Saturday, September 19, 2020
Home विचार मीडिया हलचल राहुल गाँधी की सुस्त रणनीति से चिंतित मीडिया, ‘इन्वेस्टमेंट’ खतरे में

राहुल गाँधी की सुस्त रणनीति से चिंतित मीडिया, ‘इन्वेस्टमेंट’ खतरे में

सत्ता की दलाली यानि ‘पावर-ब्रोकिंग’ की मलाई जो पहले कटती थी, और अब बंद हो गई। सरकारें बनवाने, गिरवाने, और बचाने में नेताओं के करीबी पत्रकारों की भूमिका पर काफी कुछ लिखा गया है।

इस बात में कोई दोराय नहीं कि नरेन्द्र मोदी के मुकाबले में आज कोई राष्ट्रीय रूप से पहचाने जा सकने वाला नेता है तो वह कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ही हैं। हालाँकि इसमें उनकी खुद की मेहनत शायद ही है। मेहनत अगर किसी का है तो वो उनके खानदान का है और उससे भी ज्यादा योगदान कुलीनतंत्र यानि Oligarchy की मलाई काटने के आदी हो चुके मीडिया के समुदाय विशेष का।

मोदी के सामने राहुल गाँधी की न तो उपलब्धियों की कोई ऐसी गंभीर फेहरिस्त है, न ही कोई ऐसी ‘गेम-चेंजिंग’ वैकल्पिक विचारधारा या योजना। बावजूद इसके, मीडिया के एक धड़े ने 5 साल तक यह उम्मीद नहीं छोड़ी कि कभी तो राहुल गाँधी उनके तारणहार बनेंगे! राहुल 2.0, 2.5, चिर-युवा- कोई ‘रूप’ नहीं बचा, जिसका आह्वाहन नहीं किया।

और अब जबकि इस सारी मेहनत के बाद अंततः लोगों ने राहुल गाँधी को थोड़ा-बहुत गंभीरता से लेना शुरू किया, लगा कि चलो 5 साल की मेहनत बर्बाद नहीं होगी- गठबंधन के कंधे पर सवार होकर राहुल गाँधी किसी तरह सरकार शायद बना लेंगे, और इतने ‘इन्वेस्टमेंट’ पर कुछ तो ‘रिटर्न’ बन ही जाएगा! पर राहुल गाँधी हैं कि गठबंधन पक्का करने में देर किए जा रहे हैं, और मोदी-शाह इस देरी का फायदा ले रहे हैं। ज़ाहिर सी बात है कि मीडिया के एक धड़े में कॉन्ग्रेस की संभावित हार को लेकर अफरा-तफरी का माहौल है।

निष्पक्षता का अब आवरण भी नहीं

नीचे इन ट्वीट्स में जो चिंता है, वह किसी नेता या घोषित आग्रह वाले व्यक्ति की हो तो कोई आपत्ति नहीं हो सकती। पर निष्पक्षता का छद्म आवरण ओढ़कर पत्रकारिता के नाम पर राजनीति करने वालों को कम-से-कम आवरण का तो लिहाज करना चाहिए था।

- विज्ञापन -

पर शायद राहुल गाँधी की जीत और मोदी की हार पर इन्होंने इतना कुछ ‘दाँव’ पर लगा दिया है कि अब खुलकर अपनी असलियत दिख जाने की कीमत पर भी भाजपा को हराने की हिमायत करना इनकी मजबूरी है।

इस वार्तालाप का तो आधार ही मोदी को हराने की दिशा में क्या सही हो रहा है और कहाँ और ‘मेहनत’ करनी होगी, इस पर चर्चा है। (Click कर के पूरा वार्तालाप पढ़िए, और खुद तय करिए)

पुराना है ये नापाक हो चुका याराना

पत्रकारों का अपने काम की परिभाषा, यानि हो रही घटनाओं को यथास्थिति पत्रांकित करने, से आगे जाकर राजनीति में सक्रिय हस्तक्षेप आज का नहीं है। इसकी जड़ें शायद सत्ता और पत्रकारिता जितनी ही पुरानी होंगी। फिर कई सारे महान नेताओं ने भी अपने राजनितिक करियर की शुरुआत पत्रकारिता से की थी- वाजपेयी, प्रणब मुखर्जी, भगत सिंह, बोस, आडवाणी, और पत्रकारिता के gold-standard गणेश शंकर विद्यार्थी।

पर इन सभी ने तो अपने राजनीतिक आग्रह कभी छिपाए नहीं, खुल कर एजेण्डा अखबारों में एजेण्डा पत्रकारिता की। कई अन्य पत्रकारों ने यथासंभव निष्पक्ष पत्रकरिता करते हुए भी अपनी निजी पसंद-नापसंद भी बता दी ताकि उनके पाठक उनसे प्रभावित हुए बगैर तथ्यों के आधार पर निर्णय करें।

लेकिन नहीं! पत्रकारिता का यह समुदाय विशेष इन लोगों के ठीक उलट है। यह पत्रकारिता को तो केवल जरिये के तौर पर इस्तेमाल करता है- असली मकसद होता है पहले पाठकों के बीच अपना एक प्रभाव-क्षेत्र कायम करना, और फिर उस प्रभाव क्षेत्र का प्रयोग कर उन नेताओं का एजेण्डा आगे बढ़ाना, जो इस प्रभाव-मण्डल की कीमत दे सके।

हमारी बात पर यकीन न हो तो कॉन्ग्रेस के मुखपत्र नेशनल हेराल्ड में छपे इस लेख को देख लीजिए जिसमें कैसे इस कैंसर की कहानी सुनाई गई है।

मोदी ने इस पर रोक लगा दी थी- इसी का दुःख है जो छलक-छलक कर बाहर आ रहा है।

अब न तो कोई खबर चलाने के पैसे आ रहे थे, न दबाने के। यहाँ तक कि कैबिनेट नोटों की जिस ‘सप्लाई’ के ज़रिए ‘ब्रेकिंग न्यूज़’ की सनसनीबाजी चलती थी, मोदी उस छेद को भी अगर बंद नहीं कर पाए तो बहुत छोटा जरूर कर दिया। राजदीप सरदेसाई का वो दर्द याद है कि अब प्रधानमंत्री के विशेष विमान में वीआईपी बनकर चलने नहीं मिलता??

तीसरी मलाई जो पहले कटती थी और अब बंद हो गई, वो है सत्ता की दलाली यानि ‘पावर-ब्रोकिंग’ की। सरकारें बनवाने, गिरवाने, और बचाने में नेताओं के करीबी पत्रकारों की भूमिका पर कई लोगों ने काफी कुछ लिखा है। दिल्ली प्रेस क्लब ही ‘लुटियंस ज़ोन’ शब्द के नकारात्मक हो जाने के पीछे सबसे बड़ा कारक है। अर्णब गोस्वामी ने तो यहाँ तक कहा था कि भारत में मीडिया हाउसों को मुख्यालय दिल्ली के बाहर कर देना चाहिए- चाहे वे मुंबई या बंगलौर से चलें, चाहे बिहार या दक्षिण भारत के गाँवों से, पर सत्ता से पत्रकारों की करीबी टूटनी चाहिए।

2G घोटाले में भी इसी समुदाय विशेष की विशेष सदस्या द्रमुक और कॉन्ग्रेस के बीच संवाद-सेतु का काम करते पकड़ीं गईं थीं।

राहुल गाँधी को वापिस लाने के लिए यह बेचैनी शायद इसी ‘पावर-ब्रोकिंग’ संस्कृति को वापिस लाने की जद्दोजहद है।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

SSR केस: 7 अक्टूबर को सलमान खान, करण जौहर समेत 8 टॉप सेलेब्रिटीज़ को मुज्जफरपुर कोर्ट में होना होगा पेश, भेजा गया नोटिस

मुजफ्फरपुर जिला न्यायालय ने सलमान खान और करण जौहर सहित आठ हस्तियों को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है। 7 अक्टूबर, 2020 को इन सभी को कोर्ट में उपस्थित होना है।

दिल्ली दंगों के पीछे बड़ी साज़िश की तरफ इशारा करती है चार्जशीट-59: सफूरा ज़रगर से उमर खालिद तक 15 आरोपितों के नाम शामिल

दिल्ली पुलिस ने राजधानी में हुए हिन्दू विरोधी दंगों के मामले में 15 लोगों को मुख्य आरोपित बनाया है। इसमें आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता ताहिर हुसैन, पूर्व कॉन्ग्रेस नेता इशरत जहाँ, खालिद सैफी, जेसीसी की सदस्य सफूरा ज़रगर और मीरान हैदर शामिल हैं।

कहाँ गायब हुए अकाउंट्स? सोनू सूद की दरियादिली का उठाया फायदा या फिर था प्रोपेगेंडा का हिस्सा

सोशल मीडिया में एक नई चर्चा के तूल पकड़ने के बाद कई यूजर्स सोनू सूद की मंशा सवाल उठा रहे हैं। कुछ ट्विटर अकाउंट्स अचानक गायब होने पर विवाद है।

दिल्ली का पत्रकार, चीनी महिला और नेपाली युवक… जासूसी के लिए शेल कंपनियों के जरिए मिलता था मोटा माल

स्वतंत्र पत्रकार राजीव शर्मा की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली पुलिस ने इस मामले में एक चीनी महिला और उसके नेपाली सहयोगी को भी गिरफ्तार किया है।

छात्रों को आत्मनिर्भर बनाने और शिक्षा प्रणाली को पुनर्जीवित करने में अहम भूमिका निभाएगी NEP-2020: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद

“मुझे इस बात का विश्वास है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारतीय शिक्षा के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगी। यह हमारे देश के छात्रों आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाएगी और उनका आने वाला कल बेहतर बनाएगी।"

दिशा की पार्टी में था फिल्म स्टार का बेटा, रेप करने वालों में मंत्री का सिक्योरिटी गार्ड भी: मीडिया रिपोर्ट में दावा

चश्मदीद के मुताबिक तेज म्यूजिक की वजह से दिशा की चीख दबी रह गई। जब उसके साथ गैंगरेप हुआ तब उसका मंगेतर रोहन राय भी फ्लैट में मौजूद था। वह चुपचाप कमरे में बैठा रहा।

प्रचलित ख़बरें

NCB ने करण जौहर द्वारा होस्ट की गई पार्टी की शुरू की जाँच- दीपिका, मलाइका, वरुण समेत कई बड़े चेहरे शक के घेरे में:...

ब्यूरो द्वारा इस बात की जाँच की जाएगी कि वीडियो असली है या फिर इसे डॉक्टरेड किया गया है। यदि वीडियो वास्तविक पाया जाता है, तो जाँच आगे बढ़ने की संभावना है।

जया बच्चन का कुत्ता टॉमी, देश के आम लोगों का कुत्ता कुत्ता: बॉलीवुड सितारों की कहानी

जया बच्चन जी के घर में आइना भी होगा। कभी सजते-संवरते उसमें अपनी आँखों से आँखे मिला कर देखिएगा। हो सकता है कुछ शर्म बाकी हो तो वो आँखों में...

कॉन्ग्रेस के पूर्व MLA बदरुद्दीन के बेटे का लव जिहाद: 10वीं की हिंदू लड़की से रेप, फँसा कर निकाह, गर्भपात… फिर छोड़ दिया

अजीजुद्दीन छत्तीसगढ़ के दुर्ग से कॉन्ग्रेस के पूर्व MLA बदरुद्दीन कुरैशी का बेटा है। लव जिहाद की इस घटना के मामले में मीडिया के सवालों से...

थालियाँ सजाते हैं यह अपने बच्चों के लिए, हम जैसों को फेंके जाते हैं सिर्फ़ टुकड़े: रणवीर शौरी का जया को जवाब और कंगना...

रणवीर शौरी ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कंगना को समर्थन देते हुए कहा है कि उनके जैसे कलाकार अपना टिफिन खुद पैक करके काम पर जाते हैं।

‘एक बार दिखा दे बस’: वीडियो कॉल पर अपनी बेटियों से प्राइवेट पार्ट दिखाने को बोलता था मोहम्मद मोहफिज, आज भेजा गया जेल

आरोपित की बेटी का कहना है कि उनका घर में सोना भी दूभर हो गया था। उनका पिता कभी भी उनके कपड़ों में हाथ डाल देता था और शारीरिक संबंध स्थापित करने की कोशिश करता था।

दिशा की पार्टी में था फिल्म स्टार का बेटा, रेप करने वालों में मंत्री का सिक्योरिटी गार्ड भी: मीडिया रिपोर्ट में दावा

चश्मदीद के मुताबिक तेज म्यूजिक की वजह से दिशा की चीख दबी रह गई। जब उसके साथ गैंगरेप हुआ तब उसका मंगेतर रोहन राय भी फ्लैट में मौजूद था। वह चुपचाप कमरे में बैठा रहा।

अलवर: भांजे के साथ बाइक से जा रही विवाहिता से गैंगरेप, वीडियो वायरल होने के बाद आरोपित आसम, साहूद सहित 5 गिरफ्तार

“पुलिस ने दो आरोपितों आसम मेओ और साहूद मेओ को गिरफ्तार किया और एक 16 वर्षीय नाबालिग को हिरासत में लिया। बाकी आरोपितों को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस की टीमें हरियाणा भेजी गई हैं।”

‘सभी संघियों को जेल में डालेंगे’: कॉन्ग्रेस समर्थक और AAP ट्रोल मोना अम्बेगाँवकर ने जारी किया ‘लिबरल डेमोक्रेसी’ का एजेंडा

मोना का कहना है कि वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर प्रतिबंध लगाएँगी और अगले पीएम बनने का मौका मिलने पर सभी संघियों को जेल में डाल देगी।

अतीक अहमद के फरार चल रहे भाई अशरफ को जिस घर से पुलिस ने किया था गिरफ्तार, उसे योगी सरकार ने किया जमींदोज

प्रयागराज विकास प्राधिकरण ने अतीक अहमद के भाई अशरफ के साले मोहम्मद जैद के कौशांबी स्थित करोड़ों के आलीशान बिल्डिंग पर भी सरकारी बुलडोजर चलाकर उसे जमींदोज कर दिया है।

नेटफ्लिक्स: काबुलीवाला में हिंदू बच्ची से पढ़वाया नमाज, ‘सेक्युलरिज्म’ के नाम पर रवींद्रनाथ टैगोर की मूल कहानी से छेड़छाड़

सीरीज की कहानी के एक दृश्य में (मिनी) नाम की एक लड़की नमाज अदा करते हुए दिखाई देती है क्योंकि उसका दोस्त काबुलीवाला कुछ दिनों के लिए उससे मिलने नहीं आया था।

कंगना ने किया योगी सरकार के सबसे बड़ी फिल्म सिटी बनाने के ऐलान का समर्थन, कहा- फिल्म इंडस्ट्री में कई और बड़े सुधारों की...

“हमें अपनी बॉलीवुड इंडस्ट्री को कई प्रकार के आतंकवादियों से बचाना है, जिसमें भाई भतीजावाद, ड्रग माफ़िया का आतंक, सेक्सिज़म का आतंक, धार्मिक और क्षेत्रीय आतंक, विदेशी फिल्मों का आतंक, पायरेसी का आतंक प्रमुख हैं।"

पत्रकार राजीव शर्मा के बारे में दिल्‍ली पुलिस ने किया खुलासा, कहा- 2016 से 2018 तक कई संवेदनशील जानकारी चीन को सौंपी

“पत्रकार राजीव शर्मा 2016 से 2018 तक चीनी खुफिया अधिकारियों को संवेदनशील रक्षा और रणनीतिक जानकारी देने में शामिल था। वह विभिन्न देशों में कई स्थानों पर उनसे मिलता था।”

SSR केस: 7 अक्टूबर को सलमान खान, करण जौहर समेत 8 टॉप सेलेब्रिटीज़ को मुज्जफरपुर कोर्ट में होना होगा पेश, भेजा गया नोटिस

मुजफ्फरपुर जिला न्यायालय ने सलमान खान और करण जौहर सहित आठ हस्तियों को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है। 7 अक्टूबर, 2020 को इन सभी को कोर्ट में उपस्थित होना है।

दिल्ली दंगों के पीछे बड़ी साज़िश की तरफ इशारा करती है चार्जशीट-59: सफूरा ज़रगर से उमर खालिद तक 15 आरोपितों के नाम शामिल

दिल्ली पुलिस ने राजधानी में हुए हिन्दू विरोधी दंगों के मामले में 15 लोगों को मुख्य आरोपित बनाया है। इसमें आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता ताहिर हुसैन, पूर्व कॉन्ग्रेस नेता इशरत जहाँ, खालिद सैफी, जेसीसी की सदस्य सफूरा ज़रगर और मीरान हैदर शामिल हैं।

उद्धव और आदित्य ठाकरे पर चुनावी हलफनामे में झूठ बोलने का आरोप: EC ने CBDT को शिकायत की जाँच के दिए आदेश

चुनाव आयोग ने केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) से ठाकरे और सुप्रिया सुले के खिलाफ प्राप्त उन शिकायतों की जाँच करने को कहा है, जिनमें उन पर लोकसभा / विधानसभा चुनावों के लिए अपने हलफनामे में गलत जानकारी साझा करने का आरोप लगाया गया।

70-80% प्रॉफिट के बावजूद अरुणाचल प्रदेश के लोगों ने चीनी उत्पादों का किया पूर्ण बहिष्कार: रिपार्ट

"चीनी उत्पाद आसानी से उपलब्ध थे और हमें उसमें लगभग 70-80 प्रतिशत मार्जिन मिलता हैं। जब हम भारतीय उत्पाद बेचते हैं तो हमारा लाभ 10-15 प्रतिशत होता है। लेकिन हमें भारतीय उत्पादों को ही बेचने का फैसला करना होगा।"

हमसे जुड़ें

260,559FansLike
77,926FollowersFollow
322,000SubscribersSubscribe
Advertisements