बिहार चुनाव का शोर चारों तरफ गूँज रहा है। रैलियाँ, नारे, वादे और बयानबाजी सब कुछ चल रहा है। लेकिन इन सबके बीच एक मुद्दा ऐसा उछला है, जो मुस्लिम वोटों की खातिर राजनीति की सारी हदें पार कर रहा है, वो है वक्फ कानून। आरजेडी के युवा नेता तेजस्वी यादव ने कटिहार और किशनगंज की रैलियों में जो कहा, वो सुनकर कोई भी हैरान रह जाएगा। तेजस्वी यादव मंच से ही बोले, “अगर इंडी गठबंधन की सरकार बनी, तो वक्फ संशोधन कानून 2024 को सीधे कूड़ेदान में फेंक देंगे।”
अरे भाई, ये कानून तो अप्रैल 2025 में संसद ने पास किया था। राष्ट्रपति ने हस्ताक्षर किए। ये केंद्र का कानून है। बिहार की राज्य सरकार इसे कैसे फेंक देगी? ये तो वही बात हुई कि कोई कहे, “मैं चाँद पर झंडा गाड़ दूँगा” – सुनने में अच्छा लगता है, करने में नामुमकिन।
वैसे, तेजस्वी को ये बात कहनी थी। क्यों? क्योंकि सीमांचल में मुस्लिम वोटर ज्यादा हैं। कटिहार, किशनगंज, पूर्णिया, अररिया ये इलाके मुस्लिम बहुल हैं। और आरजेडी को पता है, बिना इन वोटों के सत्ता की चाबी नहीं मिलेगी। तो बस वक्फ कानून को मुद्दा बना दिया। तेजस्वी यादव बोले, “ये कानून मुसलमानों के हक पर डाका है।” लेकिन सच क्या है? ये संशोधन कानून तो पारदर्शिता का है। वक्फ बोर्ड में गड़बड़ी बहुत थी। हजारों एकड़ जमीन पर कब्जे, बिना हिसाब-किताब के। सरकार ने कहा, “अब रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा, प्रॉपर्टी का ऑडिट होगा और अन्य लोगों को प्रतिनिधित्व मिलेगा।” लेकिन विपक्ष की समझ में इतना आया कि ये मुस्लिम वोट खिसकाने की साजिश है। तो बस… शुरु हो गई तुष्टिकरण की राजनीति।
तेजस्वी अकेले नहीं हैं इस खेल में। उनकी पार्टी के एमएलसी कारी शोएब तो और आगे निकल गए। खगड़िया के गोगरी में रैली थी। मंच पर तेजस्वी भी थे। कारी शोएब ने माइक थामा और बोले, “तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री बनेंगे, तो सारे बिल फाड़कर फेंक देंगे। वक्फ बिल वालों का इलाज करना है।”
इलाज? मतलब क्या? धमकी? ये जंगलराज की भाषा है। और सचमुच तेजस्वी मंच पर बैठे रहे, मुस्कुराते रहे, कोई टोका-टाकी नहीं। मतलब सबकुछ एक प्लान का हिस्सा था। ये बताना कि मुस्लिमों, तुम कुछ भी करो… हम तुम्हारे साथ हैं और तुम्हें कोई छू भी नहीं सकता।
अब जरा सोचिए, ये वक्फ कानून है क्या? ये कोई छोटी-मोटी बात नहीं। ये संसद का कानून है। राष्ट्रपति की मुहर लगी है। बिहार की सरकार इसे कैसे रद्द करेगी? तेजस्वी कहते हैं, ‘हम फेंक देंगे।’ अरे, फेंकना तो दूर छू भी नहीं सकते। अगर बिहार में इंडी गठबंधन की सरकार बनी भी, तो केंद्र का कानून लागू रहेगा। सुप्रीम कोर्ट है, संविधान है। क्या तेजस्वी राष्ट्रपति को फोन करके कहेंगे, “मैडम, ये कानून वापस ले लो?” या गवर्नर से कहेंगे, “सर, इसे लागू मत करो?” ये सब झूठ है, भ्रम है, वोट के लिए गुमराह करना है।
और मुस्लिम भाइयों को सोचना चाहिए। क्या वक्फ कानून ही उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा मुद्दा है? नहीं ना। असली मुद्दे तो रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा हैं। बिहार में बेरोजगारी सबसे ज्यादा है। युवा नौकरी माँग रहे हैं। मुस्लिम इलाकों में स्कूल-कॉलेज नहीं, अस्पताल नहीं। सीमांचल में बाढ़ आती है, लोग मरते हैं, कोई पूछने वाला नहीं। लेकिन तेजस्वी क्या कहते हैं? “वक्फ कानून फेंक देंगे।” अरे तेजस्वी जी, वक्फ कानून से पेट नहीं भरता। नौकरी नहीं मिलती। बच्चे नहीं पढ़ते।
और सबसे बड़ी बात आरजेडी खुद मुस्लिमों को कितना सम्मान देती है? टिकट बँटवारे में देख लो। बिहार में मुस्लिम आबादी करीब 18% है। लेकिन आरजेडी ने कितने मुस्लिम कैंडिडेट उतारे? गिनती की उँगलियों पर। पिछले चुनाव में भी यही हुआ। लालू यादव के समय में भी ये मुस्लिम वोट बैंक उनके साथ था, लेकिन टिकट की गिनती हमेशा कम ही रही। इस बार हल्ला था कि महागठबंधन किसी मुस्लिम चेहरे को डिप्टी सीएम बनाएगी, लेकिन घोषणा की तो वीआईपी वाले मुकेश सहनी के नाम की?
पीएम मोदी इसे महाठगबंधन कहते हैं। इसमें कॉन्ग्रेस, लेफ्ट सबको हिस्सा चाहिए सिर्फ मुस्लिम वोटों में, इसकी एवज में सत्ता में भागीदारी देने की बात वो करते नहीं। और अब तेजस्वी कहते हैं, “हम आपके हक की लड़ाई लड़ रहे हैं।” अरे हक की लड़ाई टिकट देकर, पद देकर, नौकरी देकर लड़ते हैं, ना कि वक्फ कानून को मुद्दा बनाकर।
लालू प्रसाद यादव को याद करो। वो कहते थे, “जब तक मछली भात रहेगा, लालू की सत्ता रहेगी।” लेकिन मुस्लिमों के लिए क्या किया? जंगलराज दिया। अपहरण, हत्या, भ्रष्टाचार। नीतीश कुमार आए, तो कानून-व्यवस्था सुधरी। अब तेजस्वी आ गए। वही लालू वाली पुरानी स्क्रिप्ट लेकर… नीतीश कुमार को गाली दो, बीजेपी को ‘भारत जलाओ पार्टी’ कहो और आरएसएस को नफरत फैलाने वाला। लेकिन खुद? वक्फ कानून पर धमकी, इलाज की बात। ये भाईचारा है या डर की राजनीति?
मुस्लिम समाज को समझना होगा। वक्फ कानून कोई दुश्मन नहीं है। ये सुधार है। गड़बड़ी रोकने का कानून है। अगर कोई वक्फ की जमीन पर गलत कब्जा कर रहा है, तो उसे रोका जाएगा। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि मुस्लिमों की मजहबी आजादी छीनी जा रही है। मस्जिदें रहेंगी, मदरसे रहेंगे, कब्रिस्तान रहेंगे। बस हिसाब साफ होगा। और जो लोग कहते हैं, “ये मुसलमानों पर हमला है”, वो खुद मुसलमानों को गुमराह कर रहे हैं।
तेजस्वी कहते हैं, “हम संविधान बचाएँगे।” लेकिन संसद के कानून को कूड़ेदान कहना, क्या ये संविधान का सम्मान है? ये तो साफ तौर पर तुष्टिकरण है। खुली हुई वोट बैंक की राजनीति। और मुस्लिम समाज को इसका शिकार नहीं बनना चाहिए। वोट डालो, लेकिन सोच-समझकर। जो पार्टी आपको इज्जत दे, नौकरी दे, शिक्षा दे, सुरक्षा दे, उसी को वोट दो। वक्फ कानून पर झूठी बहादुरी दिखाने वालों को सबक सिखाओ।
बिहार के लोग समझदार हैं। उन्हें भी पता है कि वक्फ कानून कोई राज्य का मुद्दा नहीं। ये केंद्र का कानून है। इसे कोई राज्य सरकार नहीं फेंक सकती। तेजस्वी जानते हैं, कारी शोएब जानते हैं, लालू जी जानते हैं। फिर भी बयानबाजी। क्यों? क्योंकि चुनाव है। वोट चाहिए और मुस्लिम वोटरों को गुमराह करना आसान लगता है।
लेकिन अब समय बदल गया है। मुस्लिम समाज जाग रहा है। वो समझ रहा है कि असली मुद्दे क्या हैं। रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य। वक्फ कानून पर बहस करने से पेट नहीं भरता।
चुनाव में वोट डालते समय सोचना। कौन झूठ बोल रहा है, कौन सच। कौन विकास की बात करता है, कौन सिर्फ वोट बैंक। वक्फ कानून कूड़ेदान में नहीं जाएगा। क्योंकि वो संसद का कानून है। लेकिन जो लोग झूठ बोलकर वोट माँग रहे हैं, उन्हें जरूर सबक सिखाना चाहिए। बिहार को चाहिए विकास, नहीं तो मिलेगा जंगलराज। और जंगलराज में ना मुस्लिम सुरक्षित, ना हिंदू। ये सबके लिए बुरा ही रहेगा।


