Sunday, May 19, 2024
Homeविचारराजनैतिक मुद्दे10 साल में दिग्विजय सिंह ने कर दिया था बँटाधार, शिव'राज' में बदल गया...

10 साल में दिग्विजय सिंह ने कर दिया था बँटाधार, शिव’राज’ में बदल गया MP: कॉन्ग्रेस की ‘बीमारू’ कमाई, BJP ने बदली तस्वीर

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में मध्य प्रदेश में जबरदस्त विकास हुआ। उन्हें विरासत में खस्ताहाल खजाना, पटरी से उतरती अर्थव्यवस्था, अव्यवस्थित शासन, ढहता बुनियादी ढाँचा मिला था। इन चुनौतियों के बावजूद उन्होंने राज्य में एक उल्लेखनीय परिवर्तन किया। इस कारण से मध्य प्रदेश पर से कुख्यात 'बीमारू' टैग हट गया है।

मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव में शुक्रवार (17 नवंबर 2023) को 230 सीटों के लिए मतदान है। राज्य के मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग कर मध्य प्रदेश के साथ-साथ भाजपा और कॉन्ग्रेस के भाग्य का भी फैसला करेंगे। यहाँ कॉन्ग्रेस के दिग्विजय सिंह के शासन और भाजपा के शिवराज सिंह चौहान के शासन के बीच का विश्लेषण किया गया है।

2003 के बाद से GDSP में 16 गुना और प्रति व्यक्ति आय में 10 गुना वृद्धि

मध्य प्रदेश के आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2003-04 में जीएसडीपी 85,530.48 करोड़ रुपए दर्ज की गई थी। वहीं, प्रति व्यक्ति आय लगभग 13,465 रुपए थी। इसके विपरीत, इस वर्ष 2023 के बजटीय विश्लेषण में जीएसडीपी लगभग 13,87,117 करोड़ रुपए होने का अनुमान है।

अगर इसी वर्ष में प्रति व्यक्ति आय की बात करें तो यह बढ़कर 1,40,583 रुपए हो गई है। इस तरह मध्य प्रदेश की जीएसडीपी में 16 गुना से अधिक की जबरदस्त वृद्धि देखी गई है। वहीं, प्रति व्यक्ति आय में भी लगभग दस गुना वृद्धि देखी गई है।

इसके अलावा, मध्य प्रदेश ने वित्तीय वर्ष 2022-23 में लगभग 16.43 प्रतिशत की आर्थिक विकास दर दर्ज की गई है, जो कि कोविड के कारण उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद यह बेहतर प्रदर्शन है। पिछले वित्त वर्ष 2021-22 में विकास दर करीब 18.02 फीसदी रही थी।

इसी प्रकार, 2003 के बाद से आर्थिक विकास दर में वृद्धि अक्सर दोहरे अंक रही है। इसके विपरीत, वित्तीय वर्ष 2002-03 के दौरान, जीएसडीपी वृद्धि दर नकारात्मक (-) 4.01 प्रतिशत थी। इसमें उतार-चढ़ाव होता रहा। इन आँकड़ों से वर्ष-दर-वर्ष के आधार पर तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के एक दशक लंबे कार्यकाल के दौरान अनियमित सरकारी नीतियों का संकेत मिलता है।

वित्त वर्ष 2023-24 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 55,708 करोड़ रुपए (जीएसडीपी का 4%) है, जबकि 2002-03 में यह लगभग 4,062 करोड़ रुपए (जीएसडीपी का 5.29%) था। वित्तीय वर्ष 2003-04 में सकल ऋण जीएसडीपी का 33.71 प्रतिशत था, जो 2023-24 में घटकर 30.4 प्रतिशत रह गया है।

यहाँ ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि पूंजीगत व्यय 19 गुना बढ़ने के बावजूद debt-to-GSDP में कमी आई है। यह 2023-24 में लगभग 54,056 करोड़ रुपए होने का अनुमान है, जो लगभग 2003-04 में 2,838 करोड़ रुपए था। इसी तरह, मध्य प्रदेश वर्ष 2002-03 में का कर राजस्व मात्र 6,805 करोड़ रुपए था। साल 2023-24 में इसमें लगभग 13 गुना वृद्धि देखी गई है और इसे लगभग 86,500 करोड़ रुपए होने का अनुमान है।

इसी तरह, किसी भी राज्य के स्वास्थ्य मापदंडों के संकेतक मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) और शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) जैसे सूचकांकों में भी काफी सुधार हुआ है। 2001-2003 के बीच किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, राज्य का एमएमआर लगभग 379 था। 2019 में ही इसमें लगभग 57% की गिरावट देखी गई।

साल 2017-19 में मातृ मृत्यु लगभग 163 था। इसी तरह मध्य प्रदेश ने भाजपा शासन के दौरान शिशु मृत्यु दर (प्रति 1,000 जीवित जन्म) को कम करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है। साल 2003 में यह लगभग 82 के उच्चतम स्तर था, जो देश में सबसे खराब स्थानों में से एक था। साल 2020 में यह दर लगभग आधी यानी 43 रह गई है।

इसी प्रकार, मध्य प्रदेश की कृषि विकास दर वर्ष 2002 में 3 प्रतिशत थी जो हाल के वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि के साथ 19 प्रतिशत हो गई है। इसके अतिरिक्त, सिंचाई क्षमता में 585 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, जो 2003 में 7 लाख 50 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 45 लाख हेक्टेयर को पार कर गई है।

इसी तरह, औद्योगिक विकास दर की बात करें तो यह साल 2001-02 में मात्र 0.61 प्रतिशत थी, जो अब प्रभावशाली ढंग से बढ़कर 24 प्रतिशत हो गई है। शिवराज सिंह चौहान के शासन में मध्य प्रदेश ने वर्ष 2022 में 7वीं बार ‘कृषि कर्मण्य पुरस्कार’ जीता है। यह पुरस्कार गेहूँ, धान, दालें, बाजरा आदि फसलों के उत्पादन के लिए दिया जाता है।

इसके अलावा, कृषि निधि के उच्चतम उपयोग के लिए मध्य प्रदेश को ‘बेस्ट परफॉर्मिंग स्टेट’ का भी पुरस्कार भी मिला है। चौहान सरकार ने लगभग 5 लाख शहरी छोटे व्यवसायों को 521 करोड़ रुपए से अधिक का ऋण वितरित करके अन्य राज्यों को पछाड़ा है। इसके साथ रेहड़ी-पटरी पर व्यवसाय करने वाले लोगों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएँ लागू की गई हैं।

केंद्र सरकार की किसान सम्मान निधि के माध्यम से मिलने वाले 6,000 रुपए के अलावा मध्य प्रदेश सरकार किसान कल्याण योजना के तहत राज्य को किसानों को 4,000 रुपए वार्षिक देती है। इस तरह लाभार्थी किसानों को साल में कुल 10,000 रुपए की वित्तीय सहायता मिल जाती है।

अहर राजनीतिक परिदृश्य पर विचार किया जाए तो मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में भाजपा की परिवर्तनकारी शासन का महत्व और भी बढ़ जाता है। सीएम चौहान ने 30 नवंबर 2005 को मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला था। इसके बाद उन्होंने एक ऐसी भूमिका में कदम रखा, जिसमें उन्होंने उमा भारती की जगह लेते हुए क्रांतिकारी परिवर्तन किए।

शिवराज सिंह चौहान की प्रभावी डिलीवरी और शासन शैली ने उन्हें 2018 तक लगातार तीन कार्यकाल तक सेवा प्रदान करने में मदद की। साल 2018 के विधानसभा चुनावों में रिकॉर्ड चौथी बार सरकार बनाने से चूकने के बावजूद शिवराज सिंह चौहान 23 मार्च 2020 को सत्ता में फिर लौट आए। इस तरह मध्य प्रदेश के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड बना डाला।

साल 1993 से 2003 तक कॉन्ग्रेस सरकार में दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री थे। एक दशक लंबे कार्यकाल के दौरान राज्य को ‘बीमारू’ राज्य का कुख्यात उपनाम मिला। BIMARU बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश का संक्षिप्त रूप है। ये राज्य विकास और सुशासन के प्रमुख मापदंडों को पूरान नहीं करने वाले राज्य हैं।

कल्याणकारी योजनाएँ एवं प्रभावी वितरण

अपने प्रारंभिक कार्यकाल के दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने अपने चुनावी वादों को पूरा किया। ये वादे ‘बिजली, सड़क और पानी’ से संबंधित थे। अपने प्रभावी कार्यान्वयन से उन्होंने दो बार सत्ता विरोधी लहर को मात दी। इसके साथ ही उन्होंने अपने कार्यकाल के शुरुआत में विद्रोह को दबाने के लिए मतदाताओं के साथ-साथ पार्टी नेताओं का भी विश्वास हासिल किया।

इसके लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कल्याणकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन पर बल दिया। पिछले साल सितंबर में उन्होंने दो दर्जन योजनाओं के लाभार्थियों के नामांकन की सुविधा और उनके वितरण में खामियों को दूर करने के लिए जनसेवा अभियान शुरू किया।

अपनी लो प्रोफ़ाइल और उदार छवि के साथ सर्व सुलभ मुख्यमंत्री चौहान ने राज्य में कल्याणकारी योजनाएँ लागू कीं। इसमें प्रमुख महिला सशक्तीकरण को लेकर शुरू की गई लाडली लक्ष्मी योजना और कन्यादान योजना भी शामिल है। उन्होंने ‘मामा’ उपनाम अर्जित किया और महिला मतदाताओं अपनी जबरदस्त पकड़ बनाई।

दरअसल, लाडली लक्ष्मी योजना लड़कियों के जन्म को लेकर लोगों में सकारात्मक धारणा पैदा करने के लिए शुरू गई थी। यह एक सरकार द्वारा प्रायोजित बीमा योजना है, जो लड़की को 21 वर्ष की आयु तक पहुँचने पर 1 लाख रुपए की राशि देती है। इसमें प्रमुख शर्त ये है कि लड़की की शादी कानूनी उम्र 18 साल से पहले नहीं होनी चाहिए।

महिलाओं की कल्याण योजना में नकद प्रोत्साहन योजना भी शामिल है, जो उन्हें अस्पताल में प्रसव कराने के लिए प्रोत्साहित करती है। इस पहल से अस्पताल में प्रसव कराने में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है। इस योजना के कारण यह दर 26 से बढ़कर 70 प्रतिशत हो गई। इन महिला-केंद्रित योजनाओं से साक्षरता दर और एमएमआर और आईएमआर जैसे स्वास्थ्य मापदंडों में सुधार करने में लाभ मिला।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में मध्य प्रदेश में जबरदस्त विकास हुआ। उन्हें विरासत में खस्ताहाल खजाना, पटरी से उतरती अर्थव्यवस्था, अव्यवस्थित शासन, ढहता बुनियादी ढाँचा मिला था। इन चुनौतियों के बावजूद उन्होंने राज्य में एक उल्लेखनीय परिवर्तन किया। इस कारण से मध्य प्रदेश पर से कुख्यात ‘बीमारू’ टैग हट गया है।

Special coverage by OpIndia on Ram Mandir in Ayodhya

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

Paurush Gupta
Paurush Gupta
Proud Bhartiya, Hindu, Karma believer. Accidental Journalist who loves to read and write. Keen observer of National Politics and Geopolitics. Cinephile.

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘कॉन्ग्रेस के मेनिफेस्टो में मुस्लिम’ : सिर्फ इतना लिखने पर ‘भीखू म्हात्रे’ को कर्नाटक पुलिस ने गिरफ्तार किया, बोलने की आजादी का गला घोंट...

सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर 'भीखू म्हात्रे' नाम के फिक्शनल नाम से एक्स पर अपनी राय रखते हैं। उन्होंने कॉन्ग्रेस के मेनिफेस्टो पर अपनी बात रखी थी।

जिसे वामपंथन रोमिला थापर ने ‘इस्लामी कला’ से जोड़ा, उस मंदिर को तोड़ इब्राहिम शर्की ने बनवाई थी मस्जिद: जानिए अटाला माता मंदिर लेने...

अटाला मस्जिद का निर्माण अटाला माता के मंदिर पर ही हुआ है। इसकी पुष्टि तमाम विद्वानों की पुस्तकें, मौजूदा सबूत भी करते हैं।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -