कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने कहा है कि बिहार को योजनाबद्ध तरीके से उपेक्षित किया गया है। यह बात उन्होंने कॉन्ग्रेस की कार्य समिति की बैठक में कही हैं जो 85 वर्षों बाद पटना में हो रही है। राहुल गाँधी ने शायद सही ही कहा है लेकिन इसके जिम्मेदार जवाहरलाल नेहरू और उनकी पार्टी ही हैं, यह बात उन्होंने छिपा ली।
कॉन्ग्रेस के दशकों के शासन में ‘योजनाबद्ध’ तरीके से बिहार की बर्बादी की पटकथा लिखी गई। नेहरू के काल में शुरु हुआ ‘रेल भाड़ा सामान्यीकरण कानून‘ इस योजना में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हुआ।
1952 में शुरू हुई इस नीति में आर्थिक विकास सुगम बनाने के लिए लंबी दूरी के माल परिवहन को सब्सिडी दी गई। अब इससे आर्थिक विकास बिहार जैसे राज्यों से दूर होता चला गया। यह नीति कपास जैसे कच्चे माल पर लागू नहीं हुई।
बिहार और झारखंड में मिलने वाले खनिज उपयोगी कच्चे माल थे लेकिन जब केंद्र ने भाड़ा पर सब्सिडी दी, तो उद्योगपतियों को यह सुविधा होती कि वे इन कच्चे मालों को बिहार से दूसरे राज्यों में सस्ते दाम पर भेज लें और वहाँ उद्योग स्थापित करें। इस तरह बिहार में उद्योग विकसित होने के अवसर हाशिए पर चले गए।
बिहार के वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र किशोर ने ऑपइंडिया के अजीत झा से बातचीत में इसे लेकर कहा था, “यदि यह कानून अंग्रेजों के जमाने में होता तो टाटा नगर न होता। फिर टाटा बंबई जैसे शहरों में अपना उद्योग खड़ा करते। केंद्र सरकार की इस बेईमानी की वजह से बिहार को कम से कम 10 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।”
उन्होंने इसके लेकर हुए पलायन को लेकर आगे कहा, “उद्योगों का राज्य में अपेक्षित विकास नहीं हुआ। न खेती का पंजाब की तरह विकास हुआ। आबादी बढ़ती गई। स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा नहीं हो रहे थे। ऐसे में पलायन होना ही था।”
कॉन्ग्रेस शासन के लंबे दौर में यह असमानता और गहरी होती गई जिसके बाद बिहार से लाखों लोग रोजगार की तलाश में पंजाब, दिल्ली और मुंबई जाने पर मजबूर हो गए। राहुल जी, अगर शुरुआती दौर में ही बिहार को उद्योग दिए गए होते, ‘योजनाबद्ध’ तरीके से विकास के काम किए जाते तो आज यह राज्य पिछड़ेपन की पहचान नहीं बनता।
कॉन्ग्रेस ने अपने दौर में तो बिहार को हाशिये पर रखा ही लालू यादव के दौर में भी जब अपराध, जातीय हिंसा और भ्रष्टाचार चरम पर था, तब भी कॉन्ग्रेस ने सत्ता की राजनीति के लिए लालू का साथ दिया। कॉन्ग्रेस ने सत्ता में हिस्सेदारी के लालच में बिहार की जनता को अपराध और अराजकता के हवाले कर दिया।
लालू के जंगलराज पर कॉन्ग्रेस की ‘मौन’ सहमति ‘चीख-चीखकर’ कहती है कि बिहार को योजनाबद्ध तरीके से बर्बाद किया गया था। अपने शासनकाल में ना कॉन्ग्रेस को बिहार में उद्योग की याद आई, ना रोजगार की।
बिहार में कॉन्ग्रेस और उसके सहयोगियों ने रोजगार और उद्योग तो कभी नहीं दिए लेकिन अब जब उद्योग लगाने की कोशिश भी की जा रही है तो कॉन्ग्रेस का पूरा इकोसिस्टम इसके खिलाफ है। इसका हालिया उदाहरण गौतम अड़ानी को बिहार में 1 रुपए प्रति एकड़ की लीज पर जमीन दिए जाने के खिलाफ कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम के प्रदर्शन हैं।
यही काम कॉन्ग्रेस शासित राज्यों में होता है, उनके चुने हुए मुख्यमंत्री करते हैं तब यह राज्य के विकास की पहल होती है लेकिन अब यह कॉन्ग्रेस को उद्योगपति के ही हित की बात नजर आ रही है। तो राहुल जी, जब आप यह कहें कि बिहार को योजनाबद्ध तरीके से बर्बाद किया गया तो यह भी आगे से साथ-साथ ही स्पष्ट कर दें कि यह सब आपकी पार्टी और सहयोगियों का ही किया धरा है।


