Saturday, September 19, 2020
Home विचार राजनैतिक मुद्दे सेकुलर मीडिया को माया में समावेशी दर्शन और योगी में विघटनकारी राजनीति नज़र आई

सेकुलर मीडिया को माया में समावेशी दर्शन और योगी में विघटनकारी राजनीति नज़र आई

मायावती की यह अपील कि 'मुस्लिम कॉन्ग्रेस को वोट न देकर अपना एक मुस्त वोट बसपा-सपा गठबंधन को दें।' इसमें इन मीडिया गिरोहों को, न लोकतंत्र की हत्या नज़र आई, न विघटनकारी राजनीति दिखी बल्कि मायावती के बयान में इस गिरोह को समावेशी अवधारणा नज़र आ गई।

लोकसभा चुनाव की सरगर्मियाँ जैसे-जैसे बढ़ रही है, जनधार खो चुकी पार्टियों, लुटेरे-घोटालेबाज, सजायाफ्ता नेताओं, सत्ता के लिए देश को गिरवी रखने वाली पार्टियों और प्रोपेगेंडा पत्रकारों सभी की साँसे-ऊपर नीचे हो रही हैं। लोकसभा के चुनावी दौर में एक तरफ कॉन्ग्रेस से जहाँ लगभग सभी बची-खुची साख समेटने वाली पार्टियाँ किनारा करती नज़र आईं तो साथ ही महागठबंधन के महामिलावट की पोल भी खुलती चली गई। और अब पूरा महागठबंधन, जो सिर्फ मोदी विरोध में कुढ़ते नेताओं का जुटान था, तिनके की तरह बिखर गया।

गाँव में एक कहावत है “बहुते जोगी मठ उजाड़” अर्थात एक जगह जहाँ इतने प्रधानमंत्री गठबंधन करें, वहाँ इनके स्वार्थबंधन का तेल तो निकलना ही था और वह निकला भी। खैर अभी, इस लेख में मुख्य फोकस में मायावती हैं और उनका अपने भतीजे अखिलेश के साथ जनाधार बचाने की जद्दोजहद पर भी पड़ी धुन्ध साफ की जाएगी। साथ ही मायावती के “सर्व-समावेशी” कमेंट पर मीडिया के पाखंड पर भी ध्यान आकर्षित करना चाहूँगा कि कैसे ये पूरा गिरोह लोकतंत्र की दुहाई देकर उसकी जड़ों में मट्ठा डालने पर आमादा है।

मायावती की रही-सही साख भी अब बची नहीं है इसमें कोई दो राय नहीं और अब जिस तरह उनके अपने ही उनसे किनारा कर रहे हैं उससे मायावती के बहुजन से लेकर सर्वजन की राजनीतिक धरातल भी खिसकती नज़र आ रही है। नफ़रत की राजनीति का बीज बोने वाली बसपा के सेफ वोटर भी अब कहीं और ठौर तलाश रहे हैं। क्योंकि वह अब जाति के नाम पर और ठगी के शिकार होने से बचने लगे हैं। जिसका अंदाजा मायावती को बखूबी है। इसलिए अब उनकी पूरी राजनीति खुद के कुनबे तक सिमट गई है।

यहाँ तक कि दलित राजनीति के दूसरे धड़े भी मायावती और उनकी पार्टी का साथ छोड़ रहे हैं क्योंकि उन्हें बसपा की डूबती नाव साफ दिखने लगी है। कभी बामसेफ की स्थापना कांशीराम ने की थी। बसपा की स्थापना के बाद कुछ चुनावों तक यह संगठन उसके लिए उसी तरह काम करता था, जैसे आरएसएस बीजेपी के लिए वैचारिक संगठन के रूप में काम करता है। हालाँकि, यह तुलना उतना सार्थक नहीं है, क्योंकि कभी भी RSS देश के ताने-बाने के विरोध में नहीं रहा, राष्ट्र सर्वोपरि होते हुए भी नफ़रत और घृणा को आरएसएस ने कभी भी बढ़ावा नहीं दिया। लेकिन कांशीराम ने अपनी राजनीतिक शुरुआत ही सवर्णों के खिलाफ अपमानजनक नारों के जरिए दलितों- पिछड़ों का ध्रुवीकरण करके सिर्फ उनका एकतरफा राजनीतिक लाभ उठाया। अब का बामसेफ तो इससे और आगे निकल गया है। वो सवर्णों में भी खासतौर से ब्राह्मणों को अपने निशाने पर लेने में घृणा और नफ़रत की सभी सीमाएँ लाँघ गया है।

- विज्ञापन -

बामसेफ ने बसपा से पूरी तरह किनारा कर लिया है, यहाँ तक कि बामसेफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वामन मेश्राम ने कह दिया, “उनके संगठन का मायावती और बसपा से कोई संबंध नहीं है और न ही लोकसभा चुनाव में कोई समर्थन। कांशीराम तक बसपा दलितों, बहुजनों के लिए काम कर रही थी, लेकिन जब से इसे मायावती ने हथिया लिया है तब से वो सर्वजन खासतौर पर ब्राह्मणजनों के लिए काम कर रही है। वो मिशन से भटक गई है। इसलिए उन्हें हमारा कोई समर्थन हो ही नहीं सकता।”

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मेश्राम ने यह भी कहा, “हाथी के पागल होने की संभावना होती है। इससे पहले कि हाथी पागल हो जाए, उस पर अंकुश लगाने के लिए महावत बैठा देना चाहिए। वरना हाथी हमारे ऊपर ही चढ़ जाएगा। कांशीराम जी ने जो हाथी (बसपा) पैदा किया था वो अब पागल हो गया है। बसपा अब लक्ष्य से भटक चुकी है। कांशीराम जी के समय वाली बसपा और अब वाली बसपा में काफी अंतर है। इसलिए हम उसके साथ नहीं हैं।”

दलितों के वोट पर अपना सर्वाधिकार का दावा बसपा, बामसेफ और प्रकाश अम्बेदकर भी करते रहे हैं लेकिन अब बामसेफ ने खुद को दलितों का का मसीहा बताते हुए, अन्य पर दलित हितों की अनदेखी का आरोप लगाया। महाराष्ट्र में प्रकाश अम्बेदकर के समर्थन पर मेश्राम ने कहा, “बिल्कुल, उन्हें भी समर्थन नहीं होगा, क्योंकि वो आरएसएस के इशारे पर काम कर रहे हैं। इसका मेरे पास सबूत है।” हालाँकि, जहाँ कुछ न मिले वहाँ हर जगह बीजेपी-RSS पर आरोप मढ़कर अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने के उपक्रम से ज़्यादा यह और कुछ नहीं है।

देखा जाए तो बहुजन के हित की बात करने वाली लगभग सभी पार्टियाँ लगातार उनसे छल करती रहीं हैं, स्वहित और स्वार्थसिद्धि ही उनका अब मुख्य ध्येय रह गया है। जिस बीजेपी के ऊपर ये आरोप मढ़ते रहे वो सही मायने में सर्वजन हित के लिए काम करते हुए “सबका साथ, सबका विकास” के मूलमंत्र के साथ लगातार आगे बढ़ रही है। बीजेपी का जनाधार इन सभी विपक्षी पार्टियों के एकजुट होने और हर तिकड़म लगाने के बाद भी लगातार बढ़ता जा रहा है।

आज ये सभी पार्टियाँ अपना जनाधार इस कदर खो चुकी है कि मायावती ने संभावित हार के मद्देनज़र लोकसभा चुनाव लड़ने से ही इनकार कर दिया है। फिर भी मायावती की पार्टी इस लोकसभा-चुनाव में सपा के साथ गठबंधन कर अपने लिए बची-खुची सम्भावना तलाश रही है। पिछले दिनों बसपा महासचिव सतीश मिश्रा की समधन ने भी बीजेपी ज्वाइन कर लिया।

ऐसे में राजनीतिक संजीवनी तलाश रही बसपा ने आज रामनवमी के दिन योगी आदित्यनाथ के हिन्दुओं से वोटिंग अपील पर अपनी बौखलाहट प्रदर्शित करते हुए ये भूल गई कि कुछ दिन पहले ही उन्होंने मुस्लिमों से एक झुण्ड में सपा-बसपा को वोट देने की अपील की थी। ऐसा करके भी वो सेक्युलर थी। और मायावती के प्रतिक्रिया में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के वोटिंग अपील के साथ ही एक बार फिर इन छद्म सेक्युलरों और वामपंथी पक्षकारों को खतरा नज़र आने लगा। हालाँकि, उस समय मायावती के मुस्लिमों के अपील में किसी को ध्रुवीकरण नज़र नहीं आया। सबने अपनी ज़ुबान सील ली थी।

ऊपर के वीडियो में, मायावती को स्पष्ट सुना जा सकता है कि वह मुस्लिम समुदाय से अपनी टिप्पणी और अपील पर चुनाव आयोग से माफी नहीं माँगेगी। वह यह भी सुनिश्चित करते हुए मुस्लिम समुदाय को यह स्पष्ट कर रही हैं कि वह अपनी टिप्पणी पर कायम है और उन्हें इस पर कोई अफसोस नहीं है।

एक तरफ जहाँ मायावती मुस्लिम समुदाय से अपनी अपील पर अड़ी हुई हैं, वहीं उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आड़े हाथों लेने के लिए ट्विटर का सहारा लिया कि वे ’अली’ और ‘बजरंगबली’ के बीच मतदाताओं को बाँट रहे हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ ने मुस्लिम वोटों की माँग और एकतरफा ध्रुवीकरण पर यह टिप्पणी की थी कि उनका कहना है कि केवल मुस्लिम ही उन्हें वोट दें, तो भाजपा हिंदुओं को एकजुट करना चाहेगी।

यहाँ दिलचस्प बात यह है कि मोदी, बीजेपी और योगी से घृणा की हद तक नफ़रत करने वाले इस गिरोह ने मायावती के मुस्लिम एकजुटता वाली टिप्पणी को बायपास करते हुए वामपंथी मीडिया गिरोह योगी आदित्यनाथ के अपील में साम्प्रदायिकता से लेकर और भी न जाने कौन-कौन से एंगल ढूँढ लाई है। जो यह दिखाता है कि कैसे पीएम मोदी को हराने के लिए लुटियंस मीडिया का बहुसंख्यक प्रोपेगेंडा अभियान अपना सब कुछ दाँव पर लगा चुका है। खैर अब तो जनता भी मीडिया के इन नमूनों के खूब मजे ले रही है। जिससे इन्हें मिर्ची लग रही है।

पता नहीं ये सभी मीडिया गिरोह कौन सा डोज लेते हैं कि एक तरफ बामसेफ से लेकर अपना जनाधार खो चुकी मायावती की यह अपील कि ‘मुस्लिम कॉन्ग्रेस को वोट न देकर अपना एक मुस्त वोट बसपा-सपा गठबंधन को दें।’ इसमें इन मीडिया गिरोहों को, न लोकतंत्र की हत्या नज़र आई, न विघटनकारी राजनीति दिखी बल्कि मायावती के बयान में इस गिरोह को समावेशी अवधारणा नज़र आ गई। जबकि मायावती के बयान पर योगी आदित्यनाथ की टिप्पणी विभाजनकारी-विघटनकारी हो गई। इस पूरे गिरोह को एक बार फिर लोकतंत्र खतरे में नज़र आने लगा। सब अपने बिलों से निकलकर उछल-कूद मचाने लगे।

यह बिलबिलाहट जनाधार खो चुकी लुटेरी पार्टियों और चाटुकार पक्षकारों का सामूहिक रुदन है। जब तक यह सर्वजन के हित की बात नहीं करेंगे, जबतक ये प्रोपेगेंडा को निष्पक्षता के लिफाफे में लपेट कर जनता को धोखा देते रहेंगे, तब तक इनका भला नहीं होने वाला। अब जनता जाग चुकी है, धोखे से न नेता को वोट मिलने वाला है और न ही पक्षकारों को रीडर या दर्शक।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

रवि अग्रहरि
अपने बारे में का बताएँ गुरु, बस बनारसी हूँ, इसी में महादेव की कृपा है! बाकी राजनीति, कला, इतिहास, संस्कृति, फ़िल्म, मनोविज्ञान से लेकर ज्ञान-विज्ञान की किसी भी नामचीन परम्परा का विशेषज्ञ नहीं हूँ!

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

86 साल बाद निर्मली और भपटियाही का ‘मिलन’, पर आत्मनिर्भर बिहार कब बनेगा

आखिर आत्मनिर्भर बिहार कब बनेगा जहाँ के लोग रोजगार के लिए पलायन करने के बदले रोजगार देने वाले बनें?

‘आपसे उम्मीद की जाती है कि निष्पक्ष रहो’: NDTV पत्रकार श्रीनिवासन को व्यवसायी राकेश झुनझुनवाला ने सिखाया नैतिकता का पाठ

साक्षात्कार के दौरान झुनझुनवाला ने एनडीटीवी पत्रकार और उनके मीडिया हाउस को मोदी से घृणा करने वाला बताया। उन्होंने पत्रकार से कहा, "आप सिर्फ़ सरकार की आलोचना करते हो।"

शाहीन बाग में जिस तिरंगे की खाई कसमें, उसी का इस्तेमाल पेट्रोल बम बनाने में किया: दिल्ली दंगों पर किताब में खुलासा

"वह प्रदर्शन जो महात्मा गाँधी, डॉ बीआर अम्बेडकर की तस्वीरों और तिरंगा फहराने से शुरू हुआ था उसका अंत तिरंगे से पेट्रोल बम बनाने में, दुकानों को, घरों को जलाने में हुआ।"

किसानों का विकास, बाजार का विस्तार, बेहतर विकल्प: मोदी सरकार के तीन विधेयकों की क्या होंगी खासियतें

मोदी सरकार ने तीन नए विधेयक पेश किए हैं ताकि कृषि उत्पादन के लिए सरल व्यापार को बढ़ावा मिले और मौजूदा एपीएमसी सिस्टम से वह आजाद हों, जिससे उन्हें अपनी उपज बेचने के और ज्यादा विकल्प व अवसर मिलें।

व्यंग्य: आँखों पर लटके फासीवाद के दो अखरोट जो बॉलीवुड कभी टटोल लेता है, कभी देख तक नहीं पाता

कालांतर में पता चला कि प्रागैतिहासिक बार्टर सिस्टम के साथ-साथ 'पार्टनर स्वापिंग' जैसे अत्याधुनिक तकनीक वाले सखा-सहेलियों के भी बार्टर सिस्टम भी इन पार्टियों में हुआ करते थे।

रेपिस्ट अब्दुल या असलम को तांत्रिक या बाबा बताने वाले मीडिया गिरोहों के लिए जस्टिस चंद्रचूड़ का जरूरी सन्देश

सुदर्शन न्यूज़ के कार्यक्रम पर जस्टिस चंद्रचूड़ मीडिया को सख्त संदेश दिया है कि किसी एक समुदाय को निशाना नहीं बनाया जा सकता है। लेकिन समुदाय का नाम नहीं लिया गया।

प्रचलित ख़बरें

कॉन्ग्रेस के पूर्व MLA बदरुद्दीन के बेटे का लव जिहाद: 10वीं की हिंदू लड़की से रेप, फँसा कर निकाह, गर्भपात… फिर छोड़ दिया

अजीजुद्दीन छत्तीसगढ़ के दुर्ग से कॉन्ग्रेस के पूर्व MLA बदरुद्दीन कुरैशी का बेटा है। लव जिहाद की इस घटना के मामले में मीडिया के सवालों से...

जया बच्चन का कुत्ता टॉमी, देश के आम लोगों का कुत्ता कुत्ता: बॉलीवुड सितारों की कहानी

जया बच्चन जी के घर में आइना भी होगा। कभी सजते-संवरते उसमें अपनी आँखों से आँखे मिला कर देखिएगा। हो सकता है कुछ शर्म बाकी हो तो वो आँखों में...

NCB ने करण जौहर द्वारा होस्ट की गई पार्टी की शुरू की जाँच- दीपिका, मलाइका, वरुण समेत कई बड़े चेहरे शक के घेरे में:...

ब्यूरो द्वारा इस बात की जाँच की जाएगी कि वीडियो असली है या फिर इसे डॉक्टरेड किया गया है। यदि वीडियो वास्तविक पाया जाता है, तो जाँच आगे बढ़ने की संभावना है।

थालियाँ सजाते हैं यह अपने बच्चों के लिए, हम जैसों को फेंके जाते हैं सिर्फ़ टुकड़े: रणवीर शौरी का जया को जवाब और कंगना...

रणवीर शौरी ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कंगना को समर्थन देते हुए कहा है कि उनके जैसे कलाकार अपना टिफिन खुद पैक करके काम पर जाते हैं।

3 नाबालिग सगी बेटियों में से 1 का 5 साल से रेप, 2 का यौन शोषण कर रहा था मोहम्मद मोफिज

मोफिज ने बीवी को स्टेशन पर ढकेल दिया, क्योंकि उसने बेटी से रेप का विरोध किया। तीनों बेटियाँ नाबालिग हैं, हमारे पास वीडियो कॉल्स और सारे साक्ष्य हैं। बेगूसराय पुलिस इस पर कार्रवाई कर रही है।

‘एक बार दिखा दे बस’: वीडियो कॉल पर अपनी बेटियों से प्राइवेट पार्ट दिखाने को बोलता था मोहम्मद मोहफिज, आज भेजा गया जेल

आरोपित की बेटी का कहना है कि उनका घर में सोना भी दूभर हो गया था। उनका पिता कभी भी उनके कपड़ों में हाथ डाल देता था और शारीरिक संबंध स्थापित करने की कोशिश करता था।

86 साल बाद निर्मली और भपटियाही का ‘मिलन’, पर आत्मनिर्भर बिहार कब बनेगा

आखिर आत्मनिर्भर बिहार कब बनेगा जहाँ के लोग रोजगार के लिए पलायन करने के बदले रोजगार देने वाले बनें?

नेहरू-गाँधी परिवार पर उठाया था सवाल: सदन में विपक्ष के हो-हल्ले के बाद अनुराग ठाकुर ने माँगी माफी, जाने क्या है मामला

"PM Cares एक पंजीकृत चैरिटेबल ट्रस्ट है। मैं साबित करने के लिए विपक्ष को चुनौती देना चाहता हूँ। यह ट्रस्ट इस देश के 138 करोड़ लोगों के लिए है।"

अलीगढ़ में दिन दहाड़े बंदूक की नोक पर 35 लाख के जेवर लूटने वाले तीनों आरोपितों को यूपी पुलिस ने किया गिरफ्तार

कुछ दिन पहले इंटरनेट पर चोरी का वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें ये तीन लुटेरे बंदूक की नोक पर अलीगढ़ में एक आभूषण की दुकान को लूट रहे थे।

‘आपसे उम्मीद की जाती है कि निष्पक्ष रहो’: NDTV पत्रकार श्रीनिवासन को व्यवसायी राकेश झुनझुनवाला ने सिखाया नैतिकता का पाठ

साक्षात्कार के दौरान झुनझुनवाला ने एनडीटीवी पत्रकार और उनके मीडिया हाउस को मोदी से घृणा करने वाला बताया। उन्होंने पत्रकार से कहा, "आप सिर्फ़ सरकार की आलोचना करते हो।"

MP: कॉन्ग्रेस ने गाय को किया चुनाव के लिए इस्तेमाल, शरीर पर पंजे के निशान के साथ लिखा उम्मीदवार का नाम

इंदौर की सांवेर विधानसभा सीट पर उपचुनाव है। उसी चुनाव में लोगों को उम्मीदवार की ओर आकर्षित करने के लिए यह वाहियात कार्य किया गया है।

महाराष्ट्र सरकार के पास कर्मचारियों को सैलरी देने के पैसे नहीं, लेकिन पीआर के लिए खर्च कर रही ₹5.5 करोड़

शिवसेना की अगुवाई वाली महाविकास आघाड़ी समिति के प्रशासन विभाग ने मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र सरकार के पीआर के प्रबंधन के आवेदन करने के लिए निजी विज्ञापन एजेंसियों को आमंत्रित करते हुए एक ई-टेंडर जारी किया है।

‘एक बार दिखा दे बस’: वीडियो कॉल पर अपनी बेटियों से प्राइवेट पार्ट दिखाने को बोलता था मोहम्मद मोहफिज, आज भेजा गया जेल

आरोपित की बेटी का कहना है कि उनका घर में सोना भी दूभर हो गया था। उनका पिता कभी भी उनके कपड़ों में हाथ डाल देता था और शारीरिक संबंध स्थापित करने की कोशिश करता था।

अमेरिका में भी चीनी ऐप्स TikTok और वीचैट पर रविवार से बैन: राष्ट्रीय सुरक्षा में सेंधमारी बताई गई वजह

अमेरिकी सरकार ने भी इन एप्स को बैन करने के पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा में सेंधमारी को कारण बताया है। कोरोना वायरस, चीन की चालबाजी, टैक्नोलॉजी पर बढ़ते तनाव और अमेरिकी निवेशकों के लिए वीडियो ऐप TikTok की बिक्री के बीच यह फैसला सामने आया है।

1995 के अमूल विज्ञापन पर चित्रित उर्मिला पर बौखलाए लिबरल्स: रंगीला के प्रमोशन को जोड़ा कंगना की टिप्पणी से

25 साल पहले बनाया गया यह विज्ञापन अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर की फिल्म 'रंगीला' में उनके प्रदर्शन को देखते हुए बनाया गया था।

शाहीन बाग में जिस तिरंगे की खाई कसमें, उसी का इस्तेमाल पेट्रोल बम बनाने में किया: दिल्ली दंगों पर किताब में खुलासा

"वह प्रदर्शन जो महात्मा गाँधी, डॉ बीआर अम्बेडकर की तस्वीरों और तिरंगा फहराने से शुरू हुआ था उसका अंत तिरंगे से पेट्रोल बम बनाने में, दुकानों को, घरों को जलाने में हुआ।"

हमसे जुड़ें

260,559FansLike
77,913FollowersFollow
322,000SubscribersSubscribe
Advertisements