हर समय PM मोदी पर निजी हमलों से कुछ न होगा ‘दीदी’, चुनावी माहौल है कोई नई चाल सोचो या पैंतरा बदलो

ममता का यह कह देना कहाँ तक उचित है कि पीएम मोदी का तो परिवार ही नहीं है जबकि उनके लिए तो पूरा देश ही एक परिवार के समान है, जिसमें सबका विकास करना उनकी प्राथमिकता रही है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर लोकसभा चुनाव का भूत इस क़दर चढ़ा हुआ है कि वो कुछ भी कहने से नहीं चूकतीं। हद तो तब पार हो जाती है जब वो अपनी भद्दी राजनीति में देश के प्रधानमंत्री मोदी तक को नहीं छोड़तीं। आए दिन उनकी ख़िलाफ़त में व्यक्तिगत हमले करती रहती हैं। किसी पर निजी हमले इंसान तब करता है जब उसके पास कहने के लिए कुछ बचे ही न। आए दिन केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेना तो उनकी पुरानी आदत है जिसमें आरोपों का दौर कभी थमता ही नहीं।

अपने विरोधी सुरों में सुर मिलाते हुए वो कभी बीजेपी को बैलेट पेपर पर जवाब देने की धमकी दे डालती हैं तो कभी न्यूज़ चैनल द्वारा उनकी धरने देने वाली कवरेज़ पर मीडिया संस्थान को (रिपब्लिक टीवी) नोटिस थमा देती हैं। बड़ी ही विलक्षण और फ़र्ज़ी प्रतिभा की धनी हैं ममता दीदी।

अपने विरोधी स्वभाव के चलते उन्हें केवल आरोप पर आरोप ही लगाना आता है, फिर चाहे वो कवरेज को लेकर हो या चुनावी वादे के लेकर या केंद्र को घेरने के लिए हो। आरोप लगाने की उनकी कला दिनों-दिन निखरती जा रही है। अभी हाल ही में उन्होंने पीएम मोदी पर आरोप लगाया था कि उन्होंने अपनी पत्नी की देखभाल नहीं की तो जनता की देखभाल कैसे करेंगे। इस पर मेरा तो यही कहना है कि जनता की देखभाल कैसे करेंगे वो जनता ने बीते पाँच वर्षों में देख लिया, लेकिन आप फ़िलहाल ये बताइये कि आपने बंगाल में ऐसा कौन-सा विकास कर दिया जिसके चर्चे दुनिया भर में हो रहे हैं? आप तो अपने राज्य में एक फ़िल्म के प्रदर्शन तक पर तो रोक लगा देती हैं कि कहीं उस फ़िल्म का व्यंग्य आपके ऊपर सटीक न बैठ जाए। क्या यही है आपकी राजनीति?

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आज फिर ममता ने पीएम मोदी पर तीखा हमला किया और कहा कि भारत में बड़े परिवारों को अलग-अलग धर्मों के लोगों को एक साथ रहते हुए देखा है, लेकिन पीएम मोदी इस बात को नहीं समझेंगे क्योंकि न तो उनका कोई परिवार है और न ही वो आप लोगों को अपना परिवार समझते हैं।

इतना ही नहीं ममता तो यहाँ तक बोल गईं कि पीएम मोदी के मुँह पर टेप चिपका देनी चाहिए। अब ऐसे में अगर यह पूछ लिया जाए कि पश्चिम बंगाल उस सेवानिवृत्त भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी के बारे में क्या कहेंगी, जिन्होंने आत्महत्या कर ली थी। अपने सुसाइड नोट में उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर उकसाए जाने का आरोप लगाया था और आत्महत्या के लिए ममता बनर्जी को ही ज़िम्मेदार ठहराया था? इस सवाल पर ममता का बस चले तो हर शख़्स के मुँह पर टेप चिपकवा दें।

ममता को पीएम मोदी की वो छवि कभी नज़र नहीं आती जिसमें वो व्यक्तिगत स्वार्थ से हमेशा दूर खड़े नज़र आते हैं। पीएम मोदी कभी निजी स्वार्थ को तवज्जोह नहीं देते उन्होंने हमेशा ‘सबका साथ, सबका विकास‘ का नारा दिया। इस नारे में व्यक्तिगत स्वार्थ और निजी लोगों को लाभ पहुँचाना कहीं भी शामिल नहीं है। यह बात अलग है कि ममता जैसे कुटिल राजनेता इस बात को नहीं समझ पाएँगे क्योंकि उनके क़रीबी तो घोटालों में नाम कमाते नज़र आते हैं।

चुनावी घमासान में ख़ुद को चमकाने की राजनीति में वो यह भूल जाती हैं कि उनके ख़ुद के दामन पर कितने दाग लगे हुए हैं। कभी तो वो शारदा चिट फंड मामले में पुलिस कमिश्नर के ख़िलाफ़ हो रही कार्रवाईयों पर अपना विरोध जताती हैं और रात भर धरने पर बैठ कर अपने अड़ियल रवैये का परिचय देती हैं, तो कभी  घोटाले की जाँच में अड़ंगा डालती हैं, इसकी शिक़ायत ख़ुद CBI द्वारा की गई थी। बंगाली फ़िल्म प्रोड्यूसर श्रीकांत मोहता को ₹17,450 करोड़ के रोज़ वैली चिटफंड घोटाले में गिरफ़्तार किया गया था, जोकि उनके क़रीबी थे।

वहीं पीएम मोदी की बात करें तो साल 2014 में उनके भाई प्रह्लाद मोदी ने बीबीसी को बताया था कि काश वह (पीएम मोदी) हमारे परिवार की आगे की पीढ़ी के लिए मदद करते, लेकिन वो ऐसा नहीं करेंगे। बता दूँ कि बेशक इस लाइन में पीएम मोदी के भाई का दर्द झलकता हो, लेकिन दूसरी तरफ पीएम मोदी का वो चरित्र दिख रहा है कि जिसमें व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए कोई जगह नहीं है। ऐसे में ममता का यह कह देना कहाँ तक उचित है कि पीएम मोदी का तो परिवार ही नहीं है जबकि उनके लिए तो पूरा देश ही एक परिवार के समान है जिसमें सबका विकास करना उनकी प्राथमिकता रहा है, जिसके परिणाम सकारात्मक रुप से उजागर भी हुए।

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