Friday, February 26, 2021
Home विविध विषय धर्म और संस्कृति गाँधी नहीं, ऑरोबिन्दो-विवेकानंद के मापदण्ड पर तौलिए हिंदुत्व को

गाँधी नहीं, ऑरोबिन्दो-विवेकानंद के मापदण्ड पर तौलिए हिंदुत्व को

आधुनिक हिन्दू की आत्मा और उसके विश्वदर्शन को वेदों-उपनिषदों-महापुराणों, पतंजलि के योग सूत्रों, श्रीकृष्ण की गीता आदि से जोड़ने वाले गाँधी जी नहीं, श्री ऑरोबिन्दो और स्वामी विवेकानंद थे। और प्रमुखतम विषयों पर उनके विचारों का गाँधी जी से कोई साम्य नहीं था- दूर-दूर तक नहीं।

इतिहासकार रामचंद्र गुहा, पत्रकार आशुतोष (गुप्ता, वही आम आदमी पार्टी वाले), कॉन्ग्रेस पार्टी (व उसका वृहत्तर इको-सिस्टम), बॉलीवुड, 80%+ भारतीय बौद्धिक वर्ग, और (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राज्यारोहण के बाद से) भाजपा-संघ- इन सब में क्या समानता है?

मोहनदास करमचंद गाँधी इन सब के मानक (model) हिन्दू हैं।

अगर इनमें से किसी को भी अपने विरोधी के हिन्दू होने पर प्रश्न उठाना होता है तो वे फटाक से “अगर महात्मा गाँधी होते तो क्या वे आपकी इस बात का समर्थन करते?” की मिसाइल दाग देते हैं। गोया गाँधी जी की शाबाशी ही हर हिन्दू के जीवन का अंतिम ध्येय है!

गाँधी जी का भारत राष्ट्र-राज्य के निर्माण में योगदान निःसंदेह महत्वपूर्ण है। सत्य के प्रति उनका आग्रह यानि सत्याग्रह की बेशक भारत की आज़ादी में भूमिका को नकारा नहीं जा सकता। पर ‘कोबिगुरू’ रबीन्द्रनाथ टैगोर से ‘महात्मा’ की उपाधि पाने वाले गाँधी का दर्शन भारतीय प्रचलन, आध्यात्म, और परम्पराओं से उतना ही दूर है जितना तेल पानी की प्रकृति से दूर होता है।

आधुनिक हिन्दू की आत्मा और उसके विश्वदर्शन को वेदों-उपनिषदों-महापुराणों, पतंजलि के योग सूत्रों, श्रीकृष्ण की गीता आदि से जोड़ने वाले गाँधी जी नहीं, श्री ऑरोबिन्दो और स्वामी विवेकानंद थे। और प्रमुखतम विषयों पर उनके विचारों का गाँधी जी से कोई साम्य नहीं था- दूर-दूर तक नहीं।

अहिंसा

गाँधी जी ने जितना दुरूपयोग ‘अहिंसा’ शब्द का किया, भारतीय राजनीति में उतना दुरुपयोग शायद ही, कभी भी, किसी भी शब्द या सिद्धांत का हुआ होगा। अहिंसा को उसके भावार्थ और परिप्रेक्ष्य के बिना literally प्रयोग करना शुरू कर दिया। न केवल खुद किया बल्कि दूसरे (केवल) हिन्दुओं  के लिए भी अनिवार्य कर दिया। यहाँ तक कि जिस भगवद्गीता का उद्देश्य ही अर्जुन को युद्ध और धर्मोचित वध के लिए प्रेरित करना था, उसे भी गाँधी जी ने पता नहीं किस कोण से तोड़-मरोड़कर उसमें भी हिंसा को हर परिस्थिति में नकारने की सीख तलाश ली। और खुद के लिए ही नहीं तलाशी, बल्कि हिन्दुओं के गले भी जबरन बाँधने लगे।

नतीजन हिन्दुओं में जहाँ यथोचित हिंसा के लिए भी घृणा उत्पन्न हुई, वहीं दूसरे समुदाय (खासकर कि मुस्लिम) हिन्दुओं में इसी पलटवार की क्षमता के ह्रास के बल पर बढ़ते चले गए। इसी बढ़त की चरम परिणति थी 1947 का नरसंहार।

इसी के उलट थे श्री ऑरोबिन्दो और स्वामी विवेकानंद के विचार।

स्वामी विवेकानंद से जब अहिंसा के बारे में उनके विचार पूछे गए तो उन्होंने साफ कहा कि शत-प्रतिशत अहिंसा केवल सन्यासियोंके लिए उचित है; गृहस्थ के लिए आत्मरक्षा सर्वोपरि है। जीएस बाणहट्टी की किताब ‘लाइफ एण्ड फ़िलॉसॉफ़ी ऑफ़ विवेकानंद’ के अनुसार विवेकानंद से जब पूछा गया कि यदि कमज़ोर को ताकतवर के हाथों शोषित देखें तो क्या करना चाहिए, तो उन्होंने कहा, ‘(शोषक को) पीटना चाहिए, और क्या?’

अपने ग्रन्थ ‘एसेज़ ऑन गीता’ (गीता पर निबंध) में श्री ऑरोबिन्दो लिखते हैं (अनूदित), “यदि आपका केवल आत्म-बल आसुरिक शक्ति को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं है और इसके बाद भी आप शारीरिक प्रतिरोध नहीं करते, तो असुर बिना किसी विरोध के मनुष्यों और राष्ट्रों को कुचलता आगे बढ़ता है, विनाश करता है, हत्याएँ करता है, सब कुछ बहुत आसानी से नष्ट-भ्रष्ट कर देता है, और आपकी अहिंसा दूसरों की हिंसा जैसी ही तबाही करती है।”

हिन्दू-मुस्लिम सम्बन्ध

गाँधी जी हिन्दुओं और सम्प्रदाय विशेष को अपनी दो आँखें कहते थे, यह तो बड़ी अच्छी थी, पर जब एक आँख दूसरी आँख के विनाश को आमादा थी तो गाँधी जी का हिन्दुओं के प्रति सौतेला व्यवहार घोर निराशाजनक था।

न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी खबर के अनुसार गाँधी जी ने हिन्दुओं से कहा कि वे (दंगों से बचने के लिए) नोआखली छोड़ दें या क़त्ल हो जाएँ। 6 अप्रैल, 1947 को नई दिल्ली की एक प्रार्थना सभा में उन्होंने कहा, “…अगर मुस्लिम हम सभी (हिन्दुओं) की हत्या कर देना चाहते हैं तो हमें ‘वीरतापूर्वक’ मृत्यु स्वीकार कर लेनी चाहिए। यदि वे हम सबको मारकर अपना राज स्थापित करना चाहते हैं तो हम अपने प्राणों को उत्सर्ग कर उन्हें एक नई दुनिया में पहुँचाएँगे…”
(Collected Works of Mahatma Gandhi, Vol. 94 page 249)

क्या कोई बता सकता है कि उन्होंने मुस्लिमों को भी ऐसी ही कोई सलाह दी हो?

वहीं श्री ऑरोबिन्दो ऐसी कोई अव्यवहारिक राय नहीं रखते थे। हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रश्न पर उन्होंने कहा(अनूदित), “जिस मज़हब/पंथ के सिद्धांत में सहिष्णुता हो, उसके साथ (बेशक) शांति के साथ रहा जा सकता है। पर उनके साथ शांति के साथ रह पाना कैसे संभव है जिनका सिद्धांत ही ‘मैं तुम्हें (अपने से भिन्न ईश्वर के तुम्हारे विचारों को) नहीं सहूँगा’ है? ऐसे व्यक्तियों के साथ एकता कैसे संभव है?”

‘प्रबुद्ध भारत’ पत्रिका के संपादक से वार्तालाप में स्वामी विवेकानंद ने भी साफ कहा कि वह इस्लाम के पैगम्बर मुहम्मद से बहुत प्रभावित नहीं हैं। वह मुहम्मद के प्रशिक्षित योगी न होने की भी बात कहते थे, और कहते थे कि चरमपंथी तरीकों से नुकसान ही अधिक हुआ है।

ऐसा नहीं है कि ऑरोबिन्दो-विवेकानंद व्यक्तिगत मुस्लिमों से व्यक्तिगत हिन्दुओं के संघर्ष का समर्थन करते थे- वे दोनों इसके खिलाफ थे। पर वे इस्लाम और हिंदुत्व में निहित नैसर्गिक विरोधाभासों को साफ-साफ देखते समझते थे (गाँधी जी के उलट), और हिन्दुओं को केवल इसके प्रति सदा सजग रहने की सलाह देते थे।

आंतरिक दमन व ‘हिंसा’ पर था गाँधी जी का जोर  

गाँधी जी के आत्मकथ्यों को यदि कोई निष्पक्ष भाव से पढ़े तो यह साफ हो जाएगा कि स्व-दमन ही गाँधी जी के सारे अजीबोगरीब सिद्धांतों का मूल था। और यह क्रूर था, निष्ठुर था, बलात् था। खुद को हिन्दू मानते हुए भी हिन्दुओं से कट जाने की अपील भी इसी दमन का बाह्य, सार्वजनिक अभिव्यक्ति थी- और उनके अन्य ‘प्रयोग’, जिनमें विवाहित युगलों को शारीरिक सम्बन्ध न बनाने की सीख शामिल हैं, इसी विचार के अन्य व्यक्त स्वरूप थे। यह नैतिकता का चरमपंथ था।

और, स्व-दमन व चरमपंथी नैतिकता कभी भी हिन्दू दर्शन नहीं रहे। विवेकानंद सन्यासी होते हुए भी धूम्रपान करते थे, मटन खाते थे– उनके गुरू श्री रामकृष्ण परमहंस भोजन के शौकीन थे। हिन्दू दर्शन बाह्य, जबरिया, इच्छा होते हुए भी स्थायी त्याग का कभी नहीं रहा। स्थायी त्याग तभी किया जाता था जब इच्छा (वासना) समाप्त हो जाती थी।

समय है बदलाव का   

उपरोक्त उदाहरण केवल राजनीति पर आधारित हैं- यदि राजनीति छोड़ और गहरे जाएँगे तो गाँधी जी का दर्शन और भी अहिंदू होता जाता है। इसका यह अर्थ नहीं कि भारत के राजनीतिक इतिहास में गाँधी जी का एक विशेष, महत्वपूर्ण स्थान नहीं है। बिलकुल है। सौ बार है।

पर समय आ गया है कि गाँधी जी के मापदण्ड पर हिन्दुओं का, या किसी के हिंदुत्व का, आकलन बंद किया जाए। यदि किसी के हिंदुत्व का आकलन होना ही है तो वह श्री ऑरोबिन्दो और स्वामी विवेकानंद के मानक पर किया जाए।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘ज्यादा गर्मी ना दिखाएँ, जो जिस भाषा को समझेगा, उसे उस भाषा में जवाब मिलेगा’: CM योगी ने सपाइयों को लताड़ा

"आप लोग सदन की गरिमा को सीखिए, मैं जानता हूँ कि आप किस प्रकार की भाषा और किस प्रकार की बात सुनते हैं, और उसी प्रकार का डोज भी समय-समय पर देता हूँ।"

‘लियाकत और रियासत के रिश्तेदार अब भी देते हैं जान से मारने की धमकी’: दिल्ली दंगा में भारी तबाही झेलने वाले ने सुनाया अपना...

प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि चाँदबाग में स्थित दंगा का प्रमुख केंद्र ताहिर हुसैन के घर को सील कर दिया गया था, लेकिन 5-6 महीने पहले ही उसका सील खोला जा चुका है।

3 महीनों के भीतर लागू होगी सोशल, डिजिटल मीडिया और OTT की नियमावली: मोदी सरकार ने जारी की गाइडलाइन्स

आपत्तिजनक विषयवस्तु की शिकायत मिलने पर न्यायालय या सरकार जानकारी माँगती है तो वह भी अनिवार्य रूप से प्रदान करनी होगी। मिलने वाली शिकायत को 24 घंटे के भीतर दर्ज करना होगा और 15 दिन के अंदर निराकरण करना होगा।

भगोड़े नीरव मोदी भारत लाया जाएगा: लंदन कोर्ट ने दी प्रत्यर्पण को मंजूरी, जताया भारतीय न्यायपालिका पर विश्वास

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नीरव की मानसिक सेहत को लेकर लगाई गई याचिका को ठुकरा दिया। साथ ही ये मानने से इंकार किया कि नीरव मोदी की मानसिक स्थिति और स्वास्थ्य प्रत्यर्पण के लिए फिट नहीं है।

LoC पर युद्धविराम समझौते के लिए भारत-पाक तैयार, दोनों देशों ने जारी किया संयुक्त बयान

दोनों देशों ने तय किया कि आज, यानी 24-45 फरवरी की रात से ही उन सभी पुराने समझौतों को फिर से अमल में लाया जाएगा, जो समय-समय पर दोनों देशों के बीच हुए हैं।

यहाँ के CM कॉन्ग्रेस आलाकमान के चप्पल उठा कर चलते थे.. पूरे भारत में लोग उन्हें नकार रहे हैं: पुडुचेरी में PM मोदी

PM मोदी ने कहा कि पहले एक महिला जब मुख्यमंत्री के बारे में शिकायत कर रही थी, पूरी दुनिया ने महिला की आवाज में उसका दर्द सुना लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री ने सच बताने की बजाए अपने ही नेता को गलत अनुवाद बताया।

प्रचलित ख़बरें

UP पुलिस की गाड़ी में बैठने से साफ मुकर गया हाथरस में दंगे भड़काने की साजिश रचने वाला PFI सदस्य रऊफ शरीफ

PFI मेंबर रऊफ शरीफ ने मेडिकल जाँच कराने के लिए ले जा रही UP STF टीम से उनकी गाड़ी में बैठने से साफ मना कर दिया।

कला में दक्ष, युद्ध में महान, वीर और वीरांगनाएँ भी: कौन थे सिनौली के वो लोग, वेदों पर आधारित था जिनका साम्राज्य

वो कौन से योद्धा थे तो आज से 5000 वर्ष पूर्व भी उन्नत किस्म के रथों से चलते थे। कला में दक्ष, युद्ध में महान। वीरांगनाएँ पुरुषों से कम नहीं। रीति-रिवाज वैदिक। आइए, रहस्य में गोते लगाएँ।

शैतान की आजादी के लिए पड़ोसी के दिल को आलू के साथ पकाया, खिलाने के बाद अंकल-ऑन्टी को भी बेरहमी से मारा

मृत पड़ोसी के दिल को लेकर एंडरसन अपने अंकल के घर गया जहाँ उसने इस दिल को पकाया। फिर अपने अंकल और उनकी पत्नी को इसे सर्व किया।

केरल में RSS कार्यकर्ता की हत्या: योगी आदित्यनाथ की रैली को लेकर SDPI द्वारा लगाए गए भड़काऊ नारों का किया था विरोध

SDPI की रैली में कुछ आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी, जिसके खिलाफ हिन्दू कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे थे। मृतक नंदू के एक साथी पर भी चाकू से वार किया गया, जिनका इलाज चल रहा है।

‘लोकतंत्र सेनानी’ आज़म खान की पेंशन पर योगी सरकार ने लगाई रोक, 16 सालों से सरकारी पैसों पर कर रहे थे मौज

2005 में उत्तर प्रदेश की मुलायम सिंह यादव की सपा सरकार ने आजम खान को 'लोकतंत्र सेनानी' घोषित करते हुए उनके लिए पेंशन की व्यवस्था की थी।

UP: भीम सेना प्रमुख ने CM आदित्यनाथ, उन्नाव पुलिस के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत दर्ज की FIR

भीम सेना प्रमुख ने CM योगी आदित्यनाथ और उन्नाव पुलिस अधिकारियों पर गुरुग्राम में SC/ST एक्ट के तहत शिकायत दर्ज करवाई है।
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

292,062FansLike
81,848FollowersFollow
392,000SubscribersSubscribe