कॉन्ग्रेस नहीं है Pak को पसंद, शांति के लिए इमरान को मोदी से है उम्मीद: ये डर, दबाव या कुछ और!

ट्वीटर पर मोदी विरोधी लोग इस बयान को हथियार समझकर इस्तेमाल करने पर जुटे हुए हैं, विपक्ष लगातार वार करने के लिए प्रयासों में जुटा है। वहीं मोदी समर्थकों का कहना है कि इमरान खान और पाकिस्तान को मालूम चल चुका है कि मोदी सरकार दोबारा सत्ता में आने वाली है, जिसके कारण वह उन्हें मक्खन लगा रहे हैं।

चुनाव मतदान का पहला चरण शुरू होने से ठीक पहले एक तरफ़ जहाँ कॉन्ग्रेस पार्टी के कद्दावर नेता भी पार्टी को छोड़कर मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में अपनी रूचि दिखा रहे हैं, तो वहीं ‘उरी’ और ‘बालाकोट’ जैसे हमलों के बाद भी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान तक कॉन्ग्रेस को भारतीय सत्ता संभालते नहीं देखना चाहते हैं। ऐसा इमरान ने खुद मीडिया को दिए बयान में कहा है।

दरअसल, पाकिस्तान प्रधानमंत्री इमरान खान के बयान के अनुसार लोकसभा 2019 के चुनावों में नरेंद्र मोदी को दोबारा से सत्ता मिलती है तो शांति वार्ता होने की बेहतर उम्मीद है। जबकि इमरान का मानना है कि अगर नरेंद्र मोदी के सिवा कॉन्ग्रेस सरकार सत्ता में आती है तो कश्मीर मुद्दे समेत कई मुद्दों पर बातचीत की राह काफ़ी मुश्किल हो जाएगी।

इमरान खान के इस बयान के बाद हालाँकि विपक्ष ने इस पर अपनी राजनीति साधने का पूरा प्रयास किया। कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट करते हुए कहा है कि पाकिस्तान आधिकारिक तौर पर मोदी के साथ हो गया है। उनकी मानें तो मोदी को वोट करने का पर्याय पाकिस्तान को वोट करना है।

- विज्ञापन - - लेख आगे पढ़ें -

माना जा रहा है कि इमरान खान ने चुनावी माहौल के मद्देनज़र ऐसा बयान दिया है। ट्वीटर पर मोदी विरोधी लोग इस बयान को हथियार समझकर इस्तेमाल करने पर जुटे हुए हैं, विपक्ष लगातार वार करने के लिए प्रयासों में जुटा है। वहीं मोदी समर्थकों का कहना है कि इमरान खान और पाकिस्तान को मालूम चल चुका है कि मोदी सरकार दोबारा सत्ता में आने वाली है, जिसके कारण वह उन्हें मक्खन लगा रहे हैं।

ऐसे में ट्वीटर पर आपस में भिड़े इन दोनों तरह के ‘समर्थकों’ की लड़ाई में उलझने की जगह यह समझना जरूरी है कि इस समय इमरान खान पर और पाकिस्तान पर मोदी के कारण बहुत बड़ा दबाव बना हुआ है। जिसे भारत की कूटनीतिक जीत भी कहा गया है। पुलवामा हमले के बाद पेरिस में एक हफ्ते तक चली बैठक के बाद पाकिस्तान को FATF की ओर से ग्रे लिस्ट में बनाए रखा गया था। यहाँ भारत ने पाकिस्तान पर विशेष नजर रखने और उन्हें दी जाने वाली फंडिंग को रोकने की माँग की थी। जिसके बाद FATF ने उसे ‘ग्रे लिस्ट’ में शामिल रखा था और उससे कहा गया था कि अगर वो खुद में सुधार नहीं करता है तो उसे ब्लैक लिस्ट कर दिया जाएगा। यहाँ पाकिस्तान ने FATF से 200 दिनों की मोहलत माँगी थी।

इसके अलावा न चाहते हुए भी पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय दबाव में आकर मसूद अजहर के मामले में नकेल कसनी पड़ी थी। बता दें कि पुलवामा हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र ने हमले को न केवल जघन्य और कायराना बताकर इसकी निंदा ही की थी। बल्कि जोर देकर कहा था कि इस तरह की हरकतों को करने वालों और इन्हें फंडिंग कर देने वालों कटघरे में खड़ा करना चाहिए।

इतना ही नहीं नए साल की शुरूआत के साथ इस बात को सरकार ने साझा किया था कि पाकिस्तान की हिरासत में भारत के 503 मछुआरे हैं। जिसके बाद पाकिस्तान ने इस बात को स्वीकारा कि उसने 483 भारतीय मछुआरों को हिरासत में लिया हुआ है। इस दौरान विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह ने बताया था कि 2014 से अनेकों प्रयासों के बाद पाकिस्तान से 1749 भारतीय कैदी रिहा हुए हैं। इसके अलावा अभी हाल ही में पाकिस्तान ने बाघा बॉर्डर के जरिए 100 कैदियों को भारत रिहा किया है। और बाकी के कैदियों को रिहा करने की तारीख़ भी बता दी है।

इस कदम को भले ही पाकिस्तान ने ‘सद्भावना’ के तहत उठाया कदम बताया गया हो, लेकिन सच यही है कि ये पाकिस्तान के भीतर मोदी सरकार का डर है। जिसके कारण वो ज्यादा समय अपनी हठों पर टिकने के लिए नाकाबिल हैं। वो चाहते हुए भी भारत के ख़िलाफ़ कोई कदम नहीं उठा सकता है।

जो इस बात को कह रहे हैं कि मोदी के चुनाव जीतने पर पाकिस्तान में बम फूटेंगे, वो उन्होंने शायद इमरान खान के पूरे बयान को ध्यान से नहीं सुना है। क्योंकि पाकिस्तानी पीएम इमरान खान अपने बयान में मोदी पर कई आरोप भी लगाएँ हैं, जो साबित करते हैं कि भले ही पाकिस्तान कॉन्ग्रेस के सत्ता में आने को लेकर चिंतित है, लेकिन मोदी सरकार की जीत को लेकर फायदा वाली बात कहने का मतलब मोदी को ‘समर्थन’ देना या मोदी का ‘समर्थन’ पाना तो बिलकुल भी नहीं है। लेकिन हाँ, इसे डर जरूर कहा जा सकता है क्योंकि अनेकों शिकायतों और हैरानी होने के बाद भी वो कामना करते हैं कि मोदी की सरकार वापस बने।

शेयर करें, मदद करें:
Support OpIndia by paying for content

यू-ट्यूब से

ये पढ़ना का भूलें

लिबरल गिरोह दोबारा सक्रिय, EVM पर लगातार फैला रहा है अफवाह, EC दे रही करारा जवाब

ज़्यादा पढ़ी गईं ख़बरें

ओपी राजभर

इतना सीधा नहीं है ओपी राजभर को हटाने के पीछे का गणित, समझें शाह के व्यूह की तिलिस्मी संरचना

ये कहानी है एक ऐसे नेता को अप्रासंगिक बना देने की, जिसके पीछे अमित शाह की रणनीति और योगी के कड़े तेवर थे। इस कहानी के तीन किरदार हैं, तीनों एक से बढ़ कर एक। जानिए कैसे भाजपा ने योजना बना कर, धीमे-धीमे अमल कर ओपी राजभर को निकाल बाहर किया।
उत्तर प्रदेश, ईवीएम

‘चौकीदार’ बने सपा-बसपा के कार्यकर्ता, टेंट लगा कर और दूरबीन लेकर कर रहे हैं रतजगा

इन्होंने सीसीटीवी भी लगा रखे हैं। एक अतिरिक्त टेंट में मॉनिटर स्क्रीन लगाया गया है, जिसमें सीसीटीवी फुटेज पर लगातार नज़र रखी जा रही है और हर आने-जाने वालों पर गौर किया जा रहा है। नाइट विजन टेक्नोलॉजी और दूरबीन का भी प्रयोग किया जा रहा है।
राहुल गाँधी

सरकार तो मोदी की ही बनेगी… कॉन्ग्रेस ने ऑफिशली मान ली अपनी हार

कॉन्ग्रेस ने 23 तारीख को चुनाव नतीजे आने तक का भी इंतजार करना जरूरी नहीं समझा। समझे भी कैसे! देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कॉन्ग्रेस भी उमर अबदुल्ला के ट्वीट से सहमत होकर...
उपेंद्र कुशवाहा

‘सड़कों पर बहेगा खून अगर मनमुताबिक चुनाव परिणाम न आए, समर्थक हथियार उठाने को तैयार’

एग्जिट पोल को ‘गप’ करार देने से शुरू हुआ विपक्ष का स्तर अब खुलेआम हिंसा करने और खून बहाने तक आ गया है। उपेंद्र कुशवाहा ने मतदान परिणाम मनमुताबिक न होने पर सड़कों पर खून बहा देने की धमकी दी है। इस संभावित हिंसा का ठीकरा वे नीतीश और केंद्र की मोदी सरकार के सर भी फोड़ा है।
पुण्य प्रसून वाजपेयी

20 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली पार्टी को 35+ सीटें: ‘क्रन्तिकारी’ पत्रकार का क्रन्तिकारी Exit Poll

ऐसी पार्टी, जो सिर्फ़ 20 सीटों पर ही चुनाव लड़ रही है, उसे वाजपेयी ने 35 सीटें दे दी है। ऐसा कैसे संभव है? क्या डीएमके द्वारा जीती गई एक सीट को दो या डेढ़ गिना जाएगा? 20 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली पार्टी 35 सीटें कैसे जीत सकती है?
राशिद अल्वी

EVM को सही साबित करने के लिए 3 राज्यों में कॉन्ग्रेस के जीत की रची गई थी साजिश: राशिद अल्वी

"अगर चुनाव परिणाम एग्जिट पोल की तरह ही आते हैं, तो इसका मतलब पिछले साल तीन राज्यों के विधानसभा के चुनाव में कॉन्ग्रेस जहाँ-जहाँ जीती थी, वह एक साजिश थी। तीन राज्यों में कॉन्ग्रेस की जीत के साथ ये भरोसा दिलाने की कोशिश की गई कि ईवीएम सही है।"

यूट्यूब पर लोग KRK, दीपक कलाल और रवीश को ही देखते हैं और कारण बस एक ही है

रवीश अब अपने दर्शकों से लगभग ब्रेकअप को उतारू प्रेमिका की तरह ब्लॉक करने लगे हैं, वो कहने लगे हैं कि तुम्हारी ही सब गलती थी, तुमने मुझे TRP नहीं दी, तुमने मेरे एजेंडा को प्राथमिकता नहीं माना। जब मुझे तुम्हारी जरूरत थी, तब तुम देशभक्त हो गए।
स्वरा भास्कर

प्रचार के लिए ब्लाउज़ सिलवाई, 20 साड़ियाँ खरीदी, ताकि बड़े मुद्दों पर बात कर सकूँ: स्वरा भास्कर

स्वरा भास्कर ने स्वीकार करते हुए बताया कि उन्हें प्रचार के लिए बुलाया गया क्योंकि वो हीरोइन हैं और इस वजह से ही उन्हें एक इमेज बनाना आवश्यक था। इसी छवि को बनाने के लिए उन्होंने 20 साड़ियाँ खरीदीं और और कुछ जूलरी खरीदी ताकि ‘बड़े मुद्दों पर’ बात की जा सके।
राजदीप सरदेसाई

राजदीप भी पलट गए? विपक्ष के EVM दावे को फ़रेब कहा… एट टू राजदीप?

राजदीप ने यहाँ तक कहा कि मोदी के यहाँ से चुनाव लड़ने की वजह से वाराणसी की सीट VVIP संसदीय सीट में बदल चुकी है। जिसका असर वहाँ पर हो रहे परिवर्तन के रूप में देखा जा सकता है।
राहुल गाँधी, बीबीसी

2019 नहीं, अब 2024 में ‘पकेंगे’ राहुल गाँधी: BBC ने अपने ‘लाडले’ की प्रोफाइल में किया बदलाव

इससे भी ज्यादा बीबीसी ने प्रियंका की तारीफ़ों के पुल बांधे हैं। प्रियंका ने आज तक अपनी लोकप्रियता साबित नहीं की है, एक भी चुनाव नहीं जीता है, अपनी देखरेख में पार्टी को भी एक भी चुनाव नहीं जितवाया है, फिर भी बीबीसी उन्हें चमत्कारिक और लोकप्रिय बताता है।

ताज़ा ख़बरें

हमसे जुड़ें

41,476फैंसलाइक करें
7,944फॉलोवर्सफॉलो करें
64,172सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

ज़रूर पढ़ें

शेयर करें, मदद करें: