Sunday, August 1, 2021
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इशरत मुनीर: कश्मीर के रखवाले मुस्लिमों की कहानी (भाग 1)

दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा की 25 वर्षीया इशरत मुनीर का केवल एक ही ख्वाब था कि उसका कश्मीर पाकिस्तान पोषित आतंकवाद से आज़ाद हो इसके लिए उसने खुद आतंकवाद से लड़ने की ठानी।

बीते कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर रोंगटे खड़े करने वाला एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें आतंकवादी फेरन पहने एक मासूम लड़की की हत्या कर रहे हैं। दस सेकंड के इस वीडियो में लड़की हाथ जोड़े घुटनों बल बैठी है, तभी अचानक आतंकी उसके सर में 2 गोलियाँ मारते हैं। इस्लामिक स्टेट के तरीके से की गई इस बर्बरतापूर्ण हत्या का सच जब सामने आया तो पता चला कि कश्मीर के शोपियाँ में जिस लड़की की हत्या की गई उसका नाम इशरत मुनीर है।

दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा की 25 वर्षीया इशरत मुनीर का केवल एक ही ख्वाब था कि उसका कश्मीर पाकिस्तान पोषित आतंकवाद से आज़ाद हो, वहाँ शांति और खुशहाली हो। इसके लिए उसने खुद आतंकवाद से लड़ने की ठानी और आतंक के सफाए में सुरक्षाबलों का साथ दिया। इस राह में पल-पल मौत का ख़तरा था लेकिन इशरत के इरादे बुलंद थे।

हिज़्ब-उल-मुजाहिदीन के आतंकियों के हाथों मारे जाने से पहले इशरत 15 आतंकवादियों को ढेर करवाने में सफल रही थी जिनमें अल-बद्र चीफ और A++ ग्रेड का आतंकी ज़ीनत-उल-इस्लाम भी शामिल था। लेकिन आखिरकार आतंकियों को इशरत के इरादों का भनक लग गयी और उन्होंने उसे 31 जनवरी को पुलवामा से अगवा कर लिया। आतंकियों ने इशरत को शोपियाँ में ड्रगाड के जंगलों में ले जाकर इस्लामिक स्टेट स्टाइल में उसकी हत्या करने का वीडियो भी बनाया।

इशरत मुनीर आतंकी ज़ीनत-उल-इस्लाम की ममेरी बहन थी। लिहाज़ा आतंकियों तक उसकी पहुँच आसान थी। धीरे-धीरे विश्वास जीतने के बाद इशरत इन आतंकियो के लिए ओवर-द -ग्राउंड-वर्कर के तौर पर काम करते हुए ज़रूरी सामान सप्लाई करती थी। साथ ही आतंकियों का संदेश दूसरे ओवर-ग्राउंड-वर्कर तक पहुंचाने का काम भी करती थी। इसलिए आतंकियों की लोकेशन की खबर इशरत के पास होती थी।

अपने मिशन के तहत इशरत ने आतंकियों पर पहला वार 1 अप्रैल 2018 को किया। इशरत की सटीक खबर पर कार्यवाही करते हुए शोपियाँ के ड्रगाड इलाके में सुरक्षा बलों ने आतंकियों पर धावा बोला और हिज़्ब-उल-मुजाहिदीन के एक साथ 8 आतंकियों को मार गिराया। सुरक्षाबलों के लिए यह एक बड़ी कामयाबी थी। मारे जाने वालों में हिज़्ब-उल कमांडर इश्फ़ाक़ अहमद ठोकर, रईस अहमद ठोकर और ज़ुबैर तुर्रे जैसे आतंकी शामिल थे।

3 मई 2018 को इशरत ने सुरक्षाबलों को ज़ीनत-उल-इस्लाम की खबर दी जो कई सालों से आतंकी घटनाओं को अंजाम दे रहा था। वह शोपियाँ के तुर्कावानगाम गाँव में अपने 4 साथियों के साथ छिपा था। ज़ीनत पर सुरक्षाबलों ने धावा बोला लेकिन स्थानीय लोगों ने भारी पत्थरबाज़ी करनी शुरू कर दी जिसका फायदा उठाकर पाँच आतंकी भागने में कामयाब हो गए।

तुर्कावानगाम एनकाउंटर फेल होने के बाद इशरत को जान का ख़तरा बढ़ गया था लेकिन वह अपने मिशन से नहीं हटी। 4 अगस्त 2018 को इशरत की सूचना के आधार पर शोपियाँ में हिज़्ब-उल और अल-बद्र के 5 आतंकियों को घेर लिया गया। 12 घंटे चले इस ऑपरेशन में पाँचों आतंकी ढेर कर दिए गए। इस एनकाउंटर में हिज़्ब-उल कमांडर उमर मलिक भी मारा गया जो कि पुलिसकर्मियों की हत्या करने और हथियार छीनने के मामले में वांछित था।

इशरत अब तक 13 आतंकियों को जहन्नुम का रास्ता दिखा चुकी थी, लेकिन उसका असली टारगेट 12 लाख का इनामी अल-बद्र चीफ ज़ीनत अभी ज़िंदा था। पिछले एनकाउंटर्स में वह बच निकलने में कामयाब हो गया था। लेकिन 13 जनवरी 2019 को कुलगाम ज़िले के कठपोरा इलाके में इशरत की सटीक सूचना के आधार पर सुरक्षाबलों ने ऐसा जाल बिछाया कि ज़ीनत-उल-इस्लाम भाग नहीं पाया।

ज़ीनत आईईडी एक्सपर्ट और आतंकियों के रिक्रूटमेंट का एक्सपर्ट था। ज़ीनत की मौत के साथ साउथ कश्मीर में आतंक का बहुत बड़ा किला ढहाने में कामयाबी मिली थी। लेकिन इसके बाद हिज़्ब-उल चीफ़ रियाज़ नाइकू को इशरत पर शक हो गया और उसने इस्लामिक कानून शरिया के तहत इशरत की हत्या कर दी।

अपनी मौत से पहले कश्मीर की बेटी इशरत मुनीर मिट्टी का क़र्ज़ अदा कर चुकी थी। कश्मीर को बचाने वालों में इशरत अकेली नहीं थी। सत्तर वर्षों से घाटी के राष्ट्रवादी मुस्लिमों ने कश्मीर में पाकिस्तान प्रायोजित आतंक को परास्त करने में भूमिका निभाई है। और जब भी आतंकियों को ऐसा लगा कि उनका प्रोपेगंडा फेल हो रहा है तब उन्होंने देशभक्त मुस्लिमों की सार्वजनिक हत्या कर ख़ौफ़ पैदा करने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाए।

मजे की बात यह कि कश्मीर के इन मुस्लिमों की बहादुरी और शहादत को या तो मेन स्ट्रीम मीडिया कवर नहीं करता या दुष्प्रचार के इरादे से गलत रिपोर्टिंग करता है।

कश्मीर के राष्ट्रवादी मुस्लिमों की आगे की कहानी अगले भाग में।

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