Wednesday, July 15, 2020
Home विचार राजनैतिक मुद्दे क्या इंदिरा गाँधी इसी तरह मैदान छोड़कर भागतीं जिस तरह 'इंदिरा 2.0' भागी है?

क्या इंदिरा गाँधी इसी तरह मैदान छोड़कर भागतीं जिस तरह ‘इंदिरा 2.0’ भागी है?

कॉन्ग्रेस वर्तमान लोकसभा चुनाव नतीजे सामने आने से पहले ही हार गई है। ये बुजुर्ग पार्टी किसी भी तरह से ICU में लेटे रहकर बस स्वयं के जिन्दा होने का प्रमाण देना चाह रही है कि आज नहीं तो कल इसके अच्छे दिन आएँगे। हालाँकि, अच्छे दिनों के लिए उन्हें परिवारवाद की लालसा से बहार निकला ही होगा लेकिन ये काम अहंकार में डूबे हुए राजनीति के इस खानदान विशेष के लिए संभव नहीं है।

ये भी पढ़ें

आशीष नौटियाल
पहाड़ी By Birth, PUN-डित By choice

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान माहौल को याद करें तो हम पाएँगे कि ये वो समय था जब देश भर में मोदी लहर अपने चरम पर थी। जनता ‘अराजकतावादी’ कॉन्ग्रेस के भ्रष्टाचार, आत्मुग्धता में डूबे एकतरफा संवाद और सत्तापरस्ती से ऊब चुकी थी। ऐसे समय में लोगों को नरेंद्र मोदी के रूप में शायद पहली बार एक ऐसा चेहरा मिला, जिसमें हर किसी ने खुद की परछाईं देखी।

वहीं, दूसरी ओर सदियों से ही परिवारवाद में लिप्त कॉन्ग्रेस के सामने ऐसे माहौल में चिरयुवा राहुल गाँधी को प्रधानमंत्री पद का दावेदार बताकर 2014 के चुनाव में जुआ खेलना बहुत बड़ा चैलेंज बन गया था। इसका कारण बहुत ही सीधा सा था! कॉन्ग्रेस कभी नहीं चाहती कि वो पहले से ही हारी हुई लड़ाई में अपने सबसे पसंदीदा और दुलारे राजकुमार को हारने के लिए आगे खड़ा करती। ऐसे में कॉन्ग्रेस ने इन्तजार करना बेहतर समझा और अपने जीतने की तैयारियों से ज्यादा ऊर्जा पार्टी के पारंपरिक अध्यक्ष राहुल गाँधी को सुरक्षित करने और उनकी छवि बनाने पर झोंक दी।

वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कॉन्ग्रेस के सामने यही प्रश्न फिर खड़ा हो गया कि क्या राहुल गाँधी मुख्य चेहरा बनाए जाने लायक तैयार हो चुके हैं? इसका जवाब खुद राहुल गाँधी हैं। आलू से सोना बनाने जैसी विधियों से देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का दावा करने वाले और झूठे कागजों के आधार पर मोदी सरकार को घोटालों में लिप्त बताने की नादान कोशिश करने वाले देश की सबसे बुजुर्ग राष्ट्रीय पार्टी के चिरयुवा अध्यक्ष राहुल गाँधी शायद पार्टी की उम्मीदों पर आज भी खरे नहीं उतर रहे हैं। हालाँकि, ये भी दिलचस्प बात है कि इससे उनके पार्टी अध्यक्ष होने और पार्टी में निर्विवाद रूप से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार होने पर कोई सवाल खड़ा नहीं होता है।

ऐसे समय में अब गाँधी परिवार के पास आखिरी विकल्प था राहुल गाँधी की बहन प्रियंका गाँधी! आखिरकार वो दिन भी आ ही गया जब कॉन्ग्रेस ने प्रियंका गाँधी को पूर्ण रूप से राजनीति में उतारने का फैसला लिया। इस फैसले के बाद एक ऐसा गिरोह अचानक सक्रिय हो गया, जो 2014 के आम चुनावों के बाद से, या कहा जाए तो कॉन्ग्रेस के हाथों से सत्ता छिन जाने से अपनी हर उम्मीद और आशा हारकर लगभग शिथिल पड़ चुका था।

प्रियंका गाँधी के नाम की घोषणा होते ही अचानक से इस गिरोह में शक्ति का संचार फूट पड़ा। मीडिया से लेकर समाचार पत्रों तक में एक नए उत्साह का संचार देखने को मिला। इनमें सबसे ज्यादा जोर उन लोगों ने लगाया, जो मोदी विरोध में अवार्ड वापस करना चाहते थे, लेकिन उनके पास वापस करने के लिए अवार्ड ही नहीं थे।

मीडिया ने यह बताने का हर संभव प्रयास किया कि प्रियंका गाँधी इंदिरा गाँधी की ही अवतार हैं। प्रियंका गाँधी की साड़ी से लेकर उनकी नाक, कान और बालों तक को इंदिरा के रंग में रंगने की कोशिश की जाने लगी। यहाँ तक भी चर्चा की जाने लगी कि प्रियंका गाँधी चलती भी अपनी दादी इंदिरा गाँधी की ही तरह हैं।

सारा गाँधी परिवार और उनके सिपहसालार ये बात अच्छे से जानते हैं कि भाई राहुल के सुनहरे राजनीतिक करियर के लिए उनकी बहन प्रियंका का प्रत्यक्ष रूप से राजनीति में आना ही उनके लिए सबसे बड़ी बाधा हो सकती है। फिर भी यह बड़ा निर्णय लिया गया और पार्टी महासचिव पद उन्हें सौंपकर मैदान में उतारा गया। यहीं से असल खेल शुरू हुआ।

प्रियंका गाँधी की छवि एक आदर्श भारतीय नारी के रूप में बनाने की तैयारियाँ की जाने लगीं। मीडिया ने प्रियंका गाँधी द्वारा अपने पति को लेकर दिए गए बयानों को मुख्य पेज पर छापा। कभी वो कहती सुनी गईं कि वो हर हाल में अपने पति, यानी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रोजाना ED ऑफिस के चक्कर काट रहे रॉबर्ट वाड्रा के साथ खड़ी रहेंगी, तो कभी वो मंच से अपने बच्चों का परिचय करवाती हुई नजर आईं।

मोदी लहर के सामानांतर ही ऐसी हवा बनाने का प्रयास किया गया जो इंदिरा गाँधी से मिलती-जुलती हो। ऐसा करते हुए विपक्ष ने बेवकूफी में यह भी साबित कर दिया कि उनके पास मोदी के बराबर तो क्या, उनके आस-पास ठहरने वाला तक कोई समकालीन नेता नहीं है और इसी कारण से उसे प्रियंका गाँधी में ही इंदिरा गाँधी की छवि ठूँसकर 2019 के चुनाव के लिए तैयार करना पड़ रहा है। कुछ समय तक ऐसी भी ख़बरें मैदान में उतारी गईं कि बनारस से नरेंद्र मोदी को टक्कर देने के लिए सीधा प्रियंका गाँधी ही अब मुकाबले में उतारी जाएँगी। लेकिन, कल बनारस में प्रधानमंत्री नरेंद्र की रैली में बिना ‘फोटोशॉप तस्वीरों’ के उमड़े जनसैलाब ने विपक्ष की हवा टाइट कर डाली।

इंदिरा गाँधी वर्जन-2 की छवि गढ़ने की प्रक्रिया युद्ध स्तर पर चल ही रहीं थी कि अचानक एक दिन मुंगेरीलाल ने सपना देखते-देखते अपने एकमात्र दूध के घड़े पर भी लात दे मारी और उसे भी फोड़ दिया। इस तरह से मीडिया गिरोह से लेकर तमाम मोदी विरोधियों के सपने और अरमानों का शीघ्रपतन हो गया।

प्रियंका गाँधी के मोदी के खिलाफ बनारस से चुनाव लड़ने की बात कॉन्ग्रेस का एक और जुमला साबित हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता में आज भी कोई कमी नहीं है, यही देखकर कॉन्ग्रेस ने अपनी आखिरी उम्मीद, यानी इंदिरा गाँधी जैसी दिखने वाली प्रियंका गाँधी को पीछे खींचना ही उचित समझा। और कल शाम तक उस तमाम मीडिया गिरोह में सन्नाटा छा गया, जिसने पिछले 2 महीने प्रियंका गाँधी के रूप में इंदिरा गाँधी से 2019 का आम चुनाव लड़ाने का सपना देखा था।

पूरे 5 साल तक कॉन्ग्रेस पार्टी अध्यक्ष राहुल गाँधी जनता से झूठे सबूतों के आधार पर सिर्फ गिनी-चुनी बातें कहता आया है। जैसे, चौकीदार चोर है, देश में अराजकता फैला रहा है, संविधान खत्म कर रहा है, देश में साम्प्रदायिकता बढ़ा रहा है, अम्बानी को देश बेच दिया। और अब इसी अध्यक्ष ने चुनाव के वक़्त बनारस में अजय राय नामक घिसापिटा प्रत्याशी मोदी के सामने उतारा है। सवाल सीधा सा है, यदि राहुल गाँधी के अनुसार मोदी देश की संपदा बेच रहा है, हत्यारा है, चोर है, कॉर्पोरेट का दलाल है, तो राजनैतिक शिष्टाचार के नाम पर उन्हें संसद में आखिर क्यों भेज रहे हो? जब अन्य राजनीतिक दल अपने प्रत्याशी चुन रहे होते हैं, तब कॉन्ग्रेस बलि के बकरे तलाशने में ही अपनी सारी शक्ति लगा देती है।

सोशल मीडिया पर कल शाम का मंजर निराश कर देने वाला था। प्रियंका गाँधी से उम्मीद लगाए हुई तमाम मोदी विरोधी खुद को कोड़े मारते नजर आए। इनकी प्रतिक्रियाएँ देखकर स्पष्ट था कि इन सबके लिए अपनी कुंठा को छुपा पाना अब संभव नहीं है। सब्र का बाँध ऐसा टूटा कि 5 साल तक अंधाधुंध तरीके से मोदी विरोध करने वाले यह तक कहते देखे गए कि प्रियंका गाँधी से ज्यादा दम तो अरविन्द केजरीवाल में था, जो कम से कम अपने कहे के अनुसार वाराणसी से मैदान छोड़कर भागा तो नहीं।

जाहिर सी बात है कि कॉन्ग्रेस वर्तमान लोकसभा चुनाव नतीजे सामने आने से पहले ही हार गई है। ये बुजुर्ग पार्टी किसी भी तरह से ICU में लेटे रहकर बस स्वयं के जिन्दा होने का प्रमाण देना चाह रही है कि आज नहीं तो कल इसके अच्छे दिन आएँगे। हालाँकि, अच्छे दिनों के लिए उन्हें परिवारवाद की लालसा से बहार निकला ही होगा लेकिन ये काम अहंकार में डूबे हुए राजनीति के इस खानदान विशेष के लिए संभव नहीं है।

एक और जनता का नेता खड़ा है और अगर कॉन्ग्रेस सोच रही है कि वंशवाद के हथियार से वो इस महामानव का मुकाबला कर पाएगी, तो यह बहुत ही बचकानी बात होगी। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि जनता इस स्नेह से आखिरी बार खुद को सिर्फ महात्मा गाँधी से ही जोड़ पाई थी। यदि गाँधी आजादी से पहले के महामानव थे, तो नरेंद्र मोदी आजादी के बाद के महामानव हैं।

फ़िलवक़्त, प्रियंका गाँधी को वाराणसी से चुनाव न लड़वाकर कॉन्ग्रेस ने एक तरह से ‘इंदिरा गाँधी 2.0’ फिल्म के फ्लॉप होने की घोषणा कर दी है। एक आखिरी सवाल जरूर बनता है कि क्या प्रियंका गाँधी जैसी दिखने वाली उनकी दादी इंदिरा भी इसी तरह से मोदी के सामने मैदान छोड़कर भाग जातीं, जिस तरह से ‘इंदिरा 2.0’ भागी हैं? जवाब एक ही है, “मोदी है, तो मुमकिन है।”

एक नजर मीडिया गिरोह विद्यालय के ‘कुलपतियों’ द्वारा की गई उन तमाम क्यूट कोशिशों पर, जो नाकाम रहीं


  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

आशीष नौटियाल
पहाड़ी By Birth, PUN-डित By choice

ख़ास ख़बरें

गहलोत ने की राहुल गाँधी के खिलाफ गैंगबाजी, 26 सीटों पर समेटा पार्टी को: सचिन पायलट ने कहा – ‘मैं अभी भी कॉन्ग्रेसी’

"200 सदस्यीय विधानसभा में जब कॉन्ग्रेस 21 सीटों पर सिमट गई, तब मैंने पार्टी की कमान संभाली। मैं जमीन पर मेहनत करता रहा और गहलोत तब चुप थे।"

कामराज प्लान: कॉन्ग्रेस के लिए दवा या फिर पायलट-सिंधिया जैसों को ठिकाने लगाने का फॉर्मूला?

कामराज प्लान। क्या यह राजनीतिक दल को मजबूत करने वाली संजीवनी बूटी है? या फिर कॉन्ग्रेस को परिवार की बपौती बनाने वाली खुराक?

₹9 लाख अस्पताल में रहने की कीमत : बेंगलुरु में बिल सुनते भागा कोरोना संदिग्ध, नहीं हुआ एडमिट

एक मरीज को कोलंबिया एशिया हॉस्पिटल ने 9.09 लाख रुपए का संभावित बिल थमा दिया। जबकि उन्हें कोरोना नहीं था, वो सिर्फ कोरोना संदिग्ध थे।

बकरीद पर कुर्बानी की छूट माँग रहे महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेसी नेता, गणेशोत्सव पर लगाए गए हैं कई सारे प्रतिबंध

महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस मंत्री असलम शेख लगातार बकरीद पर छूट दिलवाने के लिए सरकार पर दबाव बना रहे हैं और उप मुख्यमंत्री अजीत पवार के साथ...

विदेश में पढ़ाई के दौरान मोहब्बत, पहले मजहब फिर सारा के CM पिता फारूक अब्दुल्ला बने रोड़ा: सचिन पायलट की लव स्टोरी

सारा और सचिन पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय के व्हार्टन स्कूल में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के दौरान एक दूसरे से मिले थे। एक दूसरे को डेट करने के बाद, दोनों ने सारा के परिवार की तरफ से लगातार आपत्तियों के बावजूद 2004 में एक बंधन में बँधने का फैसला किया।

केजरीवाल शिक्षा मॉडल: ‘योग्यतम की उत्तरजीविता’ के सिद्धांत की भेंट चढ़ते छात्रों का भविष्य चर्चा में क्यों नहीं आता

आँकड़े बताते है कि वर्ष 2008-2015 तक दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का परीक्षा परिणाम कभी भी 85% से कम नही हुआ। लेकिन राजनीतिक लाभ और मीडिया मैनेजमेंट के लिए बच्चों को आक्रामक रूप से 9वीं और 11वीं में रोक दिया जाना कितना उचित है?

प्रचलित ख़बरें

‘लॉकडाउन के बाद इंशाअल्लाह आपको पीतल का हिजाब पहनाया जाएगा’: AMU की छात्रा का उत्पीड़न

AMU की एक छात्रा ने पुलिस को दी शिकायत में कहा है कि रहबर दानिश और उसके साथी उसका उत्पीड़न कर रहे। उसे धमकी दे रहे।

टीवी और मिक्सर ग्राइंडर के कचरे से ‘ड्रोन बॉय’ प्रताप एनएम ने बनाए 600 ड्रोन: फैक्ट चेक में खुली पोल

इन्टरनेट यूजर्स ऐसी कहानियाँ साझा कर रहे हैं कि कैसे प्रताप ने दुनिया भर के विभिन्न ड्रोन एक्सपो में कई स्वर्ण पदक जीते हैं, 87 देशों द्वारा उसे आमंत्रित किया गया है, और अब पीएम मोदी के साथ ही डीआरडीपी से उन्हें काम पर रखने के लिए कहा गया है।

‘मुझे बचा लो… बॉयफ्रेंड हबीब मुझे मार डालेगा’: रिदा चौधरी का आखिरी कॉल, फर्श पर पड़ी मिली लाश

आरोप है कि हत्या के बाद हबीब ने रिदा के शव को पंखे से लटका कर इसे आत्महत्या का रूप देने का प्रयास किया। गुरुग्राम पुलिस जाँच कर रही है।

कट्टर मुस्लिम किसी के बाप से नहीं डरता: अजान की आवाज कम करने की बात पर फरदीन ने रेप की धमकी दी

ये तस्वीर रीमा (बदला हुआ नाम) ने ट्विटर पर 28 जून को शेयर की थी। इसके बाद सुहेल खान ने भी रीमा के साथ अभद्रता से बात की थी।

मैं हिंदुओं को सबक सिखाना चाहता था, दंगों से पहले तुड़वा दिए थे सारे कैमरे: ताहिर हुसैन का कबूलनामा

8वीं तक पढ़ा ताहिर हुसैन 1993 में अपने पिता के साथ दिल्ली आया था और दोनों पिता-पुत्र बढ़ई का काम करते थे। पढ़ें दिल्ली दंगों पर उसका कबूलनामा।

विदेश में पढ़ाई के दौरान मोहब्बत, पहले मजहब फिर सारा के CM पिता फारूक अब्दुल्ला बने रोड़ा: सचिन पायलट की लव स्टोरी

सारा और सचिन पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय के व्हार्टन स्कूल में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के दौरान एक दूसरे से मिले थे। एक दूसरे को डेट करने के बाद, दोनों ने सारा के परिवार की तरफ से लगातार आपत्तियों के बावजूद 2004 में एक बंधन में बँधने का फैसला किया।

गहलोत ने की राहुल गाँधी के खिलाफ गैंगबाजी, 26 सीटों पर समेटा पार्टी को: सचिन पायलट ने कहा – ‘मैं अभी भी कॉन्ग्रेसी’

"200 सदस्यीय विधानसभा में जब कॉन्ग्रेस 21 सीटों पर सिमट गई, तब मैंने पार्टी की कमान संभाली। मैं जमीन पर मेहनत करता रहा और गहलोत तब चुप थे।"

कामराज प्लान: कॉन्ग्रेस के लिए दवा या फिर पायलट-सिंधिया जैसों को ठिकाने लगाने का फॉर्मूला?

कामराज प्लान। क्या यह राजनीतिक दल को मजबूत करने वाली संजीवनी बूटी है? या फिर कॉन्ग्रेस को परिवार की बपौती बनाने वाली खुराक?

₹9 लाख अस्पताल में रहने की कीमत : बेंगलुरु में बिल सुनते भागा कोरोना संदिग्ध, नहीं हुआ एडमिट

एक मरीज को कोलंबिया एशिया हॉस्पिटल ने 9.09 लाख रुपए का संभावित बिल थमा दिया। जबकि उन्हें कोरोना नहीं था, वो सिर्फ कोरोना संदिग्ध थे।

बकरीद पर कुर्बानी की छूट माँग रहे महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेसी नेता, गणेशोत्सव पर लगाए गए हैं कई सारे प्रतिबंध

महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस मंत्री असलम शेख लगातार बकरीद पर छूट दिलवाने के लिए सरकार पर दबाव बना रहे हैं और उप मुख्यमंत्री अजीत पवार के साथ...

Covid-19: भारत में अब तक 23727 की मौत, 311565 सक्रिय मामले, आधे से अधिक संक्रमित महाराष्ट्र, तमिलनाडु और दिल्ली में

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटे में देशभर में 28,498 नए मामले सामने आए हैं और 553 लोगों की कोरोना वायरस के कारण मौत हुई है।

विदेश में पढ़ाई के दौरान मोहब्बत, पहले मजहब फिर सारा के CM पिता फारूक अब्दुल्ला बने रोड़ा: सचिन पायलट की लव स्टोरी

सारा और सचिन पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय के व्हार्टन स्कूल में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के दौरान एक दूसरे से मिले थे। एक दूसरे को डेट करने के बाद, दोनों ने सारा के परिवार की तरफ से लगातार आपत्तियों के बावजूद 2004 में एक बंधन में बँधने का फैसला किया।

फ्रांस के पिघलते ग्लेशियर से मिले 1966 के भारतीय अखबार, इंदिरा गाँधी की जीत का है जिक्र

पश्चिमी यूरोप में मोंट ब्लैंक पर्वत श्रृंखला पर पिघलते फ्रांसीसी बोसन्स ग्लेशियरों से 1966 में इंदिरा गाँधी की चुनावी विजय की सुर्खियों वाले भारतीय अखबार बरामद हुए हैं।

नेपाल में हिंदुओं ने जलाया इमरान खान का पुतला: पाक में मंदिर निर्माण रोके जाने और हिंदू समुदाय के उत्पीड़न का किया विरोध

"पाकिस्तान में हिंदू अल्पसंख्यक अभी भी सरकार द्वारा प्रताड़ित किए जा रहे हैं। सरकार हिंदू मंदिरों और मठों के निर्माण की अनुमति नहीं देकर एक और बड़ा अपराध कर रही है।"

केजरीवाल शिक्षा मॉडल: ‘योग्यतम की उत्तरजीविता’ के सिद्धांत की भेंट चढ़ते छात्रों का भविष्य चर्चा में क्यों नहीं आता

आँकड़े बताते है कि वर्ष 2008-2015 तक दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का परीक्षा परिणाम कभी भी 85% से कम नही हुआ। लेकिन राजनीतिक लाभ और मीडिया मैनेजमेंट के लिए बच्चों को आक्रामक रूप से 9वीं और 11वीं में रोक दिया जाना कितना उचित है?

‘अगर यहाँ एक भी मंदिर बना तो मैं सबसे पहले सुसाइड जैकेट पहन कर उस पर हमला करूँगा’: पाकिस्तानी शख्स का वीडियो वायरल

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक युवक पाकिस्तान में मंदिर बनाने या बुतपरस्ती करने पर उसे खुद बम से उड़ाने की बात कहते हुए देखा जा सकता है।

हमसे जुड़ें

239,591FansLike
63,527FollowersFollow
274,000SubscribersSubscribe