फरीदपुर जिले के साल्था का रहने वाला था।
7 दिसंबर को स्वतंत्रता सेनानी और बांग्लादेश मुक्ति संग्राम 1971 के योद्धा जोगेश चंद्र राय और उनकी पत्नी सुबोर्ना राय की गला रेत कर हत्या कर दी गई। ये हत्या उनके घर पर रंगपुर में हुई।
12 दिसंबर को ऑटो रिक्शा चालक शांतो दास कुमिला नाम के 18 साल के युवक की हत्या कर दी गई। उसका गला काटा गया था। उसके शव को मक्के के खेत में कट्टरपंथियों ने फेंक दिया था।
18 दिसंबर को 27 साल के हिन्दू युवक दीपू दास को उसकी फैक्ट्री से पकड़ कर इस्लामी भीड़ ने पीट-पीट कर हत्या कर दी। उसके शव को पेड़ से लटका दिया गया। ये घटना मैमनसिंह के भलुका में हुई।
24 दिसंबर को राजबाड़ी जिसे में अमृत मंडल नाम के शख्स की हत्या कर दी गई। उसे इस्लामी कट्टरपंथियों ने पीट-पीटकर मार डाला। 29 दिसंबर को बांग्लादेश के अर्धसैनिक सहायक बल अंसार वाहिनी के हिन्दू सदस्य बजेन्द्र बिस्वास को गोली मार दी गई। उसे मैनन सिंह इलाके में मारा गया।
3 जनवरी को हिन्दू व्यवसायी खोकन चंद्र दास को घर लौटते समय हमलावरों ने चाकू से वार किया। इसके बाद पेट्रोल छिड़कर जिंदा जला दिया।
5 जनवरी को एक स्थानीय पेपर के कार्यवाहक संपादक और बर्फ फैक्ट्री के मालिक राणा प्रताप बैरागी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इसके बाद 6 जनवरी को शरद चक्रवर्ती की हत्या इस्लामी कट्टरपंथियों ने कर दिया।
इन हत्याओं के अलावा कई जगहों पर हिन्दुओं पर हमला किया गया। दिसंबर में ऐसी 51 घटनाएँ सामने आई हैं।

