Thursday, April 18, 2024
Homeविचारराजनैतिक मुद्देमोदी विरोधियों की गज भर लंबी ज़ुबान, घटिया राजनीति का प्रमाण

मोदी विरोधियों की गज भर लंबी ज़ुबान, घटिया राजनीति का प्रमाण

ऐसे ओछे और भद्दे बयानों के सरताज़ों से मैं कहना चाहूँगी कि पीएम मोदी के चेहरे पर ध्यान देने की बजाए अगर उनके विकास कार्यों पर ध्यान दिया होता तो शायद देश की दिशा और दशा में आए सुधारों को वो देख पाते।

आज से 17वीं लोकसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान की प्रक्रिया शुरू हो गई है। पहले चरण में कुल 545 सीटों में से 91 सीटों पर आज वोटिंग होगी। सियासी घमासान के बीच जहाँ एक तरफ मतदाता अपने प्रतिनिधि को जिताने की कोशिश में जुट गए हैं, वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक पार्टियों के नेता अपनी ज़ुबान को क़ाबू में नहीं रख पा रहे हैं।

अपनी विविधताओं और विशालतम छवि के लिए प्रसिद्ध भारत में लोकसभा चुनाव किसी उत्सव से कम नहीं होता, इस पर दुनिया की नज़र भी बनी रहती है। चुनावी मौसम में आरोप-प्रत्यारोप का दौर कोई नई बात नहीं है। लेकिन इस चुनावी हार-जीत में जब जनता को बरगलाने का काम किया जाता है, तो वो किसी अपराध से कम नहीं होता। इसी कड़ी में अपनी भद्दी राजनीति को चमकाने के लिए कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने पीएम मोदी को हिटलर तक कह दिया।

चोर की दाढ़ी में तिनका

बता दें कि कुमारस्वामी का यह तीखा हमला इसलिए था क्योंकि वो आयकर विभाग की छापेमारियों से नाराज़ थे। दरअसल हाल ही में जनता दल सेक्यूलर (JDS) के लोगों पर आयकर विभाग ने छापेमारी की थी। इससे कर्नाटक के मुख्यमंत्री इतने आहत हुए कि उन्होंने अपना सारा गुस्सा पीएम मोदी पर उतारते हुए कह दिया कि वो तो हिटलर से भी ख़राब हैं!

कुमारस्वामी ने आरोप लगाते हुए पीएम मोदी को कहा कि वो देश के सबसे ख़राब प्रधानमंत्री हैं, जो लोगों की निजी संपत्तियों को ज़ब्त करने का विधेयक लाए हैं। अब ज़रा इनसे ये पूछा जाए कि आयकर विभाग क्या अपना मानसिक संतुलन खो बैठा है, जो वो लोगों की निजी संपत्तियों का ज़ब्त करने का काम करेगा? यह बात तो हर कोई जानता है कि आयकर विभाग, आय से अधिक उन संपत्तियों को ज़ब्त करने का काम करता है, जिसका हिसाब सरकार को नहीं दिया जाता। ‘चोर की दाढ़ी में तिनका’ वाली कहावत यहाँ सटीक बैठती है क्योंकि आयकर विभाग की छापेमारी का डर उन्हीं चोरों को होगा, जिनके पास चोरी का माल होगा। कुमारस्वामी अगर आयकर विभाग की छापेमारी से डरते हैं, तो मतलब साफ़ है कि उनका दामन भी दूध का धुला नहीं है।

अपने इसी डर को भगाने का एकमात्र साधन वो पीएम मोदी को मानते हैं और इसी लिए वो कभी पीएम के चमकते चेहरे के बारे में बात करते हैं, तो कभी उन्हें तानाशाह बताते हैं। असल में अपने दु:ख को छिपाने का कोई दूसरा उपाय न सूझता देख वो उन्हें कुछ भी कहने से नहीं चूकते, फिर चाहे देश के सबसे ख़राब प्रधानमंत्री का तमगा देना हो या दुनिया का ही सबसे ख़राब प्रधानमंत्री बोल देना हो।

IT विभाग और चिदंबरम में 36 का आँकड़ा

कुछ इसी तरह का डर यूपीए काल में वित्तमंत्री रहे पी चिदंबरम पर भी दिखा। उनका यह डर उस समय दिखा जब हाल ही में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के क़रीबियों के ख़िलाफ़ आयकर विभाग द्वारा क़रीब 50 ठिकानों पर छापेमारी की गई। इस छापेमारी में करोड़ों रुपए कैश के अलावा कई महत्वपूर्ण दस्तावेज़ बरामद किए गए। पी चिदंबरम ने ट्वीट कर यह ज़ाहिर करने की कोशिश की कि उन्हें आयकर विभाग की छापेमारी से कोई डर नहीं लगता, लेकिन इसकी सच्चाई कुछ और ही थी। इसका संबंध उनकी पत्नी नलिनी चिदंबरम और पुत्र कार्ति चिदंबरम की अवैध संपत्तियों का डर से था।

सांप, बिच्छू और नीच तक कह डाला

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब किसी ने पीएम मोदी पर हमलावर और अभद्र टीका-टिप्पणी की हो। कॉन्ग्रेस के मणिशंकर अय्यर ने पीएम मोदी को ‘नीच’ कहा था जिस पर सफ़ाई दी कि वो हिंदी नहीं जानते थे, इसलिए उन्होंने ‘Low Person’ का अनुवाद किया और उन्हें नीच बोल दिया। हालाँकि, अपने इस बयान पर अय्यर ने कम से कम 6 बार माफ़ी माँगने का ज़िक्र किया। उनके विवादित बयानों की फेहरिस्त में और भी विवादित बयान शामिल हैं जिसमें उन्होंने साल 2013 में नरेंद्र मोदी को सांप-बिच्छू तक कह डाला था। अपनी इस बेक़ाबू होती ज़ुबान ऐसे नेताओं के गिरते स्तर का पता चल जाता है।

पीएम मोदी के ‘काले से गोरे’ का राज बताने से भी नहीं चूके

देश के प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ बिगड़े बोल में एक नाम कॉन्ग्रेसी नेता अल्पेश ठाकोर का भी शामिल है। पीएम मोदी के गोरे रंग पर तंज कसते हुए अल्पेश ने कहा था कि वो 80,000 रुपए का मशरूम खाते हैं, जिससे वो काले से गोरे हो गए हैं। ये बयान गुजरात विधानसभा चुनाव के दोरान 2017 में दिया गया था। ऐसे ओछे और भद्दे बयानों के सरताज़ों से मैं कहना चाहूँगी कि पीएम मोदी के चेहरे पर ध्यान देने की बजाए अगर उनके विकास कार्यों पर ध्यान दिया होता तो शायद देश की दिशा और दशा में आए सुधारों को वो देख पाते

चुनावी दंगल के इस माहौल में आए दिन कोई न कोई ऐसा विवादित बयान दे डालता है, जिससे किरकिरी होना स्वाभाविक ही है। सबसे हैरानी की बात यह है कि इन विरोधी सुरों के तीर हमेशा पीएम मोदी पर ही छोड़े जाते हैं। बीजेपी की धुर विरोधी पार्टी कॉन्ग्रेस तो हमेशा से ही हमलावार रही है, लेकिन कुछ ऐसे नेता भी उनका साथ बख़ूबी देते हैं जिन्होंने कभी ख़ुद NDA के साथ मिलकर राजनीति की सीढ़ियाँ चढ़ीं थी। यहाँ बात ममता बनर्जी की हो रही है जो 1999 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का हिस्सा बन गई थी। जिस गठबंधन का वो कभी हिस्सा थीं, जिसकी बदौलत वो देश की पहली रेलमंत्री बनीं, आज वही पार्टी ममता को एक आँख नहीं भाती। जिनके ख़िलाफ़ वो अभद्र भाषा का प्रयोग तो करती ही हैं साथ में उन पर निजी हमले भी करती हैं।

कुल मिलाकर देखा जाए तो एक बात तो तय है कि पीएम मोदी के ख़िलाफ़ बुलंद सुर देश की जनता का ध्यान भटकाने का ज़रिया मात्र है। ऐसा करने से वो बीते पाँच वर्षों में आए सकारात्मक बदलावों पर से जनता का ध्यान हटाना चाहती है। फ़िलहाल, यह देखना बाकी है कि विरोधियों के ये बिगड़े बोल जनता पर कितना असर डालते हैं।

Special coverage by OpIndia on Ram Mandir in Ayodhya

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

चिराग पासवान की माँ-बहन को गाली तेजस्वी यादव के लिए ‘बात का बतंगड़’, बोले बिहार के डिप्टी CM- करेंगे कार्रवाई: चुनाव आयोग तक पहुँचा...

तेजस्वी यादव की चुनावी सभा में चिराग पासवान की माँ को दी गई गाली का मामला तूल पकड़ रहा है। इस मामले में चुनाव आयोग को शिकायत दे दी गई है।

डायबिटीज के मरीज हैं अरविंद केजरीवाल, फिर भी तिहाड़ में खा रहे हैं आम-मिठाई: ED ने कोर्ट में किया खुलासा, कहा- जमानत के लिए...

ईडी ने कहा कि केजरीवाल हाई ब्लड शुगर का दावा करते हैं लेकिन वह जेल के अंदर मिठाई और आम खा रहे हैं।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
282,677FollowersFollow
417,000SubscribersSubscribe