Wednesday, September 30, 2020
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BJP की पहली सूची के 184 नामों से पता चलती है भाजपा की नई रणनीति

जहाँ बाकी पार्टियाँ अभी तक मुद्दे डिसाइड नहीं कर पा रहीं वहीं भाजपा ने पहली सूची के माध्यम से अपना विज़न सामने रखा है जिसमें युवाओं को मौके देने से लेकर कॉन्ग्रेस के गढ़ में उसपर आक्रमण करना और वाराणसी के माध्यम से देश के सामने एक बेहतर संसदीय क्षेत्र का विकल्प देना शामिल है।

भारतीय जनता पार्टी ने आगामी लोकसभा चुनाव के लिए 20 अलग-अलग राज्यों में चुनाव लड़ने के लिए 184 उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची जारी कर दी है। सूची की घोषणा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने की। 2014 के चुनावों में चुनाव लड़ने वाले अधिकांश कैबिनेट मंत्रियों और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने अपने निर्वाचन क्षेत्र को बरक़रार रखा गया है और पार्टी कुछ दिग्गज नेताओं को आराम दिया गया है।

दिग्गज नेताओं की जगह नए उम्मीदवारों को चुनाव का हिस्सा बनाने की रणनीति

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह इस साल अपना लोकसभा चुनाव गुजरात के गांधीनगर निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगे। बता दें कि इस सीट से भाजपा वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को आराम दिया गया है। अमित शाह 2017 में गुजरात के लिए राज्यसभा के सांसद चुने गए। इससे पहले, वह 1997 से 2017 तक गुजरात विधानसभा में विधायक थे। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी सहयोगी हैं और गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में वे राज्य सरकार में कई प्रमुख पदों पर रहें हैं।

अमित शाह ने 2014 के लोकसभा चुनावों में भाजपा की जीत सुनिश्चित करने में अपनी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। गांधीनगर से उनकी उम्मीदवारी की घोषणा पार्टी की रणनीति में एक बड़ी बदलाव का संकेत है। लालकृष्ण आडवाणी के अलावा बीसी खंडूरी को लोकसभा चुनाव लड़ने का टिकट नहीं दिया गया। वहीं कलराज मिश्र और भगत सिंह कोश्यारी जैसे वरिष्ठ नेताओं ने आगामी लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए अपनी अनिच्छा की घोषणा पहले ही कर दी थी। वहीं एक नाम विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का भी जुड़ गया है जिन्होंने हाल ही में चुनाव न लड़ने की घोषणा की थी।

बीजेपी के दिग्गज नेताओं में एक नाम मुरली मनोहर जोशी का भी है, जो 2014 में कानपुर से जीते थे। फ़िलहाल उनके चुनाव लड़ने पर अभी भी संशय बरक़रार है। यह संशय इसलिए बरक़रार है क्योंकि बीजेपी ने जो पहली सूची जारी की है उसमें उनका नाम नदारद था।

बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं को चुनावी मैदान से दूर रखने की मंशा नए उम्मीदवारों को जगह देने और उनकी नई सकारात्मक राजनीतिक सोच को सामने लाने के मक़सद से की गई जान पड़ती है। ये बात और है कि विपक्ष द्वारा ऐसा दुष्प्रचार किया जाता है कि बीजेपी वरिष्ठ नेताओं को नज़रअंदाज़ कर रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी से जीत का पूरा भरोसा

अब बात प्रधानमंत्री मोदी की जिन्होंने आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को 3,70,000 से अधिक मतों के अंतर से हराया था, इस बार भी वे वाराणसी निर्वाचन क्षेत्र से ही चुनाव लड़ेंगे। वाराणसी के अलावा उन्होंने गुजरात की वडोदरा सीट से भी चुनाव लड़ा था। इस सीट पर उन्होंने 5,70,000 से अधिक मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी।

वाराणसी की सीट से पीएम मोदी के जीतने के कई कारण हैं जिसमें विशेष तौर पर वहाँ किया गया कायाकल्प है। उनके लगभग साढ़े चार साल के कार्यकाल में वहाँ 126 प्रोजेक्ट को पूरा करवाया गया। कुल 4679.79 करोड़ रुपए की लागत से वाराणसी के कायाकल्प में वे सभी आधारभूत सुधार शामिल हैं जिनसे आम जन-जीवन लाभान्वित हुआ।

वाराणसी में विकास के तहत नगर के इंफ्रास्ट्रकचर में ज़बरदस्त सुधार, मंडुआडीह रेलवे स्टेशन का भव्य पुनर्निर्माण, सड़कों का निर्माण, गलियों-चौराहों की बेहतरी, अंडरग्राउंड वायरिंग से बिजली के तारों को व्यवस्थित करना, पेयजल की व्यवस्था, सीवरेज व्यवस्था, नगर पहले से अधिक साफ़-सुथरा है, बीएचयू ट्रामा सेंटर, बुनकरों के लिए ट्रेड फेसिलिटेशन सेंटर, अस्सी घाटों की सफ़ाई, बैटरी रिक्शों का वितरण, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, गंगा सफ़ाई परियोजना, गंगा में सीवर जाना बंद किया गया, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए गए और वंदे भारत एक्सप्रेस और बिजली व्यवस्था को दुरुस्त करने से लेकर तमाम ढाँचागत परियोजनाओं को समय पर पूरा किया गया।

अमेठी में स्मृति ईरानी और राहुल गाँधी के बीच होगा कड़ा मुक़ाबला

गाँधी परिवार का गढ़ माने जानी वाली अमेठी सीट पर इस बार भी केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और राहुल गाँधी आमने सामने होंगे। बता दें कि साल 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्हें राहुल गाँधी से हार का सामना करना पड़ा था। हार के बावजूद स्मृति ईरानी ने अमेठी पर लगातार अपनी नज़र बनाए रखी है और कॉन्ग्रेस के कारनामों को कई बार उजागर भी किया है।

ऐसे कई मौक़े आए जहाँ अनेकों बार अमेठी के विकास और लचर व्यवस्था की समस्याएँ सामने आईं हैं। हाल ही में जब पीएम मोदी ने कोरवा में रूस के सहयोग से आयुध निर्माणी प्रांगण में ही अत्याधुनिक राइफल फैक्ट्री की आधारशिला रखी, उसी दौरान राहुल गाँधी द्वारा पीएम मोदी को झूठा कहने पर स्मृति ईरानी ने उन्हें आड़े हाथों लिया। उन्होंने ट्विटर पर एक फोटो शेयर की जिससे पता चलता था कि राहुल ने आयुध निर्माणी में 2007 में शिलान्यास किया था। लेकिन पीएम मोदी को जो ट्वीट राहुल ने किया उसमें उन्होंने स्वीकारा कि वो शिलान्यास 2010 में किया था। इस पर स्मृति ईरानी ने चुटकी लेते हुए कहा कि राहुल गाँधी इन दिनों ख़ौफ में हैं जिन्हें अमेठी के विकास के बारे में सही-सही जानकारी नहीं है।

ऐसा ही एक मामला नवंबर 2018 में सामने आया था जब उत्तर प्रदेश के मंत्री श्रीकांत शर्मा ने राहुल गाँधी पर सवाल दागा था कि जो स्वयं अपने निर्वाचन क्षेत्र में 15 सालों से विकास करने में सक्षम नहीं थे वो मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के विकास का वादा कैसे कर सकते हैं। राहुल को अपने निर्वाचन क्षेत्र में विकास न करने पर जवाबदेही बनती है लेकिन वो इस पर आज तक चुप्पी लगाए हुए हैं।

उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री ने कहा था कि अमेठी क्षेत्र कॉन्ग्रेस की विफलताओं का स्मारक है। वहाँ के 5,000 गाँव बिना बिजली के अँधेरे में जीने को मजबूर हैं। सवा लाख घरों तक बिजली नहीं पहुँचाई गई, इस पर राहुल की जवाबदेही बनती है। पीएम मोदी को चुनौती देने से पहले राहुल को अपने निर्वाचन क्षेत्र में फैले अँधेरे पर अपनी चुप्पी तोड़नी होगी।

इसके अलावा ऐसे कई मुद्दों को भी शामिल किया जिनके बारे में जनता को कुछ नहीं मालूम था, हाल ही में गाँधी-वाड्रा परिवार के वो घोटालों भी उजागर हुए जिनकी आँच रक्षा सौदों तक जाती थी। ऐसे में यदि गहनता से सोचा जाए तो राहुल ने विकास के नाम पर लोगों को केवल भ्रमित करने का काम किया है जिसकी बुनियाद केवल झूठ पर टिकी है। इसलिए आगामी लोकसभा चुनाव में स्मृति ईरानी को इसका लाभ निश्चित तौर पर मिलेगा।

बिहार BJP सूची में 17 उम्मीदवार तय, कई बड़े नामों के कटने की संभावना

लोकसभा चुनाव को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की तस्वीर लगभग साफ हो चली है। ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि पार्टी इस बार पटना साहिब से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा को चुनाव लड़ने से बाहर का रास्ता दिखा सकती है। यह भी कहा जा रहा है कि वो कॉन्ग्रेस की टिकट पर इसी सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। वहीं बीजेपी के क़द्दावर नेता गिरिराज सिंह की निर्वाचन सीट बदलकर बेगूसराय करने की भी संभावना है। भागलपुर सीट के जेडीयू पाले में जाने के बाद से ही शाहनवाज़ हुसैन के चुनाव लड़ने पर जहाँ पहले भी संशय था वो जस का तस बना हुआ है।

इन सब बिंदुओं को देखने से पता चलता है कि जहाँ बाकी पार्टियाँ अभी तक मुद्दे डिसाइड नहीं कर पा रहीं वहीं भाजपा ने पहली सूची के माध्यम से अपना विज़न सामने रखा है जिसमें युवाओं को मौके देने से लेकर कॉन्ग्रेस के गढ़ में उसपर आक्रमण करना और वाराणसी के माध्यम से देश के सामने एक बेहतर संसदीय क्षेत्र का विकल्प देना शामिल है।

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