Wednesday, May 25, 2022
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‘कॉन्ग्रेस को 3 सीटें नहीं मिलेंगी’ कह कर तीसरा पुशअप नहीं किया, हुआ भी यही: कई चुनावों में ऐसे सही साबित हुए प्रदीप भंडारी और ‘जन की बात’

2019 में देश ने कैसे प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी को चुना, उस पर प्रदीप भंडारी ने विस्तार के साथ 'मोदी विजयगाथा' पुस्तक में लिखा भी है। इस किताब से ही उनके कठिन मेहनत को समझा जा सकता है।

कई चुनाव परिणामों को देखकर यह अहसास होने लगा था कि ओपिनियन पॉल और एग्जिट पॉल बिल्कुल धोखा जैसा ही है। कभी किसी एक एजेंसी की कोई एक एक्जिट पॉल सही हो गई, तो वर्षों तक उसी के मार्केटिंग से नाम चलाने की परंपरा रही है। लेकिन, जब वर्ष 2019 में मेरे गृह राज्य झारखंड में विधानसभा चुनाव होने वाले थे, तब चुनाव के पूर्व ‘जन की बात’ के संस्थापक प्रदीप भंडारी से एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में भेंट हुई और उन्होंने मुझे बताया कि झारखंड में न केवल सत्ता परिवर्तन हो रहा है अपितु तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास आपना चुनाव भी हार रहे हैं।

झारखंड के एक्जिट पोल में भी ‘जन की बात’ ने जोर देकर कहा कि मुख्यमंत्री रघुवर दास चुनाव हार रहे हैं और अंततः परिणाम के बाद इसकी पुष्टि भी हो गई। इस घटना के बाद मैं “जन की बात” के चुनावी आकलनों को लगातार फॉलो करने लगा। भारतीय ऑपेनियन पोल और एक्जिट पोल, जिससे मेरा विश्वास उठ चुका था, उस स्थान पर “जन की बात” पर मेरे विश्वास में थोड़ी वृद्धि हुई। लेकिन अब भी मन में यह प्रश्न उठ रहा था कि अन्य कई एजेंसियाँ भी कभी-कभी सही साबित होती हैं, उसी तरह ‘जन की बात’ ने भी तुक्का लगाया होगा और वह सही हो गया होगा।

झारखंड विधानसभा चुनाव के बाद वर्ष 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान भी ‘जन की बात’ पर मेरी नजर बनी हुई थी। दिल्ली विधानसभा में सभी एजेंसियाँ कॉन्ग्रेस को 10% का वोट शेयर दिखा रही थी, लेकिन ‘जन की बात’ ने कॉन्ग्रेस को 5% वोट का आकलन किया। इसके साथ ही ‘जन की बात’ के अनुसार, उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया को अपने विधानसभा क्षेत्र में अत्यंत कड़ी चुनौती मिलने की भी बात एग्जिट पोल में बताई।

दिल्ली में कॉन्ग्रेस को 5% से कम वोट शेयर देने के कारण कई राजनीति पंडितों ने ‘जन की बात’ के संस्थापक प्रदीप भंडारी की कठोर आलोचना भी की। परंतु चुनाव परिणाम के बाद ‘जन की बात’ का आकलन पुनः सही साबित हुआ। चुनाव परिणाम के दौरान वास्तव में  उ-पमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया अपने सीट पर काफी संघर्ष करते हुए दिख रहे थे। इस तरह ‘जन की बात’ ने मेरे दिल में जगह बना ली। मैंने अन्य एजेंसियों के तरह इसके एग्जिट पोल और ओपिनियन पोल को केवल मनोरंजनात्मक नहीं पाया, बल्कि उसमें काफी गहनता दिखी।

इसका प्रमुख कारण ‘जन की बात’ का वास्तव में ग्राउंड पर सर्वे करना है। दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान तो ‘जन की बात’ ने हर वार्ड स्तर पर सर्वे कर डाला था।  जबकि दूसरी एजेंसियाँ अपने AC ऑफिस से बाहर नहीं निकल पा रही हैं। ‘जन की बात’ के संस्थापक प्रदीप भंडारी मतदान व्यवहार के निष्कर्षों को अत्यंत वैज्ञानिक प्रणाली द्वारा निकालते हैं। यही कारण है कि एग्जिट पोल और ओपिनियन पोल के भारतीय स्वरूप को उन्हें बदलने का श्रेय जाता है।

पिछले वर्ष पश्चिम बंगाल के चुनाव में ‘जन की बात’ बीजेपी की सरकार बना रही थी, लेकिन चुनाव परिणाम में ममता बनर्जी की सरकार पुनः मजबूती आई। मेरा भी व्यक्तिगत आकलन पश्चिम बंगाल में बीजेपी के लिए 70-90 सीट था और बीजेपी ने 77 सीटें प्राप्त की। लंबे समय बाद पश्चिम बंगाल में ‘जन की बात’ असफल हुई, लेकिन सफलता-विफलता के अनुपात में अब भी सफलता का हिस्सा काफी बड़ा था। ‘जन की बात’ ने नंदीग्राम सीट से ममता बनर्जी के हारने और शुभेंदु अधिकारी के जीतने के बारे में भविष्यवाणी की थी।

साथ ही ‘जन की बात’ ने एग्जिट पोल में बताया था कि ममता बनर्जी इस सीट पर लगभग दो हजार वोटों से हार जाएँगी। अंततः चुनाव परिणाम में ममता बनर्जी को शुभेदु अधिकारी ने 1956 वोटों से हराया। इस तरह नंदीग्राम सीट पर ‘जन की बात’ का आकलन पूर्णतः सही रहा। हाल के 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव में भी ‘जन की बात’ ने जबरदस्त ऐतिहासिक सफलता दर्ज की। न केवल सीटों की संख्या अपितु वोट प्रतिशत के दृष्टि से भी ‘जन की बात’ ने उत्तर प्रदेश एग्जिट पोल में बीजेपी गठबंधन का मत प्रतिशत 40-42% बताया था, चुनाव परिणाम में भी बीजेपी गठबंधन को 41% मत मिला।

इस तरह JKB (जन की बात) उत्तर प्रदेश एग्जिट पोल में पूर्णतः सही रहा। पंजाब में JKB ने एग्जिट पोल में आम आदमी पार्टी (AAP) का मत प्रतिशत 39%-43% के बीच बताया। चुनाव परिणाम में AAP को 42% मत मिले। यहाँ भी ‘जन की बात’ पूर्णतः सही साबित हुई। इसी तरह गोवा में ‘जन की बात’ एग्जिट पोल में बीजेपी गठबंधन का वोट शेयर 31%-33% बताया गया, चुनाव परिणाम में भी बीजेपी को 33.31% प्रतिशत मत मिले।

मणिपुर में JKB एक्जिट पोल में बीजेपी का वोट शेयर 34-38% बताया गया, चुनाव परिणाम में बीजेपी का वोट शेयर 37.68% रहा। यहाँ भी वोट प्रतिशत आकलन शत-प्रतिशत सही रहा। इस तरह सीटों की संख्या के मामले में हाल के 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव में ‘जन की बात’ पूर्णतः सफल रहा। 2019 के लोकसभा चुनाव में ‘जन की बात’ के संस्थापक प्रदीप भंडारी ने संपूर्ण देश की जबरदस्त यात्रा कर चुनाव सर्वे किया था।

2019 में देश ने कैसे प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी को चुना, उस पर प्रदीप भंडारी ने विस्तार के साथ ‘मोदी विजयगाथा’ पुस्तक में लिखा भी है। इस किताब से ही उनके कठिन मेहनत को समझा जा सकता है। वे लगातार ग्राउंड पर भ्रमण कर एसी रूम से सर्वे करने वाले एजेंसियों को चुनौती दे रहे है। इस बार अधिकांश एजेंसियों ने पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने की बात कही, लेकिन आम आदमी पार्टी जिस तरह 92 अप्रत्याशित सीट संख्या पर पहुँच गई, उस संख्या के पास 88 का अनुमान केवल ‘जन की बात’ ने ही लगा पाई।

प्रदीप भंडारी और मेरी राजनीति सोच में जबरदस्त अंतर है, लेकिन जब एग्जिट पोल और ओपिनियन पोल के आँकड़ों की बात होती है, तो ‘जन की बात’ ने जो अब अपना इतिहास बनाया है, वह बेमिसाल है। उत्तर प्रदेश के एग्जिट पोल के दौरान प्रदीप भंडारी ने कॉन्ग्रेस को केवल 2 सीट मिलने की बात कही थी। इसके लिए उन्होने अपने कार्यक्रम में केवल दो पुश अप मारा था और कहा था कि तीसरा पुश अप मैं फुल नहीं करूँगा, क्योंकि कॉन्ग्रेस को तीसरी सीट नहीं मिल रही।

उनका यह वीडियो काफी वायरल भी हुआ तथा वे आलोचना के घेरे में भी आएँ। लेकिन, चुनाव परिणाम के बाद कॉन्ग्रेस को जिस तरह केवल 2 सीटें मिलीं, उससे ‘जन की बात’ पुनः सही साबित हुई। वास्तव में ‘जन की बात’ ने पिछले कुछ वर्षों में एग्जिट पोल और ऑपेनियन पोल में इतिहास बनाया है, इससे कोई इनकार नहीं कर सकता।

(लेखक राहुल लाल वरिष्ठ लेखक एवं आर्थिक विश्लेषक हैं)

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